हवन के साथ भागवत का समापन:सुदामा चरित्र सुनकर श्रद्घालुओं की आंखें हुईं नम

भानुप्रतापपुर2 महीने पहले
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कच्चे में आयोजित श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भागवत कथा का समापन हवन के साथ किया गया। अंतिम दिन आचार्य आशुतोष चैतन्य महाराज ने सुदामा चरित्र की कथा सुनाई। श्रीकृष्ण-सुदामा के बीच मित्रता की भावपूर्ण कथा सुन श्रद्घालुओं की आंखें नम हो गईं। अंतिम दिन भी भंडारे का भी आयोजन किया गया। कथावाचक आशुतोष चैतन्य महाराज ने श्रोताओं को भागवत को अपने जीवन में उतारने को कहा। साथ ही सुदामा चरित्र के माध्यम से श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की मिसाल बताते समाज को समानता का संदेश दिया।

कथावाचक ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का सात दिनों तक श्रवण करने से जीव का उद्धार हो जाता है। इस कथा को कराने वाले भी पुण्य के भागी होते हैं। सात दिन की कथा का सारांश बताते कहा कि मनुष्य जीवन कई योनियों के बाद मिलता है। इसे कैसे जीना चाहिए, इस बारे में भी बताया। श्रीकृष्ण-सुदामा की निश्छल मित्रता का वर्णन करते कहा कैसे बिना याचना के कृष्ण ने गरीब सुदामा की स्थिति को सुधारा।

अंत में कृष्ण के दिव्य लोक पहुंचने का वर्णन किया। वहीं महाआरती के बाद भोग वितरण किया गया। कच्चे में चल रहे श्रीमद्भागवत ज्ञान में छठवें दिन सांसद मोहन मंडावी भी भागवत कथा सुनने पहुंचे थे। वहीं अंतिम दिन महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेड़िया पहुंचीं।

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