मुख्यमंत्री ने दी इंद्रावती नदी पर पुल की सौगात:पूर्व सरपंच पोसेराम के नाम से होगा पुल; कहा- नक्सल क्षेत्र में यह विकास का द्वार

दंतेवाड़ा5 महीने पहले

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मंगलवार को दंतेवाड़ा पहुंच गए हैं। वह वहां पर छिंदनार- पाहुरनार घाट पर बहुप्रतीक्षित इंद्रावती नदी पर बने पुल का उद्घाटन करेंगे। इससे पहले सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि इस गांव में पहली बार कोई मुख्यमंत्री आया है। उन्होंने कहा कि यह कोई साधारण पुल नहीं है। यह दंतेवाड़ा-बीजापुर-नारायणपुर को जोड़ने वाला है। यह पुल सिर्फ 10 गांवों को ही जोड़ने वाला नहीं है, बल्कि पूरे बस्तर को अबूझमाड़ से जोड़ने वााला है।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि इसका फायदा न सिर्फ स्कूल जाने वाले बच्चों को मिलेगा। बल्कि बारिश में जान खतरे में डाल डोंगी से नदी पार करने वाले ग्रामीणों को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि डायल-112, एंबुलेंस 108 की सेवा आपके गांव तक पहुंचेगी। यह पुल सही मायने में विकास का द्वार है।

ड्रोन से लिया गया इंद्रावती नदी पर बने पुल का फोटो।
ड्रोन से लिया गया इंद्रावती नदी पर बने पुल का फोटो।

दंतेवाड़ा में ज्योति कलश स्थापित होगा
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि पुल को बनाने में बहुत सारे जवानों और ग्रामीणों ने अपनी शहदात दी है। मुख्यमंत्री बघेल ने इसके साथ ही पुल का नाम पाहुरनार के पूर्व सरपंच पोसेराम के नाम से करने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने कहा कि दंतेश्वर मंदिर का भी रायपुर के कौशल्या मंदिर की तर्ज पर विकास होगा और वहां ज्योति कलश स्थापित किया जाएगा।

पहली बार होगा जब प्रदेश के मुख्यमंत्री इंद्रावती नदी पार अबूझमाड़ के धुर नक्सल प्रभावित गांवों के ग्रामीणों से सीधे रुबरु भी होंगे। छिंदनार में पुल का उद्घाटन करने के बाद मुख्यमंत्री जगदलपुर के लिए रवाना होंगे। जगदलपुर वासियों को भी करोड़ों रुपए के विकास कार्यों की सौगात देंगे।

इंद्रावती नदी पार का पूरा इलाका नक्सलगढ़ है। ऐसे में सुरक्षा को लेकर भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इंद्रावती नदी पर बने जिस पुल का CM उद्घाटन करेंगे इस पुल को बनाने की राह जरा भी आसान नहीं थी। नक्सलियों ने ग्रामीणों को प्रताड़ित किया। उनकी कई बार पिटाई की। कई ग्रामीण गांव छोड़ने मजबूर हुए। पाहुरनार के सरपंच पोसेराम की हत्या तक कर दी। सुरक्षा में तैनात जवानों पर IED ब्लास्ट किया जिससे 1 जवान शहीद भी हुआ। वहीं इस पुल के बनने के बाद अब अबुझमाड़ के ग्रामीण सीधे जिला मुख्यालय से जुड़ गए हैं।

बारिश के दिनों में ग्रामीण पुल से ही नदी पार कर सकेंगे। उन्हें डोंगी से नदी पार नहीं करना पड़ेगा।
बारिश के दिनों में ग्रामीण पुल से ही नदी पार कर सकेंगे। उन्हें डोंगी से नदी पार नहीं करना पड़ेगा।

ग्रामीणों की मांग- मृत सरपंच पोसेराम के नाम पर हो पुल
इधर, इंद्रावती नदी पार के ग्रामीणों ने मांग की है कि पाहुरनार के पूर्व सरपंच पोसेराम के नाम पर यह पुल होना चाहिए। इस पुल निर्माण के लिए पोसेराम ने अपनी जान दी है। पोसेराम नदी पार के गांवों में विकास के पक्षधर थे। पुल की मांग सरकार से की थी। नक्सलियों को जब इसकी जानकारी मिली तो नक्सलियों ने उन्हें खूब प्रताड़ित किया और आखिरकार साल 2018 में उनकी हत्या कर दी। नक्सलियों ने उनके परिवार को प्रताड़ित किया। बेटे की जान के दुश्मन बने और अंततः नक्सलियों के भय से परिवार गांव छोड़ने मजबूर हुआ।

यह भी जानिए
बस्तर की जीवनदायिनी कही जाने वाली इंद्रावती नदी बारिश के दिनों में किसी बड़े अभिशाप से कम नहीं है। बस्तर के 30 से ज्यादा नदी घाटों में डोंगी पलटने से हर साल बारिश में ही औसतन 15 से ज्यादा मौतें होती हैं। बस्तर के 2 जिलों के नदी पार बसे 100 से ज्यादा माड़ के गांवों को राहत देने दो जिलों में करोड़ों रुपए की लागत से 4 पुल का निर्माण हो रहा है। जिसमें छिंदनार-पाहुरनार घाट पर पुल का काम पूरा हो गया है।

ये पूरा इलाका नक्सलियों के कब्जे में है। वजह यही है कि यहां सरकार की योजनाएं पहुंचाने में प्रशासन के भी पसीने छूटते हैं। बाजार, अस्पताल, राशन लेने, स्कूल जाने नदी पार करने बड़ी आबादी डोंगी से उफनती इंद्रावती को पार करती हैं। हालांकि, पुल बनने से अब राहत है।

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