आज डॉक्टर्स डे / समाज से मिले सम्मान को बड़ी जिम्मेदारी मानते हैं हमारे डॉक्टर्स

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  • खास दिन पर भास्कर ने शहर के वरिष्ठ व जूनियर डॉक्टर और परदे के पीछे से हेल्थकेयर सर्विस देने वाले विशेषज्ञों से बात कर जाना कि अपने पेशे पर वे कितना गर्व महसूस करते हैं, कितना दबाव है

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

रायगढ़. डा. बिधान चंद्र राय के जन्मदिन 1 जुलाई को देश में डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। डा. राय पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे और उन्हें भारत रत्न भी दिया गया। डॉक्टर्स डे चिकित्सा के जरिए मानवसेवा करने वाले डॉक्टर्स के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है। इस बार डॉक्टर्स डे खास इसलिए भी है क्योंकि कोरोना वारियर कहे जाने वाले डॉक्टर्स दिनरात मेहनत कर रहे हैं ताकि समाज और देश को कोविड के खतरे से बचाया जा सके। कुछ डॉक्टर्स मरीजों की देखरेख के साथ ही समाज के जरूरतमंदों की सेवा के लिए भी आगे आए। भास्कर ने इस खास दिन पर सेवा का पर्याय बने डॉक्टर्स से उनके काम, उनके प्रोफेशन के विषय पर बात की ।

पेशे पर गर्व है, लोगों की सेवा करना खुशकिस्मती
डॉक्टर्स डे जिन डा. बिधान चंद्र राय की याद में मनाया जाता है। उनका जीवन मेडिकल स्टूडेंट्स और जूनियर डॉक्टर हमेशा अपने जेहन में रखें। हर डॉक्टर कम से कम दो साल ग्रामीण क्षेत्र में काम करे। मैंने खुद यह किया है। नए डॉक्टर्स या मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे बच्चों के लिए यह कहना चाहता हूं कि शुरुआती दिन सीखने और सेवा में समर्पित होने चाहिए। जब हम डॉक्टर बनते हैं तो समाज से इज्जत मिलती है इसके साथ जिम्मेदारी भी आती है जिसका निर्वहन हमें हमेशा करना होता है।पढ़ाई के बाद प्रैक्टिस में आते हैं तो माहौल बिल्कुल अलग होता है। हर समय चिकित्सक को सौम्यता और धैर्य के साथ लोगों की तकलीफों को समझना होता है। परिस्थितियां के आधार पर तुरंत और सही निर्णय भी लेना जरूरी है। मुझे अपने पेशे पर गर्व है, खुशकिस्मत समझता हूं कि लोगों की सेवा का अवसर मिला है।''
-डॉ लोकेश षडंगी, वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ 

मानवता की सेवा निष्ठा के साथ, यही डॉक्टर का धर्म
"कोरोना का दौर शुरू होते ही जिस तरह एक बड़ा संकट खड़ा हुआ, उसका सामना करने और ईश्वर को याद करने के साथ ही हमारे लिए लोगों की जिंदगी बचाना ही सच्ची तपस्या थी। संक्रमण के दौर में मैंने डीन सर से बात करके पूरा प्राजेक्ट तैयार किया और कोविड-19 की जांच के लिए लैब तैयार कराई। आज यह स्थिति है रायगढ़ के साथ ही जांजगीर-चांपा, जशपुर, सरगूजा, बलरामपुर, सूरजपुर जिले के लोगों की जांच कर हमने एम्स की बराबरी कर रखी है। दिन रात मेहनत की स्टाफ की साथ जुटा रहा, लैब में कोरोना संक्रमित मरीजों के सैंपल लीकेज भी निकले। इससे संक्रमण का खतरा था, लेकिन हमारे कदम डगमगाए नहीं, हमने डॉक्टरी पेशे के साथ ही मानवता, सामाजिकता और संकट के दौर को ध्यान में रखते हुए, पूरी निष्ठा के साथ सेवा की और कर रहा हूं। कई चरणों में कोरोना की जांच करने में किसी भी तरह की लापरवाही न हो इसके लिए पूरी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है, जरा सी लापरवाही परेशानी बन सकती है।''
-डाॅ. राकेश कुमार, हेड माइक्रोबायोलॉजी लैब

ऐसी सेवा करने का ही सपना देखते हुए पढ़ाई की
"रायगढ़ में पढ़ाई करके के साथ ही जिस तरह डॉक्टर बनने का सपना मन में संजोया था, ठीक उसी शिद्दत के साथ सेवा भाव कर रही हूं । मुझे किसी भी तरह का डर नहीं लगता, जज्बे और जुनून के साथ ही सीनियर के साथ काम करने में रोज कुछ सीखने की मंशा रखती हूं। कोरोना ने बहुत को सीखने का अवसर दिया है, मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि इस संकट के दौर में मुझे सेवा के साथ बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। कोविड हॉस्पिटल में काेराना संक्रमित मरीज के एडमिशन, डिस्चार्ज, भर्ती करने से लेकर उनकी देखरेख की जिम्मेदारी है। बीच-बीच में मौका मिलता है तो जांच के लिए जुट जाती हूं। संक्रमित मरीजों के बीच रहने से संक्रमण का काफी खतरा है, सुरक्षा उपायों के साथ संक्रमण के खतरे के बीच काम करने में सिर्फ एक ही चीज नजर आती है, वह सेवाभाव, जिसके लिए हम इस मुकाम तक पहुंचे। शुरुआत में ही कठिन परिस्थिति का सामना करने को पढ़ाई मानती हूं।''
-डॉ. ममता पटेल, जूनियर रेजीडेंट, कॉलेज

समय के साथ चुनौतियां भी बढ़ी हंै
"बदलते समय के साथ ही हमारे पेशे में चुनौतियों बढ़ गई हैं। ऐसे में अच्छा काम करना होगा, इसका फायदा उन्हें भविष्य में मिलेगा। जो भी मरीज आते हैं उन्हें धैर्य के साथ समय देकर सूनना जरूरी है। इसी बात पर हमने काम किया है, डॉक्टर का प्रोफेशन नोबल इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें मानवसेवा सर्वोपरि है। नई पीढ़ी के डॉक्टर्स को भी मानवसेवा को उद्देश्य बनाना होगा, अपने आप ही ख्याति मिलेगी। चुनौतियां कम नहीं हैं, जो स्टूडेंट्स इस प्रोफेशन में आना चाहते हैं पहले चुनौतियों को समझें। प्रैक्टिस के साथ स्टूडेंट्स बने रहिए ताकि सीखते रहें।’’
-डॉ. घनश्याम अग्रवाल, मेडिसिन स्पेशलिस्ट

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