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धांधली:तालाब पर पुरानी पचरी को दिखा लिया पेमेंट, ईई, एसई और ठेकेदार को नोटिस

रायगढ़2 महीने पहले
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  • एक तरफ नगर निगम में राजस्व वसूली धीमी होने से फंड नहीं, दूसरी तरफ बिना काम के हो रहा है लाखों का भुगतान, वार्ड 41 के सहदेवपाली में तालाब में पचरी निर्माण के नाम पर गड़बड़ी

निगम में एक तरफ राजस्व वसूली सही नहीं हो पाने के कारण जरूरी खर्च नहीं कर पाता है वहीं इंजीनियर और कर्मचारी ठेकेदार से मिलीभगत कर बिना काम के भुगतान कर रहे हैं। तालाब में पचरी बनाए बिना ही भुगतान लेने के एक मामले में शिकायत सही पाए जाने के बाद ईई, एसई और ठेकेदार को नोटिस दिया गया है। दूसरे मामले में लगभग पांच लाख रुपए से तालाब की सफाई की गई। चार महीने बाद स्थिति जस की तस हो गई। चार लाख का बिल लगा दो लाख का भुगतान लिया-निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय ने वार्ड क्रमांक वार्ड क्रमांक 41 में पचरी निर्माण में गड़बड़ी पाए जाने पर ठेकेदार संजय अग्रवाल, ईई अजीत तिग्गा और संबंधित सब इंजीनियर को नोटिस जारी किया है। नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर उन्हें जवाब देने के लिए कहा गया है। दरअसल सहदेवपाली वार्ड में पचरी निर्माण के लिए 4 लाख का वर्क ऑर्डर जारी हुआ था। ठेकेदार ने बिना काम किए हुए ही 4 लाख का बिल लगाकर 2 लाख भुगतान प्राप्त कर लिया। इंजीनियर ने भी बिना साइट विजिट किए बिल को क्लियर कर दिया। जब वार्ड पार्षद शांति सिदार द्वारा वार्ड में पचरी निर्माण संबंधी कोई काम नहीं होने की शिकायत आयुक्त से की तो जांच हुई। जांच में पता चला कि कोई काम हुआ ही नहीं है। इसके बाद रिपोर्ट पर आयुक्त ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

टीम पंचनामा करने पहुंची तो नहीं दिखा निर्माण
आयुक्त ने इंजीनियर्स की टीम मौके पर पंचनामे के लिए भेजी थी। टीम ने गांव के लोगों से बात की। टीम के अनुसार उन्हें कहीं भी नया पचरी निर्माण नहीं मिला। नोटिस जारी करने के बाद भास्कर की टीम भी गांव पहुंची। गांव में तीन मुख्य तालाब हैं। जहां पचरी निर्माण में गड़बड़ी हु़ई वह गांव में घुसने के साथ ही है। कुछ दूरी पर खेत के अंदर और दो अन्य तालाब हैं। हमने तीनों तालाब में जाकर देखा। कहीं भी पचरी का नया निर्माण नहीं हुआ है।

टेबल पर टेक्नीकल स्वीकृति
काम शुरू होने से लेकर अंत तक यह इंजीनियरिंग विभाग का जिम्मा होता है कि वह काम की गुणवत्ता देखे, उसे जांचे और उसके बाद भुगतान करें। लेकिन निगम के कई ऐसे मामले सामने आए हैं। जिनमें मौके की बिना स्पॉट रिपोर्टिंग ही बिल का भुगतान किया गया हो। यही कारण है कि ऐसे ठेकेदारों को भ्रष्टाचार करने के लिए बढ़ावा मिलता है।

दबाव में निगम के अफसर
सरकार या मंत्री की घोषणा के बाद अपने नंबर बढ़वाने के लिए निगम के अफसर काम जल्दी कराने की कोशिश करते हैं। कई काम ऐसे होते हैं जिनके वर्क ऑर्डर भी जारी नहीं हुए होते। ठेकेदार आपसी संबंधों में काम कर देता है। इन्हीं संबंधों का फायदा उठाकर बाद में वे इस तरह से बिना काम के ही अतिरिक्त भुगतान ले लेते हैं।

तीन दिनों के भीतर जवाब नहीं दिया तो कार्रवाई
"ठेकेदार, इंजीनियर और सब इंजीनियर को नोटिस दिया गया है। उनसे तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। तीन दिनों के भीतर जवाब नहीं मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।''
-आशुतोष पांडेय, आयुक्त, नगर निगम

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