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डॉक्टरों को मिली सफलता:विशेषज्ञों की टीम ने नवजात का पीलिया युक्त ब्लड निकालकर नया रक्त डाला

बलौदाबाजार9 दिन पहले
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  • एक्सचेंज ट्रांस फ्यूजन से 4 दिन के नवजात को मिला जीवन दान, जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने रायपुर रेफर करने कहा तो परिजनों ने आर्थिक समस्या बताई

जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं होने से मरीज और परिजन बड़े शहरों की तरफ रूख करते थे। जिले के ज्यादातर मरीजों की मौत समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाने के कारण हो जाती है। ऐसे ही एक गंभीर केस को जब जिला अस्पताल के डाॅक्टरों ने रायपुर रेफर करने के लिए परिजनों से कहा तो परिजनों ने आर्थिक स्थिति का हवाला देकर रायपुर जाने से इंकार कर दिया और जिला अस्पताल के डाॅक्टरों से ही इलाज करने के लिए मिन्नते की। डाॅक्टरों ने इसे चुनौती के रूप में लेते हुए इलाज शुरू किया। सतत प्रयास और दृढ़ संकल्प से सफलता मिली तो मौत के मुहाने में खड़े 4 दिन के नवजात को भी जिंदगी मिल गई।

रविवार को जिला हॉस्पिटल में डॉक्टरों की एक टीम ने एक्सचेंज ट्रांस फ्यूजन के माध्यम से 4 दिन के नवजात शिशु के पीलिया युक्त पूरे रक्त को निकाल नया ब्लड देकर उनको एक नया जीवन दान दिया। कसडोल विकासखंड के अंतर्गत ग्राम तिल्दा की गोमती बाई ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कसडोल में एक शिशु को जन्म दिया। जन्म के समय नवजात शिशु का वजन 1 किलो 700 ग्राम था तथा वह पीलिया से ग्रसित थी। शिशु की नाजुक हालात को देखते हुए कसडोल से माता-पिता उसे जिला अस्पताल लाया। यहां प्रारंभिक जांच में बिलीरुबिन 12 एमजी प्रति डीसिलीटर पाया गया, जो कि सामान्य से बहुत अधिक था।

शिशु को दिनभर फोटोथेरेपी मशीन में रखा गया, किंतु उसका बिलीरुबिन 23 एमजी प्रति डीसिलीटर तक पहुंच गया, जिसका असर शिशु के दिमाग में भी होने लगा। इस स्थिति में शिशु ने दूध पीना भी बंद कर दिया था, जिस कारण जिला अस्पताल से उसे मेकाहारा रायपुर ले जाने की सलाह को दी गई मगर माता-पिता ने आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के चलते वहां जाने से इंकार कर दिया। ऐसे में शिशु की जान बचाने के लिए सिविल सर्जन डॉ. राजेश कुमार अवस्थी के निर्देश पर अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञों की टीम ने निर्णय लिया कि शिशु का पीलिया युक्त सम्पूर्ण रक्त निकालकर एक्सचेंज ट्रांस फ्यूजन द्वारा नया रक्त डाला जाए।

300 एमएल रक्त की थी आवश्यकता
इस प्रक्रिया में करीब 300 एमएल रक्त की आवश्यकता थी, जिसे ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. अशोक वर्मा ने दिया। इस कठिन प्रक्रिया के दौरान बच्चे की जान भी जा सकती थी इसलिए अभिभावकों की सहमति लेते हुए यह प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई। इसके बाद शिशु का बिलीरुबिन सामान्य हो गया एवं अब शिशु पूरी तरह स्वस्थ है।

डॉक्टरों की टीम में ये रहे शामिल

इस पूरी प्रक्रिया में जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञों की टीम में डॉ के टेम्भूरने, डॉ योगेन्द्र वर्मा एवं डॉ. भूपेन्द्र साहू का योगदान रहा, जबकि नर्सिंग स्टाफ से लता टंडन और श्यामा भारती ने सहयोग किया। शिशु के ठीक हो जाने पर अभिभावक बहुत ही प्रसन्न हैं। उन्होंने चिकित्सा स्टॉफ एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है। कलेक्टर सुनील कुमार जैन ने जिला हॉस्पिटल की इस उपलब्धि पर डॉक्टरों की पूरी टीम सहित स्टॉफ को शुभकामनाएं देते हुए इसी तरह मेहनत करते रहने की बात कही।

ब्लड निकालना-चढ़ाना ज्यादा रिस्क था: सिविल सर्जन
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. राजेश कुमार अवस्थी ने बताया जिला अस्पताल में इस तरह का यह पहला मामला आया था। चूंकि बच्चे के पूरे ब्लड में पीलिया था, जिसे बदलना जरूरी था। नवजात शिशु का मामला था इसलिए रिस्क बहुत ज्यादा था। एक्सचेंज ट्रांस फ्यूजन में एक तरफ से खून निकालना और दूसरी तरफ से खून चढ़ाना रहता है। डेढ़ घंटे की इस सफल प्रक्रिया के बाद बच्ची को अब्जर्वेशन में रखा गया है। अब वह खतरे से बाहर है।

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