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परेशानी:ऑटो चालकों की किस्त भी माफ करने की मांग

दंतेवाड़ा3 महीने पहले
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जिले में अनलॉक-1.0 में शर्तों के अधीन ऑटो रिक्शा की छूट तो मिल गई है, लेकिन ऑटो संचालकों की मुसीबत अभी कम नहीं हुई है। कोरोना वायरस के कारण मार्च से यात्री बसे बंद हैं। जिले में लगभग 100 लोग ऑटो चलाकर जीवन गुजारा करते हैं। अब इन्हें किस्त नहीं भर पाने से ऑटो के साथ ही रोजी रोटी छिन जाने का भी डर सता रहा है। 
ऑटो संघ के अध्यक्ष सत्या पटेल ने कहा कि यात्री बसों का आवागमन होने से ही सवारियां मिलती हैं। अभी सिर्फ बाज़ार के दिनों में ही सवारी मिल रही है। बाकी दिन कई ऑटो चालकों की बोहनी तक नहीं होती। कम सवारी बैठाने का नियम है और हम घाटे में ही चल रहे हैं। कइयों ने अब तक अपनी किश्तें तक नहीं भरी हैं। भुखमरी तक की स्थिति आ गई है। सरकार से मांग है कि जिस तरह किसानों की कर्ज माफी कर बैंक को सरकार ने वित्तीय मदद दी है उसी तर्ज पर ऑटो चालकों की किस्त की रकम भी बैंक में जमा कर इतनी मदद तो करनी ही चाहिए। संघ के लोगों ने कहा कि जगदलपुर सहित अन्य शहरों में दो से अधिक सवारी बैठाई जा रही है। यहां भी छूट मिलनी चाहिए। नियमों का पालन करने हम तैयार हैं। सालभर के अंदर ऑटो वालों की बढ़ी संख्या
दंतेवाड़ा में सालभर के अंदर ऑटो रिक्शा की संख्या अचानक बढ़ गई। पहले इक्का- दुक्का ऑटो ही यहां देखने को मिलते थे। हालांकि अभी यात्री बसें नहीं चलने से ऑटो रिक्शा लोगों को राहत तो दे रहे हैं,लेकिन नियमों में कसावट से मुसीबत बढ़ी हुई है। 
किराया बढ़ाया तो लोग अब दूरी बना रहे 
दंतेवाड़ा में अभी ऑटो सवारी से ज़्यादा सामानों को ढो रहे हैं। सवारी कम बैठाने की इजाजत मिली भी है तो इन्होंने प्रति सवारी किराया बढ़ाकर 20- 50 रुपए कर दिया है। ऐसे में लोग इससे भी दूरी बना रहे हैं।

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