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ऐसा पहली बार:नक्सलगढ़ की पद्मा-पियूषा के डॉक्टर बनने का सपना होगा पूरा

दंतेवाड़ा2 महीने पहले
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  • प्राइवेट कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए अब आदिवासी बेटियों का खर्च उठाएगी भूपेश सरकार

नक्सलगढ़ गांव बोरजे की पद्मा मडे और बड़े पनेड़ा की बेटी पियूषा के डॉक्टर बनने का सपना अब अधूरा नहीं रहेगा। नीट क्वालीफाई करने के बाद रजिस्ट्रेशन नहीं होने के कारण काउंसिलिंग से वंचित रहने वाली इन छात्राओं के एमबीबीएस की पढ़ाई का पूरा खर्च अब भूपेश सरकार उठाएगी। इस पढ़ाई के लिए प्राइवेट कॉलेज में दाखिला दिलाया जाएगा और पूरे 5 साल की इस पढ़ाई के लिए इन दोनों बेटियों के लिए करीब 1 करोड़ से ज़्यादा का खर्च सरकार खुद करेगी। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद प्रदेश में पहली बार ऐसा होगा जब प्राइवेट कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए छात्राओं का खर्च सरकार खुद उठा रही है। इसकी घोषणा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कर दी है। छात्राओं के कांउसिलिंग से वंचित रहने की खबर मिलने के बाद सीएम लगातार इसकी मॉनिटरिंग कर रहे थे। मंगलवार शाम सीएम ने दंतेवाड़ा कलेक्टर दीपक सोनी से चर्चा की और तुरंत निष्कर्ष निकाला कि बच्चों के भविष्य को किसी कीमत पर बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। सीएम की इस घोषणा के बाद दंतेवाड़ा प्रशासन ने प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इस खबर के बाद सभी बेहद खुश हैं। सर्व आदिवासी समाज के लोग भी दंतेवाड़ा कलेक्टर दीपक सोनी से मिलने मिठाई लेकर पहुंचे। सरकार के इस फैसले के लिए समाज के लोगों ने शासन-प्रशासन को धन्यवाद दिया।

पिता बनना चाहते थे डॉक्टर, अब बेटी बढ़ी आगे
बड़े पनेड़ा की पियूषा के पिता मड्डाराम और परिवार बेहद खुश हैं। खेती-किसानी का काम करने वाले मड्डाराम ने बताया उन्होंने खुद 12वीं तक विज्ञान लेकर इसलिए पढ़ाई की थी कि सपना डॉक्टर बनने का था। आर्थिक तंगी के अभाव में यह नहीं कर सका। बेटी को जब अपने इस सपने के बारे में बताया तो उसने तय किया कि वह डॉक्टर बनकर इस सपने को पूरा करेगी। पियूषा ने कहा कि नीट क्वालीफाई करने के बाद जब रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ तो उम्मीद टूटने लगी थी, लेकिन सरकार ने हमारी पढ़ाई का ख़र्च उठाया है, इसके लिए धन्यवाद देते हैं।

मां की मौत के 15 दिन बाद परीक्षा थी, नहीं हारी हिम्मत
नक्सलगढ़ बोरजे गांव के पद्मा के पिता की मौत 2010 को हुई। नीट परीक्षा के 15 दिन पहले पद्मा की मां की मौत हुई। तब भी हिम्मत नहीं हारी। लॉक डाउन के बीच बिना नेटवर्क वाले गांव में रहकर पढ़ाई की और क्वालीफाई हुईँ। पद्मा ने कहा कि चूक के कारण रजिस्ट्रेशन ज़रूर नहीं हुआ है। लेकिन सरकार ने हमारे लिए इतना बड़ा कदम उठाया। सीएम भूपेश बघेल व कलेक्टर दीपक सोनी को धन्यवाद।

जो बच्चे पात्र होंगे सभी के लिए लागू होगा नियम
कलेक्टर दीपक सोनी ने कहा कि इन दो छात्राओं के अलावा भी कट-ऑफ के मुताबिक जो बच्चे पात्र होंगे उनके लिए भी यही नियम लागू होगा। शासन प्रशासन बच्चों की पढ़ाई के लिए हर संभव मदद के लिए तैयार है। इधर विधायक देवती कर्मा ने भी इस फैसले के लिए सीएम को धन्यवाद दिया।
काउंसलर को नौकरी से हटाया: इस फैसले से पहले कलेक्टर दीपक सोनी ने नीट क्वालीफाई करने वाले सभी बच्चों व उनके परिजनों के साथ बैठक रखी। लापरवाही पर तुरन्त काउंसलर को नौकरी से हटाने की कार्रवाई हुई।

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