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नहीं मिली सवारी:बिलाईगढ़, रायपुर, भाटापारा की बसों ने एक चक्कर ही लगाए, 2800 रुपये जेब से भरने पड़े

बलौदाबाजारएक महीने पहले
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जिले में बसों का संचालन भले ही सोमवार से शुरू हो गया हो लेकिन बसों को यात्री नहीं मिले। जिन यात्री प्रतीक्षालयों पर यात्री बस की प्रतीक्षा करते थे उन्हीं प्रतीक्षालयों पर बसें यात्रियों की प्रतीक्षा करती खड़ी रहीं। तीन महीने से अधिक के अंतराल के बाद सोमवार से बसों का संचालन शुरू किया गया। पहले दिन तीन रूटों पर बसें चलाई गईं, लेकिन हालत यह रही कि एक भी बस में सवारियां नहीं दिखीं।  दोपहर बाद बस स्टैंड पर चालकों ने भास्कर को बताया कि पहले दिन बिलाईगढ़, रायपुर तथा भाटापारा के लिए बसों का संचालन किया गया, सभी बसों को अपने रूट के दो चक्कर लगाने थे मगर लगाए एक ही, कारण बलौदाबाजार से रायपुर तक 2500 रुपए डीजल का खर्च, 500 स्टाफ के खर्च सहित तीन हजार रुपए लगा और सवारियां मिली कुल दो,  किराया बना मात्र 170 रुपए, कमाना तो दूर उल्टा 2800 रुपये जेब से भरने पड़े।यही कारण रहा कि पहले दिन बलौदाबाजार से बिलाईगढ़, बलौदाबाजार से रायपुर तथा बलौदाबाजार से भाटापारा तक तीनों रूटों पर दो या तीन सवारियां लेकर बसें दौड़ती रहीं।  सोमवार को बस संचालकों ने तय किया था कि सड़कों पर सिर्फ 30 प्रतिशत ही बसों को उतारेंगे मगर सवारियों के अभाव में सिर्फ 10 बसों को ही तीनों रूटों पर भेजा गया था, बस स्टैं‌ड सूने पड़े थे।

झेलनी पड़ रही चौतरफा मार : मानक ठाकुर
बस यातायात परिवहन संघ के उपाध्यक्ष मानक ठाकुर ने बताया कि हमें चौतरफा मार झेलनी पड़ रही है। लोगों में कोरोना का भय व्याप्त है जिसके चलते बसों में सवारी चढ़ ही नहीं रही हैं। खेती किसानी के दिन भी चल रहे हैं और स्कूल-काॅलेज भी बंद हैं इसलिए सड़कें सूनी हैं। डीजल के भाव बढ़ने से वैसे ही हमारी खर्च बढ़ गया है। अब खाली बसें दौड़ाना सफेद हाथी पालने जैसा लग रहा है, यही हाल रहा तो नहीं लगता कि बसें चल पाएंगी।

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