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शिव-पार्वती की पूजा कर सुनी कथा:शहर में महिलाओं ने हरतालिका तीज का पर्व मनाया

भाटापारा15 दिन पहले
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शहर में महिलाओं ने हरतालिका तीज का पर्व मनाया। इस अवसर पर मंदिरों, बाजारों में काफी रौनक रही। बाजारों में सुहाग सामग्री खरीदने के लिए महिलाओं की भीड़ रही। विवाहित स्त्रियों के अलावा अविवाहित युवतियों ने भी यह व्रत रखा। विवाहित महिलाओं ने यह व्रत अपनी पति की लंबी आयु के लिए रखा। वहीं अविवाहित युवतियों ने परिवार की सुख-शांति, व अच्छे वर के लिए व्रत रखा।

भगवान शिव देवी पार्वती को प्रसन्न करने के लिए महिलाओं ने मंदिरों में पंचामृत से शिवलिंग को स्नान करवाया। महिलाओं का मानना है कि सबसे पहले देवी पार्वती ने इस व्रत को रखा था। इस दौरान ने महिलाओं ने मंदिरों में गौरी-शंकर का पूजन किया। प्रसाद का भोग लगाया आैर देवी पार्वती को सुहाग सामग्री भी समर्पित की।

इस प्रकार की जाती है पूजा: मंदिरोंमें आई महिलाओं ने कहा कि हरतालिका व्रत के पर्व पर सूर्योदय से पहले उठकर नहा- धोकर पूरा शृंगार किया जाता है। पूजन के लिए केले के पत्तों से मंडप बनाकर गौरी- शंकर की प्रतिमा स्थापित की जाती है। इसके बाद देवी पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित की जाती है। रात के समय भजन- कीर्तन करते हुए जागरण कर तीन बार आरती की जाती है। इसके बाद शिव पार्वती विवाह की कथा सुनी जाती है। हरतालिकातीज पर नयापारा वार्ड तीजहारिन महिलाओं के द्वारा आकर्षक रूप से फुलेरा का निर्माण कर भगवान शिव पार्वती जी की मूर्ति स्थापित कर रात जागरण करते हुए भजन कीर्तन के साथ पूजा अर्चना किया जिसमें बड़ी संख्या महिलाओं ने उपस्थित होकर भगवान भोले पार्वती आशीर्वाद प्राप्त की प्रातः कालीन विधि विधान से पूजा कर कल्याण सागर तालाब में ससम्मान विसर्जित किया गया।

इसलिए मनाई जाती है हरतालिका तीज
कथा वाचक पंडित किशोर तिवारी ने कहा कि हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्लपक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। हरतालिका तीज को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने कहा कि देवी पार्वती के एक ही रूप मां हरतालिका को समर्पित हरतालिका तीज उस दिन की याद में मनाई जाती है, जब भगवान शिव ने देवी पार्वती को स्वीकार किया था।

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