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सख्ती:सीएसआर की राशि नहीं देने वाले उद्योगों का फिर रोकेंगे ट्रांजिट पास

रायगढ़12 दिन पहले
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  • सीएसआर में 35 करोड़ रुपए की जगह अब तक मिले मात्र 17 करोड़ रुपए

सीएसआर की राशि नहीं देने वाले उद्योगों पर कड़ाई शुरू की जा रही है। 19 उद्योगों से सीएसआर के 35 करोड़ रुपए लिए जाने हैं। एसईसीएल, एनटीपीसी लारा ने भी सीएसआर की पूरी राशि जमा नहीं की। इससे ग्रामीण और शहरी इलाकों के शिक्षा, स्वास्थ्य और पंचायत से जुड़े कामकाज प्रभावित हुए हैं। सीएसआर की बची हुई राशि नहीं देने वाले उद्योगों पर फिर सख्ती बरतने के लिए कलेक्टर ने कहा है। उद्योगों को एक हफ्ते के भीतर सीएसआर की राशि जमा करने के निर्देश दिए थे। जमा नहीं करने पर ट्रांजिट पास रोकने के लिए कहा गया था। उद्योगों ने कुछ राशि जमा करा दी थी। इसमें एसईसीएल की टीपी भी रोकी गई थी, लेकिन बाद में उसे रिलीज किया गया था। कलेक्टर ने कहा है कि जो उद्योग बची हुई राशि नहीं देते तो उनकी दोबारा टीपी रोकी जाएगी। एसईसीएल को स्कूलों रिनोवेशन, कृषि से जुड़े कार्य, स्मार्ट क्लास रूम और मुक्तिधाम के लिए सीएसआर के तहत राशि देने के लिए कहा है। एसईसीएल को छह करोड़ रुपए दिए जाने हैं। प्रस्ताव भेजने के बाद वहां से स्वीकृति नहीं मिली है। एनटीपीसी तिलाईपाली ने भी सीएसआर की राशि दी है, लेकिन लारा एनटीपीसी प्रबंधन पूरी राशि नहीं दी है। टीआरएन और अंबुजा प्लांट में प्रोडक्शन प्रभावित होने पर अगले साल सीएसआर राशि देने की बात कही है। हिंडाल्को ने आधी राशि देने के बाद बची हुई रकम को अगले साल देने के लिए कहा है।

35 करोड़ मिलने थे, अब तक 17 करोड़ मिले
सीएसआर प्रभारी सीमा पात्र बताती हैं, कुल 19 प्लांटों से 17 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान है। टीआरएन और अंबुजा प्लांट को छोड़ कर बाकी सभी प्लांटों ने सीएसआर की राशि दी है। अभी तक 17 करोड़ रुपए मिल चुके हैं। जिन प्लांटों ने पूरी राशि जमा नहीं की है, उनकी टीपी रोके जाने के निर्देश कलेक्टर ने दिए हैं। 11 उद्योग पूरी राशि दे चुके हैं, बाकी प्रबंधनों को बकाया राशि देने के लिए कहा गया है। किस उद्योग कितनी राशि दी है, इसे एकत्र किया जा रहा है। कलेक्टर ने पर्यावरण विभाग से पर्यावरण स्वीकृति ले चुके उद्योगों की भी जानकारी मांगी है। प्रभारी क्षेत्रीय अधिकारी एसके वर्मा ने कहा कि, नई दिल्ली से जिस उद्योग को पर्यावरणीय स्वीकृति मिल जाती है उन्हें सीएसआर से राशि लेनी पड़ती है। एयर, वॉटर कन्सर्ट ले कर उद्योग चलाते हैं। इसकी जानकारी पर्यावरण विभाग को देने के लिए कहा गया है।

इस साल डीएमएफ में भी 30 करोड़ रुपए मिले
खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) ने इस साल 40 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान है। दिसंबर तक 30 करोड़ मिल चुके हैं। विभाग को अनुमान है कि मार्च के आखिर तक 10 करोड़ रुपए मिल जाएंगे। 284 कार्यों की स्वीकृति के लिए 55 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी है। डीएमएफ प्रभारी नम्रता डोगरे बताती हैं कि पिछले वर्षों के बजट के कई काम पूरे नहीं हुए हैं। आखिरी तिमाही में माइनिंग अधिक होने की वजह से रॉयल्टी भी अधिक मिलती है।

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