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अच्छी पहल:आगे पढ़ना चाहते हो या काम की ट्रेनिंग दिलाएं

रायगढ़2 महीने पहले
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  • बाल संरक्षण विभाग संप्रेक्षण गृह से निकले किशोरों की हो रही काउंसलिंग

बाल संप्रेक्षण गृह से निकले किशोरों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए अब बाल संरक्षण विभाग की टीम उनके घरों में दस्तक दे रही है। बायोडेटा लेकर उनकी रुचि पूछी जा रही है ताकि उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने या रोजगार उपलब्ध कराने के लिए ट्रेनिंग या दूसरी व्यवस्था की जा सके।

बचपन में जाने या अनजाने अपराध कर संप्रेक्षण गृह जाने वाले कुछ किशोरों में अापराधिक प्रवृत्ति विकसित होने का डर होता है। सही समय पर काउंसलिंग या दूसरे अच्छे विकल्प न दिए जाएं तो ये बच्चे बड़े होने पर अपराध के दलदल में धंसते जाते हैं। अपराध को छोड़ सामान्य नागरिक की तरह जीवन जीने और अच्छा इंसान बनाने के लिए शासन की योजना के तहत बाल संरक्षण की टीम ने काम शुरू किया है। संप्रेक्षण गृह से निकलने के बाद उनका फॉलोअप भी किया जा रहा है। बाल संरक्षण ईकाई और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की संयुक्त टीम ने शैक्षणिक योग्यता, आर्थिक स्थिति सहित अन्य जानकारियों के लिए सूची बनाई जा रही है। बच्चों से उनके दस्तावेज लेकर 10 दिनों के भीतर बाल संरक्षण समिति के कार्यालय में जमा करने के लिए टीम बनी है।

रोजगार संबंधी ट्रेनिंग भी दिलाएगा विभाग
जो बच्चे किसी रोजगार में रुचि दिखा रहे हैं। उनकी जानकारी लेकर शासन की संबंधित योजनाओं के माध्यम से ऐसे बच्चों को जोड़ा जाएगा। ताकि वे अपनी स्किल डेवलप कर अपने हुनर के जरिए आजीविका या स्वरोजगार तैयार कर सकें। यदि कोई किशोर किसी क्षेत्र में पारंगत हो तो उसकी भी शासन की किसी योजना से मदद की जाएगी।

28 किशोर की बाल संरक्षण ने बनाई लिस्ट
बाल संप्रेषण गृह से दोषमुक्त या जमानत पर रिहा होने पर 28 बच्चों की सूची बनाई गई है। कोतवाली, कोतरा रोड और चक्रधरनगर इन तीनों थाना क्षेत्रों में अलग-अलग सामाजिक कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देगी। सामाजिक कार्यकर्ता उनसे दस्तावेज लेकर अन्य विभागों से जानकारी जुटाकर उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाएंगे।

बच्चों का भविष्य बेहतर हो इसलिए प्रयास
बच्चों को समाज की मुख्यधारा में दोबारा जोड़ने के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण और बाल संरक्षण ईकाई का यह संयुक्त प्रयास है। ताकि बच्चों का भविष्य बेहतर हो सके।''
-दीपक डनसेना, जिला बाल संरक्षण अधिकारी

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