चिटफंड के नाम पर खुली लूट:समय खत्म, जिले में 700 करोड़ रुपए की लूट की गवाह 1 लाख 68 हजार अर्जियां पहुंचीं

बलौदाबाजार5 महीने पहले
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20 अगस्त को आवेदन लेने के आखिरी दिन बलौदाबाजार तहसील कार्यालय में केवल 700 आवेदन ही जमा हुए। - Dainik Bhaskar
20 अगस्त को आवेदन लेने के आखिरी दिन बलौदाबाजार तहसील कार्यालय में केवल 700 आवेदन ही जमा हुए।
  • 1 करोड़ तक का निवेश किया है, बलौदाबाजार जिले से ही 65357 आवेदन

जिले के 1 लाख 68435 लोगों की करोड़ों की मेहनत से कमाई रकम चिटफंड कंपनियों में डूब गई। सरकार ने रकम वापसी के लिए लगभग सबकी अर्जी ले ली है। शुक्रवार को शासन के पास आवेदन देने का अंतिम दिन था। आवेदन के अंतिम दिन जिले की सभी तहसील कार्यालयों में विशेष भीड़ नहीं थी। बलौदाबाजार तहसील कार्यालय के डिवीजन में लोगों के सिर्फ 700 आवेदन शुक्रवार को जमा हुए।

उम्मीद है कि करीब 700 करोड़ की लूट इन कंपनियों ने निवेशकों से की है। बलौदाबाजार, पलारी, लवन को मिलाकर बलौदाबाजार सब डिवीजन में ही सबसे अधिक 65357 आवेदन जमा किए गए। पुलिस और जिला प्रशासन के पास उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार जिले में 15 से ज्यादा छोटी-बड़ी कंपनियों में जिले के 1 लाख 68 हजार लोगों के लगभग 700 करोड़ रुपए डूब चुके हैं। इनमें 5 हजार से लेकर एक करोड़ रुपए तक निवेश करने वाले लोग शामिल हैं। जिला प्रशासन ने सरकारी छुट्टी के बाद भी निर्धारित समय शाम 5 बजे तक आवेदन लिए। अब इन आवेदनों का सत्यापन होगा जिसके बाद पता लगेगा कि कितनी चिटफंड कंपनियों ने कितने करोड़ की ठगी की है। कंपनियों की प्रॉपर्टी का पता लगाकर उनकी प्रॉपर्टी बेचकर पीड़ितों को पैसे दिलाने का वादा सरकार कर रही है।

संपत्तियां कुर्क कर रकम वापसी के दावे
अफसर कंपनियों का नाम निकालकर चल अचल संपत्तियों की जानकारी जुटाएंगे। अफसरों के पास संपत्तियों का कोई रिकॉर्ड नहीं है। प्रशासन का दावा है कि निवेशकों की ओर से दिए जा रहे दस्तावेजों के आधार पर प्रशासन कंपनियों के बारे में पड़ताल करेगा उसके बाद संपत्तियां कुर्क कर जल्द से जल्द रकम वापसी कराने के प्रयास शुरू होंगे जबकि हालात देखकर यही लगता है कि पूरी प्रक्रिया में सालभर से भी अधिक का समय लग सकता है।

ये हैं जनता की कमाई लूटने वाली कंपनियां
गरिमा होम एंड फॉर्म हाउस लिमिटेड, एनआईसीएल, साई प्रसाद, पीसीसी इंडिया लिमिटेड, विनायक होम्स, सुस्क इंडिया लिमिटेड, बीएनपी इंडिया डेवलपर्स, ग्रीन रे इंटरनेशनल, रुचि रियल उर्फ वेल्थ क्रिएटिव कंपनी, सर्वमंगला रियल स्टेट, फ्यूचर गोल्ड, रेडिएंट रियल स्टेट, मिलियन मिल्स, रोज वेल्ली समेत दर्जनों चिटफंड कंपनियों की जमीनें प्रदेश के अन्य जिले में चिह्नांकित हो चुकी हैं।

कानून बना पर पीड़ितों को नहीं मिला फायदा
चिटफंड कंपनियों के खिलाफ नए कानून बनाए गए जिसका लाभ पीडि़तों को नहीं मिला। चिटफंड एक्ट 2015 की धारा 1 में कलेक्टर को कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। धारा 6 में कलेक्टर को कंपनी की संपत्ति कुर्क करने का अधिकार है। धारा 7 में कलेक्टर को संपत्ति नीलाम कर पैसे लौटाने का अधिकार है।

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