कलेक्टर की अपील का असर / पांच दिन बाद दो लाख के ईनामी नक्सली ने किया सरेंडर, कलेक्टर व एसपी ने 10 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी

In Chikpal, the Collector had appealed to return to the mainstream after five days, the prize of two lakh came and surrendered.
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In Chikpal, the Collector had appealed to return to the mainstream after five days, the prize of two lakh came and surrendered.

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 06:18 AM IST

दंतेवाड़ा. कटेकल्याण थाने के जिस धुर नक्सलगढ़ गांव चिकपाल में 5 दिन पहले कलेक्टर दीपक सोनी पहली बार पहुंचे थे। यहां ग्रामीणों की मांग पर तुरंत विकास कामों को स्वीकृत किया और आह्वान किया कि जो भी युवा मुख्यधारा से भटक चुके हैं, वे लौट आएं। रोजगार दिया जाएगा, गांवों का विकास होगा। इसके ठीक 5 दिन बाद ही 2 लाख का इनामी नक्सली 22 साल का भीमा मरकाम सरेंडर करने खुद कलेक्टर के पास पहुंच गया। भीमा के दंतेवाड़ा पहुंचते ही खुद अफ़सर अचंभित रह गए। अब तक पुलिस के सामने नक्सली सरेंडर करते आए हैं, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ कि किसी नक्सली ने कलेक्टर के सामने आकर सरेंडर किया है। सरेंडर के बाद उसने यह भी कहा कि वह पुलिस में काम नहीं करना चाहता, बल्कि गांव में ही रहकर काम करेगा। कलेक्टर ने भरोसा दिलाया कि उसे रोजगार मूलक कामों से जरूर जोड़ा जाएगा। कलेक्टर व एसपी ने 10 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी। जिला पंचायत सीईओ अश्वनी देवांगन, एएसपी राजेन्द्र जायसवाल भी मौजूद थे। 

‘लोन वर्राटू’ अभियान का पहला सरेंडर नक्सली भीमा
हाल ही में पुलिस ने ‘लोन वर्राटू’ यानी घर लौट आओ अभियान की शुरुआत की है। ये पहला गांव है जहां के 13 इनामी नक्सलियों की सूची चस्पा की गई। अभियान शुरू होने के बाद पहला इनामी भीमा का सरेंडर हुआ। एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव ने कहा अभी और भी सरेंडर होंगे। गांववार बनी इनामी नक्सलियों की सूची बांटी जा रही है। चिकपाल में नंवबर 2019 को कैंप खुला था अब तक 7 सरेंडर कर चुके हैं।
15 साल का था तब से जुड़ा था, थ्री-नॉट थ्री लेकर चलता था
मैं 15 साल की उम्र में नक्सल संगठन से जुड़ा था। नीलावाया में दूरदर्शन की टीम पर हमला करने, पिटेडब्बा सहित अन्य घटनाओं में शामिल रहा है। इलाके के बड़े नक्सली देवा, विनोद, चैतू सभी को जानता है। थ्री-नॉट-थ्री अपने साथ लेकर चलता था। फरवरी में घर आया। चिकपाल में कैंप है, अब यहां पुलिस ने इनामी नक्सलियों की सूची चस्पा कर दी है। नाम देखकर अब ग्रामीण दबाव बनाने लगे, पुलिस से डरकर जंगल में सोने लगा। नक्सल मामले में आजीवन जेल गए गांव के व्यक्ति ने समझाया और मैं तुरंत कलेक्टर के पास पहुंच गया। भीमा ने बताया कलेक्टर के गांव पहुंचने की जानकारी मिली थी। गांव में विकास हो रहा है , सभी बहुत खुश हैं।’    
-जैसा कि सरेंडर नक्सली भीमा ने बताया

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