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मौसम अपडेट:‘वृष्टि छाया’ के कारण अच्छे मानसून के बाद भी कम हुई बारिश

रायगढ़7 दिन पहले
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मांड नदी में पानी से अधिक खिल आए हैं कास के फूल। - Dainik Bhaskar
मांड नदी में पानी से अधिक खिल आए हैं कास के फूल।
  • सितंबर में मानसून की मेहरबानी, रविवार रात लैलूंगा समेत कुछ इलाकों में तेज बारिश, फिर भी औसत के मुकाबले 76% बारिश

रविवार दिनभर बदली के बाद रात को लैलूंगा, धरमजयगढ़ इलाके में तेज बारिश हुई। शहर में भी लगभग एक घंटे तक मूसलाधार बारिश हुई। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले हफ्ते भी बादल बरसेंगे। जुलाई और अगस्त में सूखे के बाद बारिश हो रही है। मौसम विभाग के मुताबिक कम बारिश होने की वजह वृष्टि छाया यानि रेन शेडो है।

पूर्वी जिलों को छोड़ प्रदेश के अधिकांश हिस्से में सितंबर में बादल खूब बरस रहे हैं लेकिन मौसम जिले से अब भी रूठा हुआ है। वृष्टि छाया के कारण कवर्धा और कोरिया जिलों में बारिश कम होती रही है लेकिन इस सीजन में रायगढ़ पर इसका असर है। जिले में शनिवार तक की स्थिति में औसत के मुकाबले 76 प्रतिशत बारिश हुई है। जानकारों के मुताबिक जुलाई और अगस्त में कम बारिश से खेती को हुए नुकसान की भरपाई अब संभव नहीं है।

यह है मौसम का हाल
मानसून द्रोणिका जैसलमेर, पूर्वी राजस्थान, नौगांव, पेंड्रा रोड, संबलपुर, पुरी और उसके बाद पूर्व- मध्य बंगाल की खाड़ी तक 1.5 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है। एक द्रोणिका उत्तर-पूर्व अरब सागर से गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा होते हुए निम्न दाब के केंद्र पूर्व- मध्य बंगाल की खाड़ी तक 1.5 किलोमीटर से 7.6 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है। 12 सितंबर को प्रदेश के कुछ जिलों में भारी बारिश का अनुमान है लेकिन रायगढ़ में बदली और बूंदाबांदी से मध्यम वर्षा का अनुमान जताया गया है।

जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण है वजह: एक्सपर्ट
बादल छाने और प्रदेश के दूसरे जिलों में मूसलाधार बारिश हो रही है लेकिन रायगढ़ में सिर्फ बूंदाबांदी हो रही है। इसकी वजह पूछने पर मौसम वैज्ञानिक डॉ एचपी चंद्रा बताते हैं कि क्लाइमेट चेंज यानि जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण इसकी बड़ी वजह है। जिले में रेन शेडो यानि वृष्टि छाया बन रही है। पहले प्रदेश के कवर्धा और कोरिया में बारिश कम होती थी। अब रायगढ़ में वाहन, उद्योग, प्लास्टिक के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन बढ़ा है, यह कार्बन जल विरोधी होता है । इसके साथ जलवायु परिवर्तन भी हो रहा है। इससे तेज बारिश या झड़ी वाली स्थिति नहीं बन रही है।

औसत के मुकाबले 76 प्रतिशत बारिश
जिले में 10 सालों की औसत बारिश के मुकाबले 1 जून से 11 सितंबर तक लगभग 76 प्रतिशत बारिश हुई है। सबसे खराब स्थिति रायगढ़ ब्लाक की है यहां 64 फीसदी ही बारिश हुई है। लैलूंगा ब्लाक में सितंबर के पहले हफ्ते तक औसत से अधिक बारिश थी लेकिन अब मौसम यहां भी दगा दे रहा है। जिले में धरजमयगढ़, घरघोड़ा, खरसिया, पुसौर, बरमकेला और तमनार ब्लॉक में 76 प्रतिशत से कम बारिश हुई है।

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