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प्रदर्शन:आंदोलन से पावर प्लांट्स को 13 दिन से नहीं मिला कोयला

रायगढ़3 महीने पहले
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  • कोल ट्रांसपोर्टिंग के लिए अलग रास्ता बनाने की मांग पर अडे़ ग्रामीण

ओडिशा की वसुंधरा माइंस से जिले के पावर प्लांट्स को होने वाली कोयले की सप्लाई 13 दिनों से ठप है। छत्तीसगढ़ बॉर्डर से लगे ओडिशा के टपरिया गांव के ग्रामीण 19 जनवरी से धरने पर बैठे हैं। कोल परिवहन के लिए अलग सड़क की मांग पर ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं। शुक्रवार को सुंदरगढ़ के जिलापाल (कलेक्टर) ग्रामीणों से मिलने गए थे, लेकिन कोई रास्ता नहीं निकल सका। रायगढ़ के तमनार, पूंजीपथरा समेत जांजगीर-चांपा स्थित पावर प्लांट्स को रोजाना लगभग 30 हजार टन कोयले की सप्लाई ओडिशा के महानदी कोलफील्ड लिमिटेड (एमसीएल) की खदानों से होती है। हर रोज हिमगिर के गोपालपुर से तमनार के रास्ते कोल ट्रांसपोर्ट करने वाले सैकड़ों भारी वाहन आते-जाते हैं। छत्तीसगढ़ के बॉर्डर से लगे गांव टपरिया के ग्रामीण बड़ी संख्या में इस मार्ग पर बैठे हैं। शुक्रवार को सुंदरगढ़ के जिलापाल निखिल पवन कल्याण ग्रामीणों से मिलने पहुंचे थे लेकिन समझाइश का ग्रामीणों पर असर नहीं हुआ।

टेंडर हुआ पर सड़क बनने में लगेगा समय
स्थानीय अफसरों और जिलापाल से मिलने गए ट्रांसपोर्टर्स के मुताबिक सोमवार तक बात बन सकती है। कोल परिवहन के लिए प्रस्तावित नई सड़क के लिए 150 करोड़ रुपए का टेंडर हो चुका है। हालांकि इसके पूरा होने में समय लगेगा। एमसीएल पर भारी दबाव है, वहीं प्लांट्स कोयला नहीं मिलने की वजह से मुश्किल में हैं। सुंदरगढ़ प्रशासन सड़क बनने तक प्रदूषण कम करने के उपायों के साथ कोयला परिवहन के लिए ग्रामीणों का मनाएगा।

गांव से गुजर रहे वाहन इसलिए ग्रामीण नाखुश
एमओईएफ यानि केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने एमसीएल को कोयला खनन और परिवहन की अनुमति इस शर्त पर दी थी कि परिवहन करने वाले भारी वाहनों के लिए गांव की चलित सड़क से नहीं जाएगी। इसके लिए दूसरी सड़क बनाई जाएगी। आंदोलन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र नायक कहते हैं कि एमसीएल ने अपनी कम्प्लायंस रिपोर्ट में अलग सड़क बनाने का दावा भी कर दिया है लेकिन वाहन गांव से गुजर रहे हैं। ग्रामीण पिछले दिनों धान की कटाई के बाद समितियों में धान बेचने गए थे। कोल डस्ट से खराब हुए धान को समिति ने खराब बताकर रिजेक्ट कर दिया। इसके साथ इनकी सब्जियां खराब हो गईं। राजेंद्र कहते हैं, टपरिया से गोपालपुर तक 11 प्राइमरी और मीडिल स्कूल हैं, 40 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। बड़ी संख्या में गांव की मुख्य सड़क से वाहनों के गुजरने से फसल के साथ लोगों पर असर पड़ रहा है। इस मार्ग पर ही 20 से अधिक तालाब हैं जिनका पानी दूषित हो गया और निस्तारी के लायक नहीं है। लगातार मांग करने पर सुनवाई नहीं हुई तो आखिरकार ग्रामीण धरने पर बैठ गए ।

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