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लापरवाही भारी पड़ेगी:20 लाख रुपए से बने ऑक्सीजोन को चार महीने में उजाड़ा, दूसरे में फेंक रहे हैं कचरा

रायगढ़2 महीने पहले
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  • छठघाट के बदले दूसरी जगह लगने थे पौधे, नेता कहते हैं: ट्रीटमेंट प्लांट वाला ठेकेदार लगाएगा
  • {निगम ने दो ऑक्सीजोन पर खर्च किए थे 30 लाख

30 लाख रुपए खर्च कर निगम द्वारा बोइरदादर और छठघाट में बनाए गए ऑक्सीजोन बेकार हो चुके हैं। सितंबर 2020 में छठघाट पर ऑक्सीजोन को चार महीने बाद सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए हटा दिया। बोइरदादर एरिया में अनदेखी के कारण ऑक्सीजोन वाली जगह पर मछली बाजार का अपशिष्ट डंप किया जा रहा है। कमजोर प्लानिंग और अनदेखी के कारण न केवल लोगों का पैसा बर्बाद हो रहा है बल्कि शहर में पर्यावरण बेहतर बनाने किए गए काम का नामोनिशान नहीं है। नगर निगम और शहर सरकार द्वारा बिना योजना के काम कराए जाते हैं।

शहर में पर्यावरण को बेहतर बनाने प्रदेश के सभी जिलों में ऑक्सीजोन बनाए गए। रायगढ़ में यह काम सबसे बाद में हुआ और उस पर भी कमजोर प्लानिंग के कारण न केवल योजना बेमतलब हो गई बल्कि जनता द्वारा दिए गए टैक्स के लाखों रुपए बर्बाद हो गए। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की योजना 10 साल पुरानी थी, स्थल चयन भी तीन साल पहले हो गया था। इसके बाद भी छठघाट पर 20 लाख खर्च कर ऑक्सीजोन बना दिया गया। एसटीपी का काम आगे बढ़ा तो ऑक्सीजन पर जेसीबी चलवा दी। बोईरदादर इलाके में बने ऑक्सीजोन की देखरेख नहीं हुई, अब यहां कचरा डंप होने लगा।

दूसरी प्लानिंग नहीं
जिले में सरकार पौधरोपण का बढ़ावा दे रही है। जिला पंचायत और वन मंडल बारिश में पौधरोपण की तैयारी कर रहे हैं लेकिन नगर निगम के पास नई जगह पर ऑक्सीजोन बनाने की कोई योजना नहीं है। ऑक्सीजोन पर जेसीबी चलने के बाद दूसरे स्थल का चयन कर पौधरोपण किए जाने की बात कही गई थी लेकिन एमआईसी सदस्य ने बताया कि छठघाट के नजदीक ही एसटीपी का काम कर रही एजेंसी नया ऑक्सीजोन तैयार करेगी।

बोइरदादर ऑक्सीजोन
रायगढ़ स्टेडियम के पास 2018 में 10 डिसमिल जमीन पर ऑक्सीजोन बनाया जाना था। यहां 500 से अधिक पौधे लगाए गए। आसपास घेराबंदी कर ऑक्सीजोन का बोर्ड भी लगा दिया गया। 10 लाख से अधिक खर्च करने के बाद विभाग को याद आया कि यह प्राइम लोकेशन है। इसके बाद इसे खाली छोड़ दिया गया। अब ऑक्सीजोन के रास्ते पर मछली बाजार लग रहा है। मछली बेचने वाले शाम को जितना कचरा होता है, इकट्‌ठा कर ऑक्सीजोन में फेंक जाते हैं। पीछे की ओर कचरा डंप किया जा रहा है।

छठ घाट ऑक्सीजोन
8 सितंबर 2020 को निगम ने 20 लाख खर्च कर छठघाट पर ऑक्सीजोन बनाया, डेढ़ हजार फलदार और छायादार पौधे लगाए। यहां पौधों ने आकार ले लिया था। हरियाली के साथ यह क्षेत्र अच्छा लगने लगा था लेकिन छह महीने बाद ही उस पर जेसीबी चलवा दी गई। ऑक्सीजोन को बर्बाद कर दिया गया। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी नगर निगम की हो योजना है लेकिन यहां ऑक्सीजोन पर खर्च करने से पहले अफसर व कर्मचारियों ने यह नहीं सोचा कि इसे बाद में हटाना पड़ेगा।

सीधी बात; जानकी काटजू, महापौर
प्लांटेशन की अभी कोई प्लानिंग नहीं

शहर के दो जगहों पर ऑक्सीजोन बनाए गए थे। इनका क्या हुआ।
मुझे जानकारी नहीं है।
ऑक्सीजोन की जगह बदलने को लेकर भी कोई प्लानिंग है क्या।
अभी तक प्लांटेशन को लेकर कोई प्लानिंग नहीं है। कोई स्थल परिर्वतन करने का भी प्लान नहीं है।
छठघाट के बदले दूसरा ऑक्सीजोन नहीं बनेगा
एसटीपी का काम कर रही एजेंसी ने दूसरी जगह बनाने के लिए लिखकर दिया है।

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