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बदलते लक्षणों से बढ़ी डॉक्टरों की परेशानी:एक घंटे में ही ऑक्सीजन लेवल गिर रहा और पता भी नहीं चल पा रहा, कारण-‘हैप्पी हाइपोक्सिया’

बलौदाबाजार5 महीने पहलेलेखक: तारा परसवानी
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  • एक घंटे पहले सामान्य पर लगाना पड़ रहा वेंटिलेटर

बलौदाबाजार, जिले में लाॅकडाउन के 25 दिन बाद भी कोरोना संक्रमण की स्थिति बेकाबू है। प्रतिदिन 700 से 900 के बीच नए केस मिल रहे हैं जबकि हर रोज औसतन 7 मौतें हो रही हैं। कोरोना संक्रमण को लेकर जहां लोगों में घबराहट है वहीं पॉजिटिव मरीजों में नए तरीके के लक्षण से डॉक्टर भी हैरान हैं। वहीं प्रतिदिन औसतन 7 लोगों की मौत हो रही है और सप्ताह में 15 मौतें अस्पताल पहुंचने से एक घंटे बाद या एक घंटे पहले हो जा रही हैं।

कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमित मरीज बिल्कुल पूरी तरह से ठीक दिख रहे हैं और हंसी-खुशी से बातचीत कर रहे हैं और अचानक उनकी मौत हो जा रही है क्योंकि संक्रमितों में ऑक्सीजन स्तर कम होने के बावजूद लक्षण सामने नहीं आ रहे हैं। जांच में सामने आ रहा है कि ऑक्सीजन का लेवल कितना गिर चुका है। इसे मेडिकल टर्मिनोलॉजी में हैप्पी हाइपोक्सिया कहा जाता है। खतरनाक यह कि ऑक्सीजन लेवल गिरने की न तो मरीज न डॉक्टरों तक को भनक नहीं लगती।

रेमडेसिविर भी बचा न सका जान
केस1.
भाटापारा के ही धनेश्वर साहू बुधवार को खुद ही गाड़ी ड्राइव करते हुए सामान्य अवस्था में जिला अस्पताल पहुंचे थे। जब भर्ती किया गया तो पता चला कि ऑक्सीजन लेवल 38 प्रतिशत तक पहुंच गया है, रेमडेसिविर इंजेक्शन भी लगे मगर बचाया नहीं जा सका।

टेस्ट से पहले ही ऑक्सीजन कम, मौत
केस 2.
एक सप्ताह पहले सर्दी-खांसी की शिकायत के चलते भाटापारा निवासी जनेश्वर साहू सामान्य अवस्था में अपनी वैन से अकेले ही बलौदाबाजार जिला अस्पताल के सेंटर में टेस्ट कराने के लिए आए मगर टेस्ट कराने से पहले ही ऑक्सीजन लेवल अचानक गिर गया और अस्पताल परिसर में ही उनकी मौत हो गई।

लक्षण सामान्य, मुंह से खून आने पर जांच कराई तो पॉजिटिव
केस 3.
65 वर्षीय भैयाराम टंडन एवं 60 वर्षीय टिल्लू सोनवानी को कोरोना हुआ। सामान्य दिखते लक्षणों के बीच मुंह से खून आया तो परिजन घबराए और जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। सिटी स्कैन में आया कि दोनों के 60 से 65 फीसदी लंग्स प्रभावित हो चुके थे और सांस लेने में बहुत तकलीफ थी। रेमडेसिविर, स्टेराइड व टॉसिलीजुमेब जैसी दवाइयों से भी उसे नहीं बचाया जा सका।

