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दिक्कत:6 माह से लगातार लॉकडाउन, कोरोनाकाल में 2 लाख से अधिक हुए बेरोजगार

बलौदाबाजारएक महीने पहले
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  • जिला प्रशासन का दावा-करीब डेढ़ लाख प्रवासी मजदूरों को मनरेगा में काम दिया गया, हकीकत: मानसून के आते ही जून के दूसरे सप्ताह में ही काम बंद

जिले में कोरोना संक्रमितों की संख्या ढाई हजार के पार तो कोरोना से मौतों का आंकड़ा भी 31 हो गया है। जिले में मौतों और संक्रमितों का आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है लेकिन सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी के रूप में उभरकर सामने आ रही है। कोरोना के कारण पिछले 6 माह से लगातार हो रहे लॉकडाउन के चलते जिले में बेरोजगारी दर में बेतहाशा वृद्धि हुई है। जिले के असंगठित क्षेत्र के व अन्य राज्यों से वापस आए प्रवासी मजदूरों सहित लगभग 2 लाख से अधिक श्रमिक लाॅकडाउन से प्रभावित हुए हैं। प्रशासन का दावा है कि फरवरी से जिले के 1 लाख 80 हजार मजदूरों को मनरेगा के तहत काम मिला है, मगर जिले में चल रहे मनरेगा कार्य भी मानसून आने के कारण शुरू हुई बारिश के बाद जून के दूसरे सप्ताह में ही बंद हो गए। कई लोगों का जमा जमाया काम धंधा कोरोना की वजह से बर्बाद हो चुका है तो कई लोगों का बंद पड़ा है। जमा पूंजी तो कब की खत्म हो चुकी है, कर्ज लेकर काम चल रहा है। इस दौरान श्रम विभाग कुछ रोजगार कैंपों के माध्यम से महज 60 से 65 लोगों को ही काम दिलवा सका है।

1 लाख 20 हजार प्रवासी मजदूरों की हुई थी वापसी
कोरोना संक्रमण के बाद प्रदेश में बलौदाबाजार ही इकलौता जिला था जहां सबसे ज्यादा 1 लाख 20 हजार प्रवासी मजदूरों की वापसी हुई थी। इन्हें तत्काल रोजगार की जरूरत थी, 14 दिन क्वारेंटाइन रहने के कई दिनों बाद लगभग 70 हजार मजदूरों को मनरेगा में जाॅब कार्ड तो मिला और काम भी शुरू हुआ मगर इसी बीच बरसात शुरू हो गई और काम बंद हो गया।

उत्पादन घटा को संयंत्रों में आधे रह गए मजदूर
जिले की सीमेंट फैक्ट्रियों में काम आधा ही रह गया है यानी उत्पादन भी आधा ही हो रहा है। ऐसे में संयंत्र प्रबंधन के सूत्रों की मानें तो उत्पादन कम होने से सभी सीमेंट संयंत्रों में मजदूरों की संख्या 25 प्रतिशत ही रह गई है। जिले में 6 सीमेंट फैक्ट्रियां है जिसमें लगभग 10 हजार मजदूर काम करते थे मगर अब इनकी संख्या दो से ढाई हजार ही रह गई है।

निजी स्कूलों में सबसे ज्यादा गई नौकरी
जिले में लगभग 40 फीसदी बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ते है लेकिन सबसे ज्यादा बेरोजगारी की खबरें प्राइवेट स्कूलों से ही आ रही हैं जहां 70 फीसदी तक शिक्षकों को नौकरी से या तो निकाल दिया गया है या फिर लीव विदाउट पेमेंट पर हैं। जिले के कुछ बड़े स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो बाकी के स्कूल संचालकों की ऐसी स्थिति भी नहीं है कि वे शिक्षकों को वेतन दे सकें।

जिले में 60770 पहले से ही शिक्षित बेरोजगार
जिले में 60770 पहले से ही रजिस्टर्ड शिक्षित बेरोजगार हैं, इन्हें काम नहीं मिला है। कोरोना से कैंपस सलेक्शन भी बंद है। जिला रोजगार अधिकारी मनोरमा भगत ने बताया कि हमने पिछले दिनों कोरोनाकाल के दौरान ही 250 बेरोजगार लोगों की सूची विभिन्न नियुक्तियों हेतु विभागों को भेजी थी मगर उन्हें काम मिला या नहीं मिला इसकी जानकारी हमें नहीं है।

सब्जियां बेच रहे थे वह भी बंद : ड्राइवर, कंडक्टर, हाॅकर, हेल्पर हों या दुकानों में काम करने वाले, बेरोजगार होने के बाद कुछ तो सब्जियां बेच रहे थे तो कुछ ने चााय, गुपचुप के ठेले खोल लिए थे मगर वह भी कुछ दिनों तक चले फिर बंद हो गए। इस बार के लाॅकडाउन में तो सब्जियां भी बंद हैं, ऐसे में लगभग एक हजार खाली हैं।

बारिश ने डाली बाधा : चौहान- इस संबंध में जिला परियोजना अधिकारी एचएस चौहान ने बताया कि हमने 70 हजार मजदूरों को मनरेगा में काम दिया था और भी मजदूरों को काम मिलता पर बारिश शुरू हो गई, हमने अपनी तरफ से पूरा प्रयास किया।

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