महामारी में लापरवाही:श्मशान में कवर हटाया तो दिखी दूसरे की डेड बॉडी, पारदर्शी बैग नहीं होने से बदला शव

रायगढ़6 महीने पहले
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  • डभरा के कोरोना संक्रमित ग्रामीण की मेडिकल कॉलेज में हुई मौत

गुरुवार सुबह अंतिम संस्कार के पहले श्मशान में अंतिम दर्शन के लिए जैसे ही शव का कवर हटाया, परिजन सन्न रह गए। डभरा सपोस के ग्रामीण को मेडिकल कॉलेज में बेटे को कोरोना मृतक पिता के बदले दूसरे किसी का शव दे दिया। परिजन ने हंगामा मचाया, मेडिकल कॉलेज के जिम्मेदारों को फोन किया गया।

एंबुलेंस भेजकर शव वापस मेडिकल कॉलेज बुलाया गया और देर तक मशक्कत के बाद परिवार को उनके परिजन का शव दिया गया। अस्पताल प्रभारी ने कहा है कि पारदर्शी बैग के बदले काले कवर की सप्लाई के कारण ऐसी चूक हुई है। मेडिकल कॉलेज में लगातार लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं। पिछले दिनों जल्दबाजी में जिंदा कोरोना संक्रमित का डेथ सर्टिफिकेट बना दिया गया था और अब एक परिवार को दूसरा शव दे दिया गया।

जांजगीर चांपा जिले के डबरा ब्लॉक के सपोस गांव निवासी लक्ष्मी कुमार पटेल को मंगलवार को कोरोना संक्रमित होने के बाद तबियत बिगड़ने के बाद उन्हें 200 बिस्तर कोविड हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। बुधवार शाम 4 बजे उनकी मौत हो गई। लक्ष्मी के पुत्र राकेश पटेल ने बताया कि मौत होने के साढ़े तीन ‌घंटे बाद डॉक्टरों ने उसकी पुष्टि की। शाम 7.30 बजे जब राकेश ने पिता का पार्थिव शरीर मांगा तो देर रात उनके पिता का शव प्लास्टिक बैग में पैक कर दिया गया। वहां दो-तीन शव रखे थे इसलिए स्टाफ ने बिना पुष्टि किए दूसरा शव उन्हें दे दिया।

बेटे ने लापरवाही का लगाया आरोप

गुरुवार सुबह राकेश ने शव लेकर गांव पहुंचे थे। कवर पर नाम तो उनके पिता लक्ष्मी का ही लिखा था लेकिन शव दूसरे का था। राकेश ने कहा, श्मशान से अपने पिता का शव लेने उन्हें फिर से 50 किमी दूर मेडिकल कॉलेज आना पड़ा। उन्होंने मेडिकल कॉलेज में सही इलाज नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया। बताया कि उनके पिता लक्ष्मी तीन घंटे तक तड़पते रहे किसी ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने चंद्रपुर विधायक रामकुमार यादव से मदद मांगी। विधायक यादव के फोन करने पर जब डॉक्टर पहुंचे तब तक उनके पिता की मौत हो चुकी थी।

काला बैग मिल रहा है हमें इसलिए हो गई ऐसी चूक

200 बेड मेडिकल कॉलेज कोविड अस्पताल के प्रभारी डॉ. विमल भगत ने भास्कर को बताया कि, कोरोना मृतकों की बॉडी पारदर्शी यानि ट्रांसपेरेंट बैग में पैक की जानी चाहिए लेकिन अस्पताल को प्लास्टिक का काला कवर मिला है। इस वजह से ऐसी गलती हुई है। डेड बॉडी पैक करने वाले हाउसकिपिंग स्टाफ नहीं हैं। डॉक्टर के कहने पर पैरा मेडिकल स्टाफ ही शवों की पैकिंग भी कर रहे हैं। इस वजह से ऐसी अव्यवस्था है। शव भेजने के थोड़ी देर बाद ही हमने ही एंबुलेंस के ड्राइवर को फोन कर शव बदले जाने की सूचना दी।

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