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कोरोना का असर:अब पोरथ और चंद्रपुर में कर रहे अस्थि विसर्जन

रायगढ़10 दिन पहले
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  • कोरोना संक्रमण से बचने के लिए अघरिया, मारवाड़ी, साहू सहित अन्य समाज ने बदले नियम

कोरोना संक्रमण के कारण सामाजिक परंपरा का बदल दी है। परिजन का अंतिम संस्कार व अस्थि विसर्जन सामान्य तरीके से किया जा रहा है। लोग इलाहाबाद, गया हरिद्वार, बनारस जाने के बजाए पोरथ या चंद्रपुर की महानदी में ही अस्थि विसर्जन कर रहे है। समाजों ने ऐसी व्यवस्था बना दी है, जिसमें किसी के भी घर अंतिम क्रियाकर्म में मृतक भोज की परंपरा को बहुत सीमित कर दी है, इसमें सिर्फ परिवार के ही 20-30 लोगों बुलाकर कार्यक्रम किए जा रहे है। इसमें हर समाज के लोग भी इसमें नियम बना लिए है।

अघरिया समाज: अंतिम संस्कार में 20 और दशकर्म में 30 से अधिक लोग नहीं
अघरिया समाज के अध्यक्ष भुवनेश्वर पटेल ने बताया कि सामाजिक बैठक में निर्णय लिया हैं कि समाज में किसी की भी मौत होती है तो उसमें अब 15-20 लोगों अंतिम संस्कार में शामिल होते है। उसके 20 से 30 लोग ही दशगार्थ में शामिल होंते है। वे अब इलाहाबाद ना जाकर पोरथ में महानदी के किनारे अस्थि विसर्जन करते हैं।

साहू समाज: दशकर्म में नहीं करा रहे भोजन
साहू समाज के सचिव नेतराम साहू ने बताया कि मौत के बाद पहले दशकर्म किया जाता था, लेकिन अब तीसरे दिन तीजनाहन में ही सबकुछ करने का फैसला लिया गया है। भोज पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है, कोई भी अनाज नहीं बांटना है। उसके अलावा अस्थि विर्सजन को भी पोरथ या सरसिवा में करने के लिए कहा गया है। अंतिम संस्कार और क्रियाकर्म में भी नजदीकी रिश्तेदार ही शामिल होते हैं।

इलाहाबाद जाने का रास्ता खराब और खतरा, इसलिए पोरथ में कर रहे विसर्जन
चांदनी चौक निवासी अनुज बानी ने बताया कि कुछ दिनों पहले उनकी माता जी की मौत होने के बाद अंतिम संस्कार करने के बाद अस्थि विर्सजन करने की बात आई तो पहले इलाहाबाद ले जाने की बात हुई, लेकिन इलाहाबाद के लिए कोई ट्रेन नहीं है और गाड़ी से जाएगे सड़क खराब है, संक्रमण का खतरा भी है इसे देखते हुए पोरथ धाम में अस्थि विर्सजन करने का निर्णय लिया है। उद्योगपति राकेश अग्रवाल ने बताया कि उनके परिजन गोविंद राम अग्रवाल निधन होने के बाद उन्होंने भी महानदी में अस्थि विर्सजन किया।

अग्र समाज : चंद्रपुर में कर रहे अस्थि विसर्जन
"घर में आना जाना नहीं करते है, पोरथ केआसपास संक्रमण का खतरा बढ़ा हुआ है। चंद्रपुर में अस्थियों का विर्सजन किया जाता है। श्रद्धांजलि सभा या पगड़ी रस्म का कोई कार्यक्रम नहीं होता है। घर पर ही लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए कहा जाता है। समाज के कुछ समस्यों का कोविड से मौत हुई है उनके घरों में कोई कड़ाई बरती जाती है उनके 2- 3 परिजन मिलकर सब क्रियाकर्म करते है।''
-मुकेश मित्तल, अध्यक्ष, अग्रसेन सेवा संघ

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