मिली सुविधा / दंतेवाड़ा के 10 अस्पतालों में 18 नए डॉक्टर्स नियुक्त, इनमें 5 विशेषज्ञ

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  • नक्सलगढ़ सूरनार व भूसारास के अस्पतालों में भी अब डॉक्टर की कमी

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

दंतेवाड़ा. कोरोनाकाल में दंतेवाड़ा में स्वास्थ्य सुविधाएं और भी ज्यादा मजबूत करने एक बड़ी तैयारी हुई है। कोरोना के बीच डीएमएफ के तहत जिला अस्पताल सहित 10 अस्पतालों में 18 डॉक्टर्स की एक साथ नियुक्ति हुई है। भर्ती की सारी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद शुक्रवार को कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने चयन सूची जारी कर 10 दिनों के अंदर पदभार ग्रहण करने का आदेश जारी कर दिया है। सबसे बड़ी बात ये है कि जिले के धुर नक्सलगढ़ गांव सूरनार, भूसारास, बड़े गुडरा जैसे अस्पताल भी इससे वंचित नहीं रहे हैं। यहां भी लंबे समय से ग्रामीणों की मांग थी। इस नियुक्ति के बाद प्रशासन का दावा है दंतेवाड़ा का ऐसा कोई अस्पताल नहीं है जहां एक भी डॉक्टर न हों। इससे बड़ी बात यह भी है कि इन 18 डॉक्टर्स में 5 विशेषज्ञ व जिला अस्पताल के लिए एक पैथॉलॉजिस्ट भी हैं। विशेषज्ञ डॉक्टर को 2 लाख 20 हजार व मेडिकल ऑफिसर को 1 लाख 20 हजार रुपए मासिक वेतन मिलेगा। यानी इन डॉक्टर्स के लिए साल में करीब साढ़े 3 करोड़ की राशि डीएमएफ से खर्च होगी। 
दरअसल, दंतेवाड़ा के कई अस्पताल डॉक्टर की कमीं से जूझ रहे थे। कोरोना के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने की चुनौती और बढ़ गई थी। ऐसे में कलेक्टर ने डीएमएफ के तहत डॉक्टर्स की नियुक्ति की न केवल पहल की, बल्कि उच्च स्तर से अनुमति लेकर रिक्त पद के लिए विज्ञापन जारी किया और अब दंतेवाड़ा को 18 नए डॉक्टर मिल गए। कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने बताया कि जिले के ब्लॉक के जिन अस्पतालों में डॉक्टर नहीं थे, वहां अब डॉक्टर की नियुक्ति हो गई है। कोरोनाकाल के समय स्वास्थ्य चुनौतियों से लड़ने अब निश्चित ही आसानी होगी। डीएमएफ के तहत सेवा देने वाले पुराने डॉक्टर्स का भी रिन्युअल हो गया है। 
पुराने डॉक्टर्स का भी किया गया रिन्युअल
दंतेवाड़ा के अस्पतालों में सिर्फ नई भर्तियां ही नहीं हुई हैं, बल्कि पूर्व में डीएमएफ के तहत सेवा दे रहे डॉक्टर्स के भी रिन्युअल की प्रक्रिया पूरी हो गई है। कलेक्टर के भेजे गए प्रस्ताव पर प्रभारी मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने इसकी मुहर लगा दी है। जिले में डीएमएफ के तहत 13 विशेषज्ञ डॉक्टर व 12 मेडिकल ऑफिसर सेवा दे रहे हैं। जिन्हें रिन्युअल का इंतजार था। करीब 10 से 12 करोड़ रुपए हर साल डॉक्टर्स के वेतन के लिए खर्च होते हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टर्स की नियुक्ति, नौकरी छोड़ने के बाद जिला अस्पताल में नहीं था पैथॉलॉजिस्ट
जिला अस्पताल को 2 विशेषज्ञ डॉक्टर के साथ एक पैथॉलॉजिस्ट मिले हैं। जिला अस्पताल में नेत्ररोग विशेषज्ञ ज्योतिरानी आचार्य, मनोरोग विशेषज्ञ रामानन्द किशोर कवि व पैथॉलॉजिस्ट डॉ. विकास कैलाशिया की नियुक्ति हुई है। हाल ही में पैथॉलॉजिस्ट के नौकरी छोड़ देने के बाद ये पद खाली पड़ा था। ब्लड बैंक भी बंद पड़ा हुआ है। ऐसे में अब आसानी होगी। इनके अलावा कुआकोंडा सीएचसी में सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. वीएसजीएस कुमार कोराड, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतिमा कोशेवाड़ा व एमसीएच गीदम में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. गिरीश कुमार पैकरा की नियुक्ति हुई है। विशेषज्ञों के नहीं होने से यहां बड़ी समस्या होती थी। 
इन अस्पतालों में भी मिले डॉक्टर
विशेषज्ञ डॉक्टर्स के अलावा पीएचसी फरसपाल, जावंगा, मेटापाल, भूसारास, सूरनार, पालनार, बड़ेगुडरा, सीएचसी कुआकोंडा में 2, किरंदुल में 2 व गीदम एमसीएच में 1 मेडिकल ऑफिसर की नियुक्ति हुई है। 

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