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वैक्सीनेशन है जरूरी:काेराेना की दोनों लहरों में ईरागांव सुरक्षित क्योंकि यहां के लोग बाहर जाते नहीं, बाहर वालों को गांव आने देते नहीं

भानुप्रतापपुरएक महीने पहलेलेखक: सुमंत सिन्हा
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गांव में जैसे ही बाहर से सब्जी वाला पहुंचा उसे लौटाया।       गांव के लोगों को वैक्सीन लगवाने समझाईश देते गांव के सरपंच। - Dainik Bhaskar
गांव में जैसे ही बाहर से सब्जी वाला पहुंचा उसे लौटाया। गांव के लोगों को वैक्सीन लगवाने समझाईश देते गांव के सरपंच।
  • वैक्सीन की पहली डोज लगवाने के बाद दो बुजुर्गों की मौत के बाद गांव में फैली अफवाह से उबरे गांव की कहानी
  • नतीजा: गांव आबादी लगभग 1200 है और यहां कोरोना का एक भी केस नहीं

भानुप्रतापपुर से 16 किमी दूर ईरागांव बेहद जागरूक गांव है। यहां के लोग कोविड गाइड लाईन का सख्ती से पालन कर रहे हैं। यही कारण है गांव पुरी तरह सुरक्षित है तथा दोनों लहरों के दौरान गांव का एक भी व्यक्ति कोरोना से संक्रमित नहीं हुआ। वैक्सीनेशन को लेकर उड़ रही अफवाहें इस गांव तक भी पहुंची। शुरू में लोगों ने दूरी बनाई लेकिन जल्द ही समझ गए की यह अफवाह है तथा अब सभी वैक्सीन लगवाने तैयार हैं।

भास्कर की टीम ईरागांव पहुंची तो देखा आम पेड़ के नीचे गांव के सरपंच गेंदलाल ग्रामीणों की बैठक लेकर समझा रहे हैं की वैक्सीनेशन को लेकर फैली अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। गांव के सभी लोग वैक्सीन लगवाएं। यही नहीं एक दूसरे को वैक्सीन लगवाने जागरूक भी करें। गांव आबादी लगभग 1200 है और यहां कोरोना संक्रमण का एक भी मामला नहीं है। पिछले वर्ष पहली लहर ही नहीं इस वर्ष दूसरी लहर में भी गांव पुरी तरह सुरक्षित है। भास्कर ने कारण जानना चाहा तो पता चला जैसे ही कोरोना फैलने की खबर आई पुरे गांव वालों को कह दिया गया की कितना भी जरूरी काम क्यों नहीं हो कोई गांव से बाहर नहीं जाएगा। बहुओं को मायके जाने तथा शादी होकर दूसरे गांव गई बेटियों को भी गांव आने से मना कर दिया गया। मेडिकल इमरजेंसी या बहुत ज्यादा जरूरी होने बाहर गए भी तो वापस आकर सैनिटाइज होने के बाद ही घर में प्रवेश करने कहा गया।

पुरा गांव चौकस, बाहरी को प्रवेश नहीं
भास्कर की टीम जब गांव में थी तभी अचानक सब्जी बेचने बाहरी व्यक्ति आ गया। ग्रामीणों ने तत्काल गांव बाहर भगाया और दुबारा नहीं आने हिदायत दी। गांव के गेंदलाल हिडको ने बताया पूरा गांव चौकस है। कोई भी बाहरी व्यक्ति दिखता है तो तत्काल बाहर किया जाता है।

दो बुजुर्गों की मौत के बाद अफवाह से उबरा गांव
गांव के 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों को वैक्सीन का पहला डोज लगा था। इसमें से दो बुजुर्गों की मौत हो गई थी। यहां से अफवाह फैल गई की वैक्सीन लगवाने से मौत हो रही है। इसके बाद इस गांव के लोगों ने वैक्सीन लगवाना ही बंद कर दिया था। जांच में पता चला दोनों की मौत का कारण दूसरी बीमारी थी।

सब्जी को लेकर आत्मनिर्भर
ग्रामीण समुंद सिंह बघेल, जगदेव राम आंचला, चैतूराम आंचला ने बताया हमारे पंचायत क्षेत्र में लगभग 50 किसानों के पास ट्यूबवेल है। सिंचाई के माध्यम वाले किसान सब्जी उत्पादन करते हैं। गांव में होने वाली सब्जी से पुरे गांव की सब्जी की जरूरत पूरी हो जाती है।

दवा के साथ कर रहे दुआ
यहां के ग्रामीण दवा पर तो भरोसा कर ही रहे हैं साथ ही दुआ भी कर रहे हैं। ग्राम गायता मानूराम गोटा, ग्राम पटेल प्रयाग सिंह कोरेटी ने कहा कोरोना से बचने नियमों का पालन कर रहे हैं। साथ ही गांव की शीतला माता से विशेष प्रार्थना भी की गई है।

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