सामान्य थी महिला पर ऑक्सीजन लेवल कम हो गया, वेंटिलेटर से बच गई जान
केस 4.
बलौदाबाजार की 70 वर्षीय कमला वर्मा सप्ताहभर पहले ही होम आइसोलेशन मांगने जिला कोविड अस्पताल आई थीं। डाॅक्टरों की टीम ने जांच में पाया कि ऑक्सीजन लेवल 50 प्रतिशत से भी नीचे चला गया है। फेफडे 90 प्रतिशत खराब थे, उन्हें तुरंत आईसीयू में भर्ती किया गया, सामान्य अवस्था में आई इस महिला की महज एक घंटे में स्थिति ऐसी हो गई कि उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर डालना पड़ा था। डाॅक्टरों के अथक प्रयास के बाद वह 40 दिन बाद स्वस्थ होकर घर लौटीं।

20 से 30 साल के युवाओं में दिख रहे इसके लक्षण
पहली बार कोरोना मरीजों में इस तरह के खतरनाक लक्षण सामने आए हैं। डराने वाली बात यह है ये लक्षण 20 से 30 वर्ष के युवाओं में सामने आए हैं और वे गंभीर रूप से बीमार भी हो रहे हैं। नए लक्षणों में एक यह भी है कि खांसी आने पर कफ के साथ खून आ रहा है। जिला कोविड अस्पताल प्रभारी डाॅ. शैलेन्द्र साहू का कहना है कि इनमें मरीजों में अन्य लक्षण नहीं के बराबर होते हैं लेकिन एक्स-रे और सीटी स्कैन में पता चलता है कि लंग्स सीधे 60 से 70 फीसदी तक प्रभावित हो चुके हैं। कोविड सेंटरों में ऐसे मरीज सामने आ रहे हैं और अब बढ़ते मरीजों के बीच इस नई फाइडिंग ने परेशानी को और बढ़ा दिया है।

एक्सपर्ट व्यू... हैप्पी हाइपोक्सिया के कारण ऑक्सीजन स्तर गिरने के बाद भी मरीज को पता नहीं चल रहा है
ऐसी स्थिति को मेडिकल टर्मिनोलॉजी में हैप्पी हाइपोक्सिया कहते हैं, जिसमें ऑक्सीजन की मात्रा अचानक गिर जाती है। ऑक्सीजन की मात्रा शरीर व खून में कम होने से शरीर के अंगों एवं टिश्यू को कम मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है। इससे अंग ठीक तरह से काम करना बंद कर देते हैं और खराब होने लगते हैं। ऑक्सीजन लेवल गिरने पर आमतौर पर मरीजों को सांस लेने में तकलीफ होती है और कई बार तो बेहोशी आ जाती है। ऑक्सीजन स्तर गिरने के बाद भी उन्हें पता नहीं चल रहा है। वे आराम से बातचीत कर रहे होते हैं और मौत के करीब पहुंच जाते हैं। अभी ऐसे लक्षण भी आ रहे हैं कि खांसते हुए मुंह के रास्ते खून आ रहा हैै।
-डाॅ. शैलेन्द्र साहू, जिला कोविड प्रभारी

सुझाव... ये अजात शत्रु है, ऑक्सीजन लेवल नापते रहें, दवा लेने के बाद भी बुखार 102 है तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें
हैप्पी हाइपोक्सिया वो अज्ञात शत्रु है जो मौत के करीब ले जाने के बाद भी मरीज को एहसास नहीं होने देता कि उसकी सांसें सिमट रही हैं। ऐसे में कोरोना के लक्षण वाले हर मरीज को ऑक्सीमीटर व थर्मामीटर से हर एक-दो घंटे में ऑक्सीजन लेवल व तापमान की जांच करें। अगर ऑक्सीजन लेवल 94 से नीचे है या शरीर का तापमान पैरासिटामाल लेने के बाद भी 102 है तो तत्काल चिकित्सकों से संपर्क करें और सलाह लें। ऐसे मरीजों को जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ कोरोना का ट्रीटमेंट दिया जाता है। अगर 4-5 दिन बाद आरटीपीसीआर रिपोर्ट पाॅजिटिव आती है तो उसे कोविड अस्पताल में शिफ्ट कर दिया जाता है।
- डाॅ. खेमराज सोनवानी, सीएमएचओ

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