ऐसी अनदेखी:मुख्यालय में नहीं रहते सचिव, पंचायत भवन हफ्तेभर से बंद

पत्थलगांव2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

पंचायत भवन में लटकते ताले सचिवों की लापरवाही को लगातार उजागर कर रहे हैं। उनकी लापरवाही से सरकारी योजनाएं कमरे में कैद हैं। ग्रामीणों को शासन की योजनाओं की जानकारी एवं उनका लाभ नही मिल पाने से वे असमंजस की स्थिति में है।

छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार ग्रामीण तबका की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को पंचायत स्तर पर क्रियान्वित कर रही है, पर इसे क्रियान्वयन करने वाले सचिव लापरवाही बरतने से बाज नही आ रहे। डुडुंगजोर में भी सचिव की लापरवाही को पंचायत भवन में ताला लटका हुआ है। सचिव सप्ताह के एक दिन पंचायत भवन खोलकर अपने कार्यों की इतिश्री कर लेता हैं। जब पंचायत भवन के पास ही रहने वाले ग्रामीणों से जानकारी लेनी चाही तो उनका कहना था कि सप्ताह में एक दिन पंचायत भवन खुलते देखा जाता है, बाकी दिन ग्रामीण अपने कार्यों के लिए सचिव के आने एवं पंचायत भवन के खुलने का इंतजार करते हैं।

डुडुंगजोर में पंचायत भवन राजीव गांधी सेवा केन्द्र में संचालित किया जाता है। एक ओर जहां कांग्रेस शासित प्रदेश में सचिव पंचायती राज की धज्जियां उड़ाकर शासन की योजनाओं को बेकार करने में जुटे हुए है,तो वही ग्राम पंचायत डुडुंगजोर का सचिव नेपाल राम कांग्रेस के बड़े नेताओँ का नाम भी धूमिल कर रहा है। पंचायत भवन के पास ही रहने वाले असत राम ने बताया कि अक्सर ग्रामीण अपने कार्य एवं शासन की योजनाओं की जानकारी लेने राजीव गांधी सेवा केन्द्र पहुंचते हैं, पर सचिव सप्ताह में मात्र एक दिन भवन का ताला खोलकर ग्रामीणों से कुछ देर के लिए ही मुलाकात करता है।

अपने गृहग्राम बगीचा में रहता है सचिव
सचिव महीने के अधिकांश दिन बगीचा में छुट्टियां बिताता है। ऐसे में कार्यालयीन दिवस के दौरान पंचायत भवन में ताला लटकते आसानी से देखा जा सकता है। सचिव पंचायत के कार्यों में लापरवाही बरतने से कही भी बाज नही आ रहा। यही कारण है कि डुडुंगजोर में हर तरफ अव्यवस्था का आलम है। ग्रामीणों के अनुसार पंचायती राज के कार्य एवं गांव में फैली अव्यवस्था के संबंध में सचिव को लाख बार बताने के बाद भी ध्यान नहीं देता, जिससे डुडुंगजोर में पंचायती राज के काम पूरी तरह प्रभावित है।

अधिकारियों का सचिव पर नहीं कोई नियंत्रण
राजीव गांधी पंचायती राज को व्यवस्थित रूप से चलाने के लिए जितना सचिव जिम्मेदार है, उतना ही उन पर नियंत्रण करने के लिए जनपद के अधिकारी भी जिम्मेदारी के दायरे में आते हैं, पर सचिवों की लापरवाही देखने के बाद पता चलता है कि जनपद के अधिकारियों का सचिवों की कार्यशैली पर से नियंत्रण पूरी तरह हट चुका है। यही कारण है कि सचिव अपनी कार्यशैली से शासन प्रशासन का नाम धूमिल करने से कही भी बाज नहीं आ रहे। डुडुंगजोर में इन दिनों जिसका जीता जागता उदाहरण बना हुआ है।

खबरें और भी हैं...