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उद्योग मुश्किल में:उद्योगों में जरूरत है तीन हजार की, मिले सिर्फ 169 ट्रेंड वर्कर्स

रायगढ़10 महीने पहले
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  • कोरोना की सख्ती के कारण बाहर से नहीं आ रहे कर्मी
  • दूसरे राज्यों से स्किल्ड वर्कर बुलाने के लिए शर्तों के साथ अनुमति दे रहा है प्रशासन
  • स्थानीय लोगों को काम मिले इसलिए ब्लाक स्तर पर रोजगार मेले का भी आयोजन

अनलॉक-2 में भी उद्योगों में कामकाज सामान्य नहीं हो पाया है। लॉकडाउन-4 के मध्य से जिले के उद्योग शुरू हुए थे लेकिन अब मजदूरों की कमी के कारण उत्पादन ठप है। स्थानीय मजदूर कृषि कार्यों में लगे हैं, बाहर से कामगार बुलाने पर सख्ती है। जहां जिले के 60 से अधिक उद्योगों को 3 हजार से अधिक स्किल्ड वर्कर चाहिए वहीं 9 उद्योगों को 137 स्किल्ड लेबर और निचले स्तर के मैनेजमेंट के लिए 32 ट्रेंड कामगारों को बाहर से बुलाने की अनुमति मिली है।   उद्योगों को दूसरे प्रदेशों से स्किल्ड श्रमिक बुलाने की अनुमति दी जा रही है। पावर और स्टील सेक्टर की ईकाइयों को लगभग 6 हजार मजदूर चाहिए । प्रशासन ने थोड़ी नरमी बरती है लेकिन शर्तों के पालन पर ही अनुमति दी जा रही है। उद्योग विभाग के जरिए प्रशासन बाहरी श्रमिकों को लाने की अनुमति दे रहा है। स्थानीय कामगारों को रोजगार देने की शर्त भी है। इसके साथ ही क्वारेंटाइन की व्यवस्था, बाहर से आने-जाने की सूचना, स्क्रीनिंग और एडवायजरी का पालन करना भी जरूरी है। 

रोजगार मेला आज घरघोड़ा में 
जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र के जीएम संजीव सुखदेवे ने बताया कि बाहर से आए प्रवासी मजदूरों को रोजगार मिल सके इसके लिए ब्लॉक स्तर पर रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है। सोमवार को तमनार में मेला लगा। बुधवार को घरघोड़ा और 17 जुलाई को रायगढ़ में मेले का आयोजन होगा। इसका उद्देश्य योग्यता के अनुसार स्थानीय लोगों को उद्योगों में काम दिलाना है। जो लोग मनरेगा या दूसरे कामों में नहीं लगे हैं या पढ़े लिखे हैं तो उन्हें स्थानीय उद्योगों में नौकरी दिलाने की बात कही जा रही है।

स्किल मैपिंग कर 1800 मजदूरों की सूची दी लेकिन काम पर आए केवल 6
प्रवासियों के लौटने के बाद जिले में उनके रोजगार की फिक्र करते हुए प्रशासन ने स्किल मैपिंग कराई। योग्यता अनुसार काम देने के लिए उद्योग विभाग ने जिले के उद्योगों को 1800 मजदूरों की लिस्ट सौंपी। उद्योगों ने इनमें 74 मजदूरों को काम देने की इच्छा जताई और उन्हें बुलाया लेकिन काम पर सिर्फ 6 ही आए हैं। उद्योग विभाग के अफसर कह रहे हैं कि बाहर से श्रमिक बुलाने की अनुमति मांगने वाले उद्योगों से स्थानीय कामगारों को योग्यता अनुसार काम देने के लिए लिखित सहमति ली जा रही है।

वर्कर आए तो प्रोडक्शन में 30 फीसदी का इजाफा होगा
"जिले में इंडस्ट्रीज सही तरीके से चलें इसके लिए 3 हजार से अधिक स्किल्ड लेबर की जरूरत है। अब दूसरे राज्यों से स्किल्ड लेबर और टेक्नीशियन को लाने की अनुमति मिल रही है। इससे प्रोडक्शन 30 फीसदी तक का बढ़ेगा।  स्टील सेक्टर में सुधार में थोड़ा समय लगेगा, दो- तीन माह के बाद कोरोना संक्रमण यदि कम होता है तो सब कामकाज शुरु होंगे। स्टील सेक्टर प्रोग्रेस करेगा।''
-बीआर माने, एचआर हेड, एमएसपी स्टील एंड पावर लिमिटेड

उद्योग में मजदूरी कम, मनरेगा के भुगतान में गड़बड़ी के कारण होता है पलायन
सामाजिक कार्यकर्ता राजेश त्रिपाठी कहते हैं कि स्थानीय मजदूर इस सीजन में दूसरे राज्यों से लौटते हैं और घर में रहकर खेतों में मजदूरी करते हैं। जून से दिवाली तक प्रवासी मजदूरों के लिए गांव में रहने का समय है। बाहर से लौटे मजदूरों को अभी भी उम्मीद है कि दिवाली के बाद हालात सुधरेंगे और वे वापस दूसरे राज्य जाएंगे। वहां मेहनताना अधिक है। अगर कोरोना के कारण रोक-टोक आगे भी रही तो ये मजदूर उद्योगों में काम करेंगे। राजेश बताते हैं कि प्रवासी मजदूरों को मनरेगा पर भी विश्वास नहीं है। काम का भुगतान समय पर नहीं मिलता है, स्थानीय उद्योगों में मजदूरी सही नहीं मिलती इसलिए पलायन होता है।

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