अंतिम संस्कार की मदद से पीछे हट रहे अपने भी:कोरोना एक दर्द अनेक; कांडेकेला में कोरोना मृतक के शव को छूने से परिजनों और पड़ोसियों ने किया इंकार

पुरुषोत्तम पात्र| देवभोग5 महीने पहले
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दोपहर 2 बजे बाद शव का स्वास्थ्य अमले ने अंतिम संस्कार किया। - Dainik Bhaskar
दोपहर 2 बजे बाद शव का स्वास्थ्य अमले ने अंतिम संस्कार किया।

डॉक्टर की मिन्नत के बाद भी कोरोना मृतक के अंतिम संस्कार में परिवार व पड़ोसी तक ने साथ नहीं दिया। बुधवार को देवभोग के सफाई कर्मियों व शव वाहन चालक की मदद से करीब 6 घंटे बाद कांडेकेला में संक्रमित मृतक का कोरोना प्रोटोकॉल से अंतिम संस्कार हेल्थ अमले ने करवाया।

कोरोना ने दूसरी लहर में ग्रामीण इलाकों को भी चपेट में ले लिया है। जिले या बड़ी जगहों पर किसी संक्रमित की मौत हुई तो कई समाजसेवी संगठन अंतिम संस्कार के लिए सामने आ रहे हैं लेकिन गाव में मौत हुई तो पड़ोसी व रिश्तेदार तक दूरी बना लेते हैं। ऐसा ही मामला बुधवार को अमलीपदर क्षेत्र के कांडेकेला में सामने आया। 45 वर्षीय पूरन 30 अप्रैल को पॉजिटिव हो गए।कांटेक्ट ट्रेसिंग के बाद 1 मई को पत्नी, दो बच्चे व पिता भी पॉजिटिव हो गए। सभी होम आइसोलेशन में थे। 4 मई की रात 10 बजे सांस लेने में तकलीफ हुई तो उरमाल अस्पताल प्रभारी सनत कुंभकार 108 लेकर गांव पहुंचे, देर रात 11 बजे घर पर ही डॉ. ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

डॉ. कुंभकार की नसीहत- घटना से सबक जरूर लें
डॉ. कुंभकार व मौजूद स्टाफ ने नसीहत भी दी कि ऐसा दिन न आए इसलिए जांच के लिए सामने आएं, टीका भी लगवाएं, प्रोटोकाल का पालन करें। उन्हें यह तक कहना पड़ा कि इस घटना से सबक लेने की जरूरत है।

चिता की लकड़ी भी ससुराल वालों ने 4 किमी दूर से भेजी
डॉ. कुंभकार के मुताबिक अगली सुबह 5 मई को वे 8 बजे से अपने अन्य 2 स्टाफ के साथ तय प्रोटोकॉल का तहत अंतिम संस्कार कराने गांव पहुंचे। पटवारी व सरपंच भी साथ थे पर परिवार या पड़ोस से कोई सामने नहीं आया। मृतक बहुत वजनी थे, कम से कम 8 लोगों की मदद लगती, किट व ग्लव्स सब कुछ था पर लोग तैयार नहीं हुए। आखिर देवभोग की डॉ. अंजू सोनवानी को फोन कर स्टाफ के 3 स्वीपर व शव वाहन चालक की मदद से डेढ़ बजे तक शव को कव्हर कर अंतिम संस्कार किया गया। यहां तक कि चिता के लिए 4 किमी दूर मृतक के ससुराल अमलीपदर से लकड़ी भेजी गई।

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