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पर्युषण पर्व का तीसरा दिन:मायाचारी व्यक्ति का व्यवहार सरल नहीं होता: सुमनलता

भाटापारा4 दिन पहले
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भाटापारा. पर्युषण पर्व पर भगवान पदम प्रभु का अभिषेक करते भक्त। - Dainik Bhaskar
भाटापारा. पर्युषण पर्व पर भगवान पदम प्रभु का अभिषेक करते भक्त।
  • दिगंबर जैन मंदिर भाटापारा में भक्तों ने भगवान पदम प्रभु का अभिषेक कर उतारी आरती, भजनों पर झूमते रहे

दिगंबर जैन मंदिर भाटापारा में दस लक्षण पर्युषण पर्व मनाया जा रहा है। रविवार को पर्युषण महापर्व का तीसरा दिन उत्तम आर्जव धर्म रहा।सुबह 7:30 बजे मंगलाष्टक से पूजा प्रारंभ की गई। श्री 1008 भगवान पदम प्रभु की प्रतिमा मस्तक पर रखकर आलोक मोदी ने पांडुक शिला पर विराजमान की। इसके बाद अभिषेक कर मंगल आरती की गई। भजनों पर भक्त झूमते रहे।

शांति धारा का सौभाग्य आलोक कुमार, अभिषेक, सानू अभिनीत एवं मानू मोदी को प्राप्त हुआ। आरती के बाद देव शास्त्र गुरु पूजा, सोलह कारण, पंचमेरू, दस लक्षण पूजा की क्रिया संपन्न हुई। सुमनलता मोदी ने प्रवचन में कहा कि धर्म का तीसरा लक्षण है उत्तम आर्जव धर्म। रिजु शब्द से आर्जव बनता है, जिसमें किसी भी प्रकार का छल नहीं, कपट नहीं, किसी प्रकार के धोखा देने की भावना नहीं, ऐसी जो आत्मा की शुद्ध परिणीति है उसका नाम आर्जव है। रिजुता का अर्थ है सरलता, सरलता के मायने हैं मन, वचन, कर्म की एकता मन में जो विचार आया उसे वचन से कहा जाए और जो वचन से कहा जाए उसी के अनुसार कार्य से प्रवृत्ति की जाए। जब इन तीनों योग में विराटता आ जाती है तब माया कहलाने लगती है। मायाचारी व्यक्ति का व्यवहार सहज एवं सरल नहीं होता। वह सोचता कुछ, बोलता कुछ और करता कुछ और ही है। मायावी व्यक्ति कभी सुख, शांति का अनुभव नहीं कर सकता। कार्यक्रम में प्रकाशचंद ,अनिल कुमार, आलोक, सुरेश, अभिषेक, अक्षत, अभिनव, अभिनंदन, अभिनीत, छोटू मानू, आदि मोदी, नवीन कुमार, नितिन कुमार ,सचिन कुमार, सुमन लता, रानी ,नेहा ,सुरभि ,अंशु ,कल्पना सिंघाई, संदीप जैन, संजय जैन आदि उपस्थित थे।

बिल्ली के समान होता है मायाचारी लोग : सुमनलता ने आगे कहा मायाचारी से हम दूसरों को ठगने के प्रयास में सारा जीवन खो रहे हैं पर ध्यान रखना हम दूसरों को नहीं स्वयं अपनी आत्मा को ठग रहे हैं। इतिहास में अनेक मायाचारी के उदाहरण हैं। जैसे कौरवों ने मायाचारों से लाक्षागृह बनाकर पांडवों को मारना चाहा। लंका के राजा रावण ने मायाचारी से नकली साधु का वेश बनाकर सीता का हरण किया। साधु को लोग अलग दृष्टि से देखते हैं, उन्हें सरल विश्वासपात्र माना जाता है इसलिए सीता लक्ष्मण रेखा पार कर गई अन्यथा नहीं करती। आज भी मायाचारी के कारण कोई भी अपना नाम रावण नहीं रखता। मायाचारी पुरुष बिल्ली के समान होता है।

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