दर्दनाक / एक कमरे में था सुखराम का संसार, घर से थोड़ी दूर बढ़ा तो खबर आई वो अब नहीं रहे

Sukhram's world was in a room, a little distance away from home, so news came that he is no more
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Sukhram's world was in a room, a little distance away from home, so news came that he is no more

  • सुबह 7 बजे मजदूरी के लिए निकला था, घर में सिलेंडर फटा, पत्नी व दो बच्चों की मौत

दैनिक भास्कर

Jun 02, 2020, 05:00 AM IST

रायगढ़. सारंगढ़ के ग्राम चंदाई में सोमवार सुबह 7 बजे घर के कमरे में गैस सिलेंडर फटने से एक महिला और उसके दो मासूम बच्चों की मौत हो गई। विस्फोट इतना भयानक था कि बच्चों के शव क्षत-विक्षत हो गए। थोड़ी देर पहले ही परिवार का मुखिया गांव में ही मनरेगा साइट पर मजदूरी करने निकला था। फॉरेंसिक एक्सपर्ट इतनी जल्दी सिलेंडर में विस्फोट के कारणों का पता रहे हैं। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया है। 
चंदाई का सुखराम साहू चाय नाश्ता करने के बाद मजदूरी के लिए चला गया। घर पर पत्नी लता साहू (25), बेटा टिकेश (6) व बेटी झलक (4) वर्ष थे। बच्चों के लिए चाय गर्म करने गैस स्टोव ऑन किया, तभी अचानक सिलेंडर में आग लगी और तुरंत विस्फोट हो गया। लता के साथ दोनों बच्चों की मौत हो गई। कमरे में तेज धमाके के साथ ब्लास्ट की आवाज सुनते ही जेठ शत्रुघ्न साहू अपने कमरे से दौड़ते हुए निकले। देखा तो भाई सुखराम का हंसता खेलता परिवार तबाह हो चुका था। शत्रुघ्न ने रोते से शोर मचाया, पड़ोस के लोग जमा हुए लेकिन बचाव करने जैसा कुछ भी बचा नहीं था। हादसे की जानकारी पर एसडीएम चंद्रकांत वर्मा, थाना प्रभारी आशीष वासनिक और फॉरेसिंक टीम मौके पर जा पहुंची। टीम ने गैस सिलेंडर, पास रखे केरोसिन के टिन की जांच की है। थाना प्रभारी ने बताया कि तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। 

बाहर ही खेलते रहते बच्चे तो बच जाती जान
शत्रुघ्न ने पुलिस को बताया कि सुखराम काम पर निकला तो टिकेश घर के बाहर तक साथ गया। उसने, पापा जल्दी आना...कहा और अंदर चला गया। कुछ देर में झलक भी सोकर उठी और भाई के साथ दरवाजे पर बैठ कर खेलती रही। मां को कमरे में देख बच्चे भी अंदर आ गए। गैस चूल्हे के पास बिखरा पड़ा चाय का बर्तन देख परिजन ने अंदाजा लगाया कि चाय बनाने या गर्म करने के दौरान हादसा हुआ होगा।
हादसा देख सिहर गए लोग मजदूर भी बदहवास हुआ  
कमरे में तितर-बितर बच्चों के शव और कमरे में पड़े बर्तन, बिस्तर, कपड़े और बच्चों के खिलौने देख लोग दहल गए। हादसे की खबर पर पहुंचा सुखराम भी बदहवास होकर काफी देर तक खड़ा रहा। बहुत देर तक उसके मुंह आवाज ही नहीं निकली फिर बिलखने लगा। वह कभी बच्चों के शव के पास तो कभी पत्नी के शव के करीब जाकर खुद को कोसता रहा, कहने लगा उसे पता होता तो वह काम पर नहीं जाता। पड़ोसियों ने बड़ी मुश्किल से उसे संभाला।

बम जैसा धमाका, पूरा घर ही बिखर गया
जहां सिलेंडर रखा था, सुखराम की पूरी गृहस्थी वहीं थी। इस कमरे से थोड़ी दूर बड़ा भाई शत्रुघ्न का परिवार भी साथ रहता था। घर में अलग रसोई नहीं थी। उनके हिस्से में जो कमरा था वही बेडरूम था और कोने में रसोई भी बनी थी। कमरे में ही फ्रिज रखा था। यहीं एक पीपे (टिन) में केरोसिन भरा रखा हुआ था। माना जा रहा है कि गैस सिलेंडर में लीकेज के बाद मिट्टी के तेल के कारण आग भड़की। धमाका इतना तेज हुआ की घर की छत और दरवाजा फट गए। फॉरेंसिक एक्सपर्ट की टीम भी यह पता लगा रही है कि सिलेंडर इतनी जल्दी कैसे फट गया। 

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