खेत का पंजीयन कराने तहसीलों में लगी किसानों की भीड़:खरीदी से 3 दिन पहले पोर्टल से गायब हुआ धान का रकबा

रायगढ़2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

1 दिसंबर से धान खरीदी शुरू होनी है। तीन का समय शेष रह गया है। इधर रजिस्ट्रेशन के बाद कुछ गांवों का पूरा रकबा ही पोर्टल से गायब हो गया है। कुछ किसानों का रकबा कम होने की बात सामने आ रही है। इसे लेकर किसान परेशान हैं और तहसील ऑफिस का चक्कर लगा रहे हैं।

राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत किसानों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया गया था। पंजीयन के बाद एकीकृत किसान पोर्टल से धान बेचने वाले खाद्य विभाग के पोर्टल में डाटा शिफ्ट किया जा रहा था। इसी दौरान तकनीकी त्रुटि के कारण कुछ सोसाइटी और गांवों का रकबा गायब हो गया। अब किसानों को फिर से तहसील आकर तहसीलदारों के पोर्टल से सुधरवाने के लिए कहा जा रहा है। ऐसी परेशानी हर ब्लॉकों में सामने आ रही है।

रकबा संशोधन कराने के लिए तहसील दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। 30 नवंबर तक संशोधन कराना पड़ेगा, तो ही किसान धान बेच सकेंगे। उल्लेखनीय है कि राज्य स्तर पर 20 नवंबर को रकबा संशोधन कराने के बाद किसानों और रकबा दोनों 22-23 नवंबर को ही फाइनल हो गया। धान खरीदी की तैयारी चल रही थी। पहले तक दो बार टाइम बढ़ा कर रकबा सुधरवाया गया था ताकि खरीदी शुरू होने के बाद किसान परेशान न हों। पोर्टल में गड़बड़ी की वजह से किसानों को रकबा सुधारना पड़ रहा है। यह बात 25 नवंबर को धान खरीदी को लेकर राज्य स्तर पर बैठक हुई थी, इसके पहले जब अफसरों ने धान खरीदी के ऑनलाइन माड्यूल में किसानों के नाम और रकबा देखा तो किसी की डाटा नहीं आया। इसकी जानकारी जब राज्य के अधिकारी बैठक में दी तो उन्होंने किसानों से तहसीलदार से धान खरीदी माड्यूल में उसमें सुधार करने के लिए कहा। इसे लिए कलेक्टर ने खाद्य विभाग के सचिव को शुक्रवार को पत्र भी लिखा था।

कुछ गांवों में सभी किसानों के खेत पोर्टल से गायब
सहकारिता विभाग क मुताबिक कुछ गांव में सारे किसानों का के रिकार्ड गायब होने की बात सामने आई है। लैलूंगा के लारीपानी में पूरे गांव का रकबा और किसानों की जानकारी गायब है। बरमकेला में भी देवगांव में भी रकबा और किसानों की जानकारी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में इन्हें सुधारने के लिए किसानों को सूचना भेजना पड़ रहा है, ब्लॉक स्तर पर हर गांवों में जाकर किसानों की जानकारी इकट्‌ठा करना कम समय में मुश्किल है।

गिरदावरी की रिपोर्ट के साथ इसकी जानकारी कंपाइल करना जरूरी है। खाद्य अधिकारी जीपी राठिया ने बताया कि अभी धान खरीदी के पोर्टल को खोला गया है, उसे बंद करने का कोई निर्देश जारी नहीं हुआ है। किसान अभी भी पोर्टल में रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। खरीदी में किसी तरह की समस्या नहीं होगी।

पटवारी का ट्रांसफर, आरईओ भी जवाब नहीं देते
लोईंग के बलेरिया निवासी इन्द्र विलास पंडा ने बताया कि उनकी आठ हेक्टेयर जमीन की इंट्री थी, उसे चार हेक्टेयर कर दिया गया है। इसकी जानकारी के लिए कृषि विभाग के कर्मचारी फोन करने पर कोई रिस्पान्स नहीं देते हैं। पटवारी का भी ट्रांसफर हो गया है इसलिए पोर्टल में कुछ नहीं किया सकता है। आखिर में उन्हें फिर रायगढ़ तहसील कार्यालय आना पड़ा। इसके पहले कोई संशोधन नहीं हुआ। हरदीझरिया निवासी डोल नारायण पटेल ने बताया कि पांच एकड़ में धान की खेती की है, उनका पूरा रकबा ऑनलाइन नहीं दिखा रहा है। ऐसे में सुबह 10 बजे से उन्हें तहसील कार्यालय जाकर रकबे में सुधार के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है।

खबरें और भी हैं...