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एनटीपीसी और भू-विस्थापितों के बीच टकराव:ग्रामीण बोले: नौकरी देना नहीं चाहते, टेस्ट तो सिर्फ बहाना है

रायगढ़एक महीने पहले
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  • कलेक्टर की बैठक में 121 को नौकरी देने की बात कही, फिर कहा: 79 पद ही स्वीकृत हैं। 29 को योग्य बता परीक्षा ली, 11 लोगों का पास किया, 8 के ही डॉक्यूमेंट सही बताए

नौकरी की मांग को लेकर लारा के लैंड लूजर्स (भू-विस्थापित) और एनटीपीसी प्रबंधन में फिर एक बार ठन गई है। जून में कलेक्टर और एनटीपीसी के अफसरों के बीच बैठक में पहले चरण के लिए 121 युवाओं को स्थाई रोजगार देने पर सहमति बनी थी। लेकिन प्रबंधन ने पुराने 79 स्वीकृत पदों पर भर्ती शुरू की, इस सूची में भी 29 प्रभावित युवा बेरोजगारों का नौकरी के लिए पात्र बताया गया। टेस्ट लिया गया, इनमें 11 लोग पास हुए। डाक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद सिर्फ 8 लोग ही नौकरी देने योग्य बताए गए। प्रभावित परिवारों के युवा सदस्य एनटीपीसी द्वारा ली गई परीक्षा को नियम के विरूद्ध बता रहे हैं। उनके अनुसार छत्तीसगढ़ पुनर्वास नीति के तहत भू-विस्थापितों को पक्की नौकरी देने के लिए नियम में कहीं भी परीक्षा का उल्लेख नहीं है, लेकिन एनटीपीसी सभी पीड़ित परिवारों को रोजगार देने से बचने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रहा है। पुनर्वास नीति के विपरीत भर्ती प्रक्रिया पर कलेक्टर ने भी एनटीपीसी के अफसरों से बात की थी, लेकिन इसके बाद भी वे अपनी मनमानी कर रहे हैं। फिलहाल प्रभावित परिवारों के युवा बेरोजगार एनटीपीसी के सामने तंबू लगा 32 दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं। कलेक्टर भीम सिंह इस मामले में कहते हैं कि एनटीपीसी ने प्रदेश की पुनर्वास नीति का पालन नहीं किया। उन्होंने नौकरी के बदले बोनस की अपनी पॉलिसी मानने की बात कही लेकिन एनटीपीसी की पॉलिसी राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित नहीं है मतलब पात्र लोगों को नौकरी देनी पड़ेगी।

राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड को 16 सौ पद खाली बताए
एनटीपीसी के सामने धरने पर बैठे युवाओं ने बताया कि एनटीपीसी ने रायपुर में हुई राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड की बैठक में कुल 16 सौ पद रिक्त होने की बात कही थी, लेकिन नियुक्ति देने में आनाकानी कर रहे हैं। इसमें मुख्य रूप से आईटीआई, डिप्लोमा इंजीनियर्स, ग्रेजुएट इंजीनियर्स, एमएससी, बीएससी, बीकॉम, सामान्य ग्रेजुएट युवाओं को नौकरी देने की बात कही गई थी।

फैक्ट फाइल

  • 09 प्रभावित गांव
  • 2429 प्रभावित किसान
  • 780 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण
  • 187 करोड़ मुआवजा स्वीकृत
  • 1816 को 117 करोड़ का दे चुके मुआवजा
  • 613 प्रभावितों ने नहीं लिया मुआवजा
  • 1 मेगावाट उत्पादन पर 0.2 कर्मचारी का सेटअप, मतलब अभी 1600 मेगावाट प्रोडक्शन में 320 कर्मचारी ही रखे जा सकते हैं। अभी 307 काम कर रहे हैं, यानि अभी सिर्फ 17 पदों पर ही नौकरी मिल सकती है।

सीपत और मध्यप्रदेश से बुला रहे कर्मचारी
भू-विस्थापित परिवार के सदस्य संजीव पंडा बताते हैं कि नई भर्ती करने की बजाय एनटीपीसी सीपत और मध्यप्रदेश से कर्मचारियों को स्थानांतरित कर लारा भेजा जा रहा है। प्रभावितों को नौकरी दी जा रही है, सीपत में 622 लैंड लूजर्स में से 400 लोगों की भर्ती की जा चुकी है।

हम प्रयास कर रहे हैं
"जितने पदों की अनुमति मिली उनके लिए नियम अनुरूप परीक्षा ली गई। जो पात्र मिले उन्हें प्रशिक्षण के बाद नियुक्ति दी जाएगी। शेष पात्र युवाओं के लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। नियमानुसार जो भी रिक्त पद होंगे, उस पर योग्य लोगों को मौका देंगे।''
-अलोइस टोपनो, जीएम, एचआर एनटीपीसी

परीक्षा का प्रावधान नहीं
''छत्तीसगढ़ पुनर्वास नीति के तहत विस्थापित परिवार के सदस्यों के रोजगार के लिए किसी भी तरह की परीक्षा या टेस्ट लिए जाने का प्रावधान नहीं है लेकिन एनटीपीसी प्रबंधन ने रोजगार देने से बचने के लिए यह तरीका अपनाया। जिसकी वजह है कि 79 पदों के लिए सिर्फ 8 लोग ही पात्र मिले।''
-जय मंगल पटेल, प्रभावित किसान

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