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  • Where Till Now Not A Single Villager Has Become Corona Infected, Due To The Awareness About The Epidemic Of The Villagers Of These Naxalgarh, Neither Went Out Of The Village Nor Allowed Anyone To Come Inside

कोरोना के कहर में मिसाल बने 16 गांव:बस्तर के इन गांवों में दोनों लहर में एक भी ग्रामीण नहीं हुआ संक्रमित, बहुत जरूरी होने पर ही गांव छोड़ते हैं लोग, लौटकर होते हैं आइसोलेट

दंतेवाड़ाएक महीने पहले
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इन 16 गांवों के करीब 10000 की आबादी को कोरोना की पहली और दूसरी लहर छू ही नहीं पाई। - Dainik Bhaskar
इन 16 गांवों के करीब 10000 की आबादी को कोरोना की पहली और दूसरी लहर छू ही नहीं पाई।

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के गांव कुहचेपाल, जियाकोडता, किडरीरास, गादम, मुलेर ये सब ऐसे गांव हैं जो नक्सल प्रभावित हैं। नक्सल खौफ है, नेटवर्क, सड़क , बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं, लेकिन महामारी से बचने के लिए यहां की आबादी जागरूक जरूर है। देश में कोरोना की पहली और दूसरी लहर ने जब तबाही मचानी शुरू की, जिले के इन 16 गांवों के लोग महामारी से खुद को बचाने जागरूक हुए। नतीजा रहा कि इन 16 गांवों के करीब 10 हजार की आबादी को कोरोना की पहली और दूसरी लहर छू तक नहीं पाई।

जानिए ये हैं 16 गांव

कुहचेपाल, वासनपुर, जारम, फूंडरी, फसरमदुर, कीडरीरास, प्रतापगिरी, नडेनार, छोटे गादम, बड़े गादम, मुनगा, कोडरीपाल, जियाकोरता, कुटरेम, मुलेर व तनेली हैं। जो विकास से आज भी कोसो दूर हैं। इन सभी गांवों तक पहुंचना आसान नहीं है। फिर भी इन गांव के ग्रामीणों ने जागरूकता की बड़ी मिसाल पेश की है।

बाहरियों का पहुंचना मुश्किल तब भी लॉक व जुर्माना तय

पहली और दूसरी लहर में ग्रामीणों ने खुद ही अपने गांव को किया था लॉक। (फाइल फोटो)
पहली और दूसरी लहर में ग्रामीणों ने खुद ही अपने गांव को किया था लॉक। (फाइल फोटो)

कोरोना महामारी के फैलने की खबर मिलते ही ग्रामीण सबसे ज्यादा अलर्ट हुए। नक्सल खौफ व खराब रास्तों के कारण इन गांवों तक पहुंचना बाहरियों का बहुत ही मुश्किल है। तब भी ग्रामीणों ने गांवों को लॉक किया व जुर्माना भी तय किया। ग्रामीणों ने बताया कि पहली लहर में बहुत परेशानी झेली थी, इसलिए दूसरी लहर की खबर मिलते ही हम सावधान हो गए। बहुत ज्यादा जरूरत पड़ने पर ही गांव के बाहर गए। जो बाहर जाते हैं लौटकर आते हैं तो एक सप्ताह के लिए आइसोलेट किया जाता है।

प्रशासन ने गोंडी- हल्बी बोली में हर गांव तक पहुंचाया संदेश

दंतेवाड़ा जिला प्रशासन की रणनीति भी ग्रामीणों के काम आई। कोरोना महामारी से जुड़ी सभी जानकारियों को जिला के हर गांव के ग्रामीण तक पहुंचाने गोंडी व हल्बी बोली का सहारा लिया गया। संदेश बनवाकर गांव- गांव तक पहुंचाया। प्रशासन ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में कोरोना जागरूकता दल का गठन किया। कोरोना दवा किट बांटे व लक्षण मिलते ही दवा खाने की सलाह दी गई। हर 15 दिनों में पंचायत, सरपंच और कोरोना जागरूकता टीमों के साथ समीक्षा बैठक की।

न खुद गांव से बाहर निकले और न ही किसी बाहरी को गांव के अंदर आने दिए। (फाइल फोटो)
न खुद गांव से बाहर निकले और न ही किसी बाहरी को गांव के अंदर आने दिए। (फाइल फोटो)

टीकाकरण पर भी दिया गया जोर

प्रशासन ने पहले नेताओं का टीकाकरण कराया ताकि वे दूसरों के लिए रोल मॉडल बन सकें। साथ ही गांव के गायता, गुनिया, पुजारी आदि का भी टीकाकरण कराया गया,जिससे ग्रामीण भी जागरूक हुए। जिले में अब तक 95,000 से अधिक वैक्सीन खुराकें दी जा चुकी हैं और जिले के लगभग 80 प्रतिशत गांवों ने 25 दिनों में अपना 45 से अधिक श्रेणी का लक्ष्य हासिल कर लिया है।

हमने नियम बताए, ग्रामीणों ने पालन किया

कलेक्टर दीपक सोनी ने बताया कि कोरोना की दोनों लहरों में जिले के 16 गांव के ग्रामीण सुरक्षित रहे। इन गांवों में एक भी ग्रामीण संक्रमित नहीं हुआ। हमने पहले ही कई रणनीतियां बनाई। स्थानीय बोलियों में ग्रामीणों तक संदेश पहुंचाया। ग्रामीण भी जागरूक रहे और हर नियमों का पालन किया। यह गांव लोगों को प्रेरणा देंगे।

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