हाल- ए- जिला अस्पताल:3 घंटे तक जिला अस्पताल में दर्द से तड़पती रही दिव्यांग गर्भवती महिला, डॉक्टर पहुंची और परिजनों को फटकार लगाते कहा- जगदलपुर ले जाओ, नहीं करूंगी इलाज

दंतेवाड़ाएक वर्ष पहले
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3 घंटे तक जिला अस्पताल में दर्द से दिव्यांग गर्भवती महिला तड़पती रही। - Dainik Bhaskar
3 घंटे तक जिला अस्पताल में दर्द से दिव्यांग गर्भवती महिला तड़पती रही।

दंतेवाड़ा जिला अस्पताल के प्रसूति वार्ड की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। यहां सबसे ज्यादा परेशानी रात के वक्त प्रसूताओं को होती है। शुक्रवार की रात एक बार फिर अस्पताल में बवाल हो गया। यहां दर्द से कराह रही दिव्यांग गर्भवती चेतना जैन को लाया गया। स्टाफ ने भर्ती तो कर लिया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि 3 घंटे बाद पहुंची डॉक्टर ने इलाज से इंकार कर दिया। रेफर पर्ची बनाई और दबाव डालकर दस्तखत करवाया। रातभर गर्भवती महिला व परिजनों को परेशान होना पड़ गया।

यह पहला मामला नहीं है जब प्रसूता को इस तरह परेशान होना पड़ा है। इसके पहले भी इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं।
यह पहला मामला नहीं है जब प्रसूता को इस तरह परेशान होना पड़ा है। इसके पहले भी इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं।

वहीं महिला के पति राजकुमार ने बताया कि पत्नी की डिलीवरी का समय 10 जुलाई को डॉक्टर ने दिया था। लेकिन 9 जुलाई की रात को प्रसव पीड़ा होने लगी तो तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टर नहीं थे, लेकिन स्टाफ ने भर्ती कर लिया था। कई बार बुलाने के 2-3 घंटे बाद डॉक्टर पहुंची। पहले तो सभी के प्रति नाराज हुईं फिर बोली ऑपरेशन सुबह होगा। राजकुमार ने बताया हमने डॉक्टर से बहुत निवेदन किया, लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनीं, विवाद पर उतारू हो गई।

रेफर पर्ची में जबरन कराया दस्तखत

परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने उनसे कहा मैं जिम्मेदारी नहीं ले सकती, गर्भवती को जगदलपुर ले जाओ। रेफर पर्ची बनवाई व जबरन दस्तखत कराया। हमें बहुत परेशान होना पड़ गया। डिलीवरी में देर हुई, बच्चा अभी डॉक्टर्स की निगरानी में है। मैं दृष्टिबाधित हूं और पत्नी अस्थिबाधित है। पूरे मामले की शिकायत मैंने 104 नम्बर पर कॉल कर दी है। अधिकारियों को भी लिखित में शिकायत करूंगा।

मैंने उनसे किसी तरह का विवाद नहीं किया। आरोप गलत हैं। बल्कि वे ही मुझसे बहस करने लगे थे। पेशेंट गीदम के हैं और गीदम के लोग हमेशा ऐसा करते हैं। गर्भवती महिला को रात 1 से 1:30 बजे के बीच अस्पताल लाया गया था। मेरा घर चितालंका में है। वहां से आने में थोड़ा वक्त लग जाता है। मैं आधे घंटे के अंदर अस्पताल पहुंच गई थी।

डॉ निधि मेश्राम, गायनेकोलॉजिस्ट

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