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कारगर तरीका:18वीं शताब्दी में पूर्वजों की दूरदर्शिता से आज खुशहाल है सिनापाली गांव

देवभोग20 दिन पहले
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  • 200 साल पुराने 6 तालाबों में सालभर रहता है पानी, इसलिए कभी निस्तारी व पेयजल का संकट नहीं आया, 40 परिवार कर रहे सब्जी की खेती

सिनापाली में 18वीं सदी में पूर्वजों की वाटर मैनेजमेंट आज भी कारगर साबित हो रहा। निस्तारी के साथ-साथ अब गांव के 40 परिवार 50 हेक्टयेर में सब्जी की खेती कर अच्छी आमदनी ले रहे हैं। 4 हजार से ज्यादा आबादी वाले ब्लॉक के सबसे बड़े गांव सिनापाली में लोगों को कभी भी जलसंकट का सामना नहीं करना पड़ा।

ऐसा इसलिए क्योंकि यहां सर्वाधिक 11 छोटे-बड़े तालाब हैं। हालांकि मार्च के बाद 5 छोटे तालाब के पानी सूख गए हैं, लेकिन 12 एकड़ में फैला दियान तालाब, 8 एकड़ में फैला ऊपर तालाब, 2-2 एकड़ में फैले गोहटिया तालाब, ढाई एकड़ के साहू तालाब व लगभग डेढ़ एकड़ में फैले कोदो तालाब में गर्मीभर निस्तारी के लायक पानी रहता है। भरे हुए इस तालाब के कारण गांव का जल स्तर बारहों माह ठीक रहता है। इसके चलते यहां के 40 परिवार सब्जी की खेती कर रहे। पेयजल के लिए गांव में 25 हैंडपंप भी हैं। सर्वसुविधा वाले सिनापाली में बसते गए लोग, बन गया बड़ा गांव: पूर्वजों के वाटर मैनेजमेंट इलाके में अद्वितीय था। उस जमाने में निस्तारी व पेयजल सबसