देवी मंदिरों में शक्ति की पूजा का उत्सव दिखा:200 फीट की ऊंचाई से पहली बार देखिए बंजारीधाम में भारत के नक्शे जैसा कुंड

रायगढ़12 दिन पहले
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भारतमाता तालाब, 2010 में हुआ बंजारी मंदिर का जीर्णोद्धार, आर्टिफिशयल कुंड है आकर्षण। - Dainik Bhaskar
भारतमाता तालाब, 2010 में हुआ बंजारी मंदिर का जीर्णोद्धार, आर्टिफिशयल कुंड है आकर्षण।

गुरुवार को नवरात्रि शुरू हुई। डेढ़ साल के बाद देवी मंदिरों में शक्ति की पूजा का उत्सव दिखा। हालांकि पहले दिन आमतौर पर होने वाली हजारों की भीड़ नहीं दिखी। सुबह से देर शाम तक मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। कोरोना संक्रमण के मामले कम होने के कारण भीड़ हुई, मंदिरों में डिस्टेंसिंग और दूसरे एहतियात के साथ भक्तों को प्रवेश दिया गया।

नवरात्र के पहले दिन शहर मां की भक्ति में रंगा दिखा। शहर के अनाथालय दुर्गा मंदिर, बुढ़ी माई मंदिर, महामाया मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचे। मंदिरों में कलशयात्रा के साथ ही घट की स्थापना हुई। दोपहर बाद मनोकामना ज्योत से मंदिर परिसर जगमगा उठे। कोरोना गाइडलाइन के कारण मंदिरों में कम संख्या में भक्तों को एंट्री दिए जाने के कारण कतार लगी दिखी। पिछले सालों की तरह मंदिरों में पाठ या अनुष्ठान की इजाजत नहीं दी गई थी।

शहर से बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए चंद्रपुर स्थित चंद्रहासिनी मंदिर भी पहुंचे। यहां जांजगीर जिले के साथ ही ओडिशा और रायगढ़ जिले से लोग पहुंचे। आमतौर पर नवरात्र के पहले दिन यहां सवा लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन करते हैं लेकिन इस बार कोरोना की रोकटोक के कारण भीड़ कम रही। संक्रमण कम होने के कारण प्रशासन ने थोड़ी ढील दी है लेकिन खतरे के कारण मंदिरों में एहतियात बरता जा रहा है। तीन नवरात्र के बाद देवी मंदिरों में इस बार भीड़ दिख रही है।

भारतमाता तालाब... 2010 में हुआ बंजारी मंदिर का जीर्णोद्धार, आर्टिफिशयल कुंड है आकर्षण
रायगढ़ से 19 किमी दूर तराईमाल बंजारीधाम जिले का सबसे बड़ा देवी मंदिर है। 2010 में इस प्राचीन मंदिर को जनसहयोग से बंजारीधाम बनाया गया। तब कलेक्टर रहे अशोक अग्रवाल ने सबसे पहले आसपास की सड़कों का चौड़ीकरण कराया। पास स्थित बंजर जमीन को पिकनिक स्पॉट बनाया गया।

सैलानियों का आकर्षित करने मंदिर परिसर में भारत के नक्शे की आकृति वाला कुंड बनवाया गया। भारत के नक्शे वाला इकलौता कुंड जिसमें छत्तीसगढ़ का भी नक्शा है। परिसर में बगीचा बनाया गया है ताकि मंदिर आने वाले परिवारों के बच्चे यहां माता के दर्शन के साथ ही पिकनिक का भी लुत्फ उठा सकें।

दो मूर्तियां...शंकर के साथ विराजीं पार्वती ही बंजारी मां
प्रसिद्ध बंजारीधाम में दो मूर्तियां हैं। मां बंजारी असल में माता पार्वती हैं जो भगवान शंकर के साथ विराजीं हैं। मूर्तियां भी 70 साल से अधिक पुरानी हैं। 2010 में जीर्णोद्धार के बाद परिसर के भीतर ही रामदरबार, हनुमान मंदिर, विष्णु-लक्ष्मी के मंदिर हैं। इस नवरात्रि पर बंजारी मंदिर लगभग 3500 ज्योति से जगमग है। यहां अष्टमी और नवमी के दिन विशेष पूजा होगी।

सप्तमी से पंडालों में पूजा, इस बार भी डांडिया नाइट्स नहीं
शहर में लायंस, लायनेस क्लब, नई पीढ़ी और दूसरी संस्थाएं नवरात्र पर डांडिया आयोजित करती रही हैं लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण प्रशासन ने इस बार भी बड़े आयोजनों की इजाजत नहीं दी है। गुजराती समाज पारंपरिक गरबे का आयोजन करेगा। नवरात्र के पहले दिन ही घट की स्थापना कर पारंपरिक तरीके से पूजा शुरू की गई। कुछ समितियों ने षष्ठी से नवमी तक डांडिया और गरबे के आयोजन की अनुमति मांगी है लेकिन अब तक उन्हें परमिशन नहीं मिल सकी है।

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