कृषि विभाग का दावा:3 महीने में किसानों से बाजार में 163 करोड़ 60 लाख रुपए का कारोबार होने की उम्मीद

बलौदाबाजार2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • दीपावली के बाद से शुरू हो जाएगी अर्ली वैरायटी के धान की कटाई

सितंबर की बारिश से संभली फसलों पर अब कोरोनाकाल से टूटे बाजार संभलने की उम्मीद है। कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पिछले साल खरीफ फसल के उत्पादन व बाजार भाव के आधार पर इस बार जिले में लगभग 163 करोड़ 60 लाख रुपए का उत्पादन बिकने का अनुमान है।

यह सारा पैसा अगले 3 महीने में ग्रामीणों की मांग के रूप में बाजार में आने की संभावना है। व्यापारियों की उम्मीदें बाजार में आने वाली इन पैसों पर टिकी है। माना जा रहा है कि दो साल के कोरोनाकाल से ध्वस्त हुई बाजार को संभालने में अब किसानों की सबसे बड़ी भूमिका होगी। आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक अर्ली वैरायटी के धान की कटाई दीपावली के बाद से शुरू हो जाएगी। 15 नवंबर से सोसाइटियों में धान पहुंचना शुरू हो जाएगा। मंडियों में खरीफ के अन्य फसलों की आवक शुरू हो जाएगी, जिसे जनवरी के आखिर तक बेचा जाएगा, लेकिन नवंबर व दिसंबर में आवक चरम पर होगी। इसके मद्देनजर अगले तीन महीने में किसानों के पास आने वाला पैैसा गांवों से बाजार तक पहुंचेगा, जो बाजार को मुहुर्त-त्योहार, शादी सीजन में तेज रफ्तार देगा।

जरूरत के हिसाब से फसल रखकर बाकी को बेचते हैं
ग्राम लटुवा के किसान भरत यदु, मुरारी कन्नौजे, सोनाडीह के किसान परेश यादव, लाहोद के मुरली साहू आदि किसानों का कहना है कि परिवार की जरूरत जितनी फसल रखेंगे, बाकी मंडी-बाजारों में बेचेंगे। फसल से मिलने वाले पैसे से सबसे पहले वो उधारी चुकाता है। फिर बच्चों की पढ़ाई और शादी-ब्याह सहित अन्य जरूरतों पर खर्च करता है। किसान कमाई का 10 फीसदी शादी में खर्च करता है।

अगस्त में बारिश होती तो उपज और बेहतर होता: पैकरा
कृषि उपसंचालक सतराम पैकरा ने बताया कि अगस्त में हुई कम बारिश के चलते उत्पादन में कुछ कमी आ सकती है। हालांकि सितंबर में हुई बारिश ने फसलों को काफी हद तक संभाल लिया है मगर अगस्त में भी बारिश हुई होती तो कृषि उपज और भी बेहतर होता। फिर भी तय है कि बाजार में खुशहाली किसान लाएगा।

दीपावली तक रहती है शहरी खरीदारी फिर ग्रामीण मेला
चैंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष जुगल भट्टर ने बताया कि दिवाली तक बाजार को शहरी उपभोक्ता चलाते हैं। इसके बाद बाजार गांवों की ओर देखता है। नवंबर से जनवरी तक व्यापार में कृषि आय का बड़ा योगदान रहेगा, क्योंकि फसल की मिंजाई के बाद किसान अपनी जरूरतों काे पूरा करने बाजार में खरीदारी करने पहुंचते हैं। वहीं नवंबर से मेला मड़ई का आयोजन भी शुरू हो जाता है।

खबरें और भी हैं...