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गोधन न्याय योजना:कंपोस्ट सेंटर में दाना खाने वाले मवेशियों का नहीं खरीद रहे गोबर

पत्थलगांव2 महीने पहले
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  • शुरुआत के 15 दिन में विवाद, पशुपालकों की बढ़ी परेशानी

छत्तीसगढ सरकार ने गो पालको को आर्थिक लाभ देने की नियत से गोधन न्याय योजना की शुरुआत की है। 20 जुलाई से नगरीय क्षेत्र के अलावा पंचायत क्षेत्र में बनाए गए गौठानों में गोबर की खरीदी की जा रही है, परंतु योजना को शुरू हुए अभी 15 दिन भी नहीं हुए है कि गोधन न्याय योजना में विवाद होेने लगा है। नगर पंचायत द्वारा शहरी क्षेत्र में गोबर खरीदी की बात करें तो यहां ऐसे लोगों द्वारा भी गोबर की बिक्री की जा रही है, जिनके घरों में एक भी जानवर मौजूूद नहीं है। ये लोग अपने रजिस्ट्रेशन का फायदा उठाकर दूसरी जगह का गोबर लाकर नगर पंचायत में बेचने का काम कर रहे थे, वही नगर पंचायत क्षेत्र के गौ पालक पशुओं के गोबर को लेकर दुविधा मे फंसे हुये है, उनका कहना है कि नगर पंचायत के कंपोस्ट सेंटर में कार्यरत स्व सहायता समूह के कर्मचारियों द्वारा दाना खिलाने की बात कहकर उनके पशुओं का गोबर के खरीदी करने से मना किया जा रहा है। बताया जाता है कि कंपोस्ट सेंटर मे दाना खिलाने वाले गौ पालको के पशुओं का गोबर नहीं खरीदा जा रहा है, जिसके कारण उनके अंदर सरकार की यह योजना अपनी अच्छी छवि नहीं बना सकी। गौ पालक राहुल राय ने बताया कि अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करने के बाद जब गौ पालक गोबर बेचने के लिए कंपोस्ट सेंटर पहुंचते है तो कई प्रकार का नुस्ख निकालकर गोबर वापस भेज दिया जा रहा है,जिससे गौ पालक दोहरी मार झेल रहे है। उन्होंने बताया कि राज्य शासन से योजना के शुरुआती दौर पर ऐसे कोई नियम कायदे नहीं बनाए थे,जिनका अब कंपोस्ट सेंटर में रहने वाले स्व सहायता समूह के कर्मचारी बताकर गौ पालको द्वारा ले जाया गया गोबर वापस कर रहे हैं।

चारागाह की जमीन पर अतिक्रमण, चारा के लिए जगह नहीं
दरअसल प्रत्येक गांव की बसाहट के दौरान सरकार द्वारा पशुओं के चरने के लिए चारागाह की भूमि संरक्षित रखी जाती थी, परंतु शहर में चारागाह के लिए संरक्षित भूमि का कहीं नामों निशान नहीं है। यहां शासन की अधिकांश भूमि पर अतिक्रमण हो जाने से चारागाह की भूमि भी अतिक्रमण की भेंठ चढ़ चुकी है। गौ पालको ने बताया कि शहर के मवेशियों को चराने के लिए यहां कोई उचित भूमि का प्रबंध नहीं है। ऐसे में पशुओं को हरा चारा खिला पाना संभव नहीं है। उनका कहना था कि पशु पालक पशुओ को दाना या फिर बाजार में मिलने वाले कुछ अन्य पौष्टिक खाद्यय प्रदार्थो का भोजन कराते है,परंतु इस भोजन को कराने के बाद अब पशुओं का गोबर ना खरीदना निश्चय ही उनके लिए गोधन न्याय योजना का लाभ ना मिलने के सामान है।

गोबर में देख रहे क्वालिटी
गौ पालक आनंद शर्मा ने बताया कि एक ओर सरकार प्रदेश मे श्वेतक्रांति लाने की बात कह रही है तो वही दूसरी ओर दाना खिलाने वाले पशुपालकों के पशुओं का गोबर खरीदा नहीं जा रहा। उनका कहना था कि वर्तमान समय में चारा की बेहद दिक्कत होती है, हर ओर कृषि कार्य रहने से पशुओं को हरा चारा खाने के लिए खेतों में छोड़ा नहीं जा सकता। उन्होंने बताया कि अधिकांश पशु पालक पशुओं से दूध बेचने का काम करते है। दूध की अधिक पैदावार करने के लिए उन्हें दाना खिलाना पड़ता है,परंतु नगर पंचायत द्वारा दाना खाने वाले पशुओं का गोबर नहीं लेने से गौ पालक गोधन न्याय योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे।

प्राकृतिक व अर्धठोस गोबर ही खरीदा जाना है
"शासन के निर्देशानुसार गौ पालकों से प्राकृतिक एवं अर्धठोस गोबर की ही खरीदी की जानी है। दाना खाने वाले पशुओं के गोबर से गैस निर्मित होती है, बाद में वह तरल में तब्दील हो जाते है, जिसके कारण गोबर की खरीदी नहीं की जा रही है।''
-जयमंगल सिंह परिहार, सीएमओ नगर पंचायत, पत्थलगांव

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