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पैर लाचार हैं पर हाथों ने जिंदगी थाम रखी:गरीबी और दर्द ने देबकी के यहां बसाया घर, खाना तो दूर पीने के पानी तक को मोहताज

देवभोगएक महीने पहले
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बूढ़े पिता को नहलाने के बाद खाने की तैयारी में जुट जाती है देबकी। - Dainik Bhaskar
बूढ़े पिता को नहलाने के बाद खाने की तैयारी में जुट जाती है देबकी।
  • 2020 से पिता अशक्त, मां भी चल बसी, सदमे में 20 साल की देबकी के दोनों पैर शून्य हो गए, मदद के हाथों से बस जीने के लिए जी रहे हैं पिता-पुत्री

दर्द के साथ दवा का इंतजाम न हो तो जिजीविषा के धनी लोग दर्द से दोस्ती और हालातों से समझौता कर जीने का रास्ता निकाल लेते हैं। छुरा की गीता के बाद देवभोग की 20 साल की जवान बेटी देबकी का भी इसी तरह का वाकया सामने आया है। फोकटपारा की देबकी के कमर के नीचे का हिस्सा काम नहीं करता। उपर से बीमार पिता की देखभाल का भी जिम्मा है। घर की बाड़ी तक शौच जाने की ताकत भी दोनों के शरीर में नहीं है।

पड़ोसियों की मदद से किसी तरह बाड़ी तक जाते हैं। घर की देहरी पर ही वह पिता को नहलाती है और 6 बाई 8 के छोटे कमरे में किसी तरह खाट की आड़ लेकर खुद भी किसी तरह नहा लेती है। पानी की मदद पंच व लोग कर देते हैं। किसी ने खाना दिया तो ठीक नहीं तो भूख सहने की आदत हो गई है। पिछले दिनों घर के पास ही कोरोना क्वारेंटाइन सेंटर से खाना मिल जाता था लेकिन सेंटर बंद होते ही वह भी बंद हो गया। सप्ताह भर पहले कुछ समाजसेवियों को पता चला तो राशन, कपड़ा व अन्य जरूरी सामान घरों तक पहुंचा दिया पर इसके खत्म होते ही फिर भूख मुंह बाएं खड़ी होगी।

पैर लाचार हैं पर हाथों ने जिंदगी थाम रखी है।
पैर लाचार हैं पर हाथों ने जिंदगी थाम रखी है।

7 माह की पेंशन और 2 माह का राशन तक नहीं उठा सकी
7 माह पहले तक जब वह चल फिर पा रही थी तो बैंक तक जाकर पिता की पेंशन ले आती थी लेकिन विगत 7 माह से खाते से पैसे नहीं निकाल पाई है। मई व जून का राशन भी नहीं ला सकी है। इसके पहले का राशन पारस प्रधान की मदद से घर तक पहुंच गया था।

पीड़िता पर हादसे मानो पहाड़ बनकर टूटे
वाकया दर वाकया का शिकार होती गई देबकी। अप्रैल 2020 में मजदूर पिता बीमार पड़ गए। सरकारी राशन, पिता की 350 रुपए पेंशन व मां बेटी की मजदूरी से किसी तरह दिन गुजर रहे थे कि जुलाई 2020 में मां भी चल बसी। मां की मौत का सदमा ऐसा गहरा लगा कि देबकी का मानसिक संतुलन बिगड़ने लगा। घर के बाजू की जमीन का टुकड़ा बेचकर इलाज भी कराया। इस बीच दोनों पैरों की शक्ति अचानक जाती रही। देबकी अब सहारे की मोहताज है। उसे किसी तरह इतना याद है कि पिता की सेवा करनी है।

अफसरों ने हरसंभव मदद का आश्वासन दिया
मामले में बीएमओ अंजू सोनवानी ने कहा कि टीम भेजकर दोनों की प्राथमिक जांच कराई जाएगी। जितना यहां संभव है, उतना उपचार कराया जाएगा, बाकी के उपचार के लिए हायर सेंटर भेजेंगे। जनपद सीईओ एमएल मंडावी ने कहा कि पूरी पड़ताल कर सभी सरकारी मदद पहुंचाई जाएगी।

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