स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर चर्चा:जिला पंचायत की सामान्य सभा में वर्मी टांका निर्माण पर भी हुई चर्चा

रायगढ़2 महीने पहले
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जिला पंचायत में सोमवार को सामान्य सभा बैठक हुई। लैलूंगा में कृषि विभाग द्वारा वर्मी कंपोस्ट बनाने में गड़बड़ी का मामला फिर उठा। जलसंसाधन विभाग द्वारा बनाए गए बांधों के घटिया निर्माण के मामले के साथ ही स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर चर्चा हुई। अतिशेष शिक्षकों को ऐसे स्कूलों में भेजने की मांग हुई जो एकल शिक्षक हैं। 15 वें वित्त आयोग में बजट मिला है। उसकी कार्य योजना देने के लिए हर सदस्यों को कहा गया है।

जिपं सदस्यों का आरोप था कि कृषि विभाग के अफसर जान बूझकर दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। जिसकी वजह से जांच नहीं हो पाने की बात उठाई है। हालांकि इस मुद्दे पर कृषि विभाग के उपसंचालक ज्वाइंट कलेक्टर डिगेश पटेल ने भी माना कि इस मामले में गलती हुई है, इसमें जल्द ही सारे दस्तावेजों को उपलब्ध कराने की बात कही गई है। जिसमें 15 दिनों के बाद आरईएस और पीएमजीएसवाई के ईई इसमें जांच कर रिपोर्ट जिला पंचायत को देंगे। कृषि विभाग का जो दोषी अफसर था, उसे फिर से उसी जगह पर ही पदस्थ कर दिया गया है, इस बात भी सदस्यों ने हंगामा किया। इस पर बीजेपी-कांग्रेस दोनों सदस्य एकमत दिखे। मुंगेली के ठेकेदार को सारी राशि भुगतान हो जाने का भी मामले को उठाया। वही खेल अधिकारी द्वारा जिला पंचायत की बैठक में मौजूद नहीं रहने का मुद्दा उठा, जिसमें सदस्यों ने उनपर कार्रवाई करने की सिफारिश की है। हालांकि अफसरों का कहना था कि उन पर हटाने और कार्रवाई करने को लेकर पहले ही सरकार पत्र लिखा जा चुका है।

आरोप... 30-30 लाख के बांध का निर्माण घटिया
बीजेपी के सदस्य देवेन्द्र प्रताप सिंह ने जलसंसाधन विभाग के अफसरों पर आरोप लगाते हुए कहा कि लैलूंगा में मुडागांव और तारागढ़ में 30-30 लाख रुपए का बांध किसानों के लिए बनाया गया है, बांध बनाने को लेकर गड़बड़ी की गई है। बांध से किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाने की बात उठाई, इस मामले की जांच कराने का मुद्दा उठाया। इसके अलावा घरघोड़ा जाने वाले रोड में लाखा स्थित लक्ष्मण पादुका इलाके में राम वन गमनपथ है, इसका भी जीर्णोद्धार करने की मांग वन विभाग के अफसरों ने की। कांग्रेस के सदस्य कैलाश नायक, अवध पटेल सहित अन्य सदस्यों ने जिले में प्राथमिक, माध्यमिक और हायर सेकंडरी स्कूलों में शिक्षकों की अतिशेष की स्थिति बनी है। ज्यादा शिक्षक हैं तो कहीं पर शिक्षक नहीं हैं या एक शिक्षक के भरोसे स्कूल चल रहा है। इस व्यवस्था सुधारने के लिए अनुमोदन करा कर वह काम नहीं हो पाया है।

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