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अब रुकते नहीं कदम:11 साल की गीता, दोनों पैर के पंजे नहीं अब गिलास को ही बना लिया पंजा

छुरा (ग्रामीण)9 दिन पहलेलेखक: कुलेश्वर सिन्हा
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ये 11 साल की गीता है। बचपन से ही गीता के दोनों पैरों के पंजे नहीं हैं। बिना पंजों के चलती थी, तो पैरों से खून रिसता था। माता-पिता इस स्थिति में नहीं कि बेटी का कोई इलाज करा सकें। दोनों मजदूर हैं। आखिरकार बेटी ने खुद ही इसका इलाज ढूंढा और अपने पैरों में गिलास लगाकर चलने लगी। गीता रायपुर से 20 किलोमीटर दूर छिदौली कमारपारा में रहती है।

ट्राइसाइकिल मिली, तो दूसरे को दे दी
जनपद पंचायत छुरा ने उसे हाथ से चलाने वाली ट्राइसिकिल दी थी, लेकिन गीता ने उसे गोंदलाबांहरा के एक और जरूरतमंद दिव्यांग को दे दी। फिलहाल गीता बैटरी चलित ट्राइसाइकिल चाहती है। ताकि वह आसानी से पढ़-लिख सके।

चुपचाप करती थी प्रैक्टिस, जब पहली बार दौड़कर आई तो रो पड़े मां-बाप

गीता के पिता देवीराम गोंड और उसकी माता दोनों सुबह से ही मजदूरी करने चले जाते हैं। गीता रोज चुपचाप गिलास में पैर डालकर चलने की प्रैक्टिस करती। एक दिन जब शाम को माता-पिता घर आए, तो वह दौड़कर अपने पिता के गले लग गई। उसके पिता की आंख भर आई और खुशी भी हुई।

इन पैरों से अब सबकुछ...

वो घर का सारा काम इन्हीं पैरों से करती है। झाड़ू लगाना, पोछा लगाना, बर्तन धोने समेत घर के सारे काम करती है। उसका स्कूल तीन किलोमीटर दूर है। वहां पैदल जाती है। गीता इन्हीं की मदद से खेल-कूद भी कर लेती है।

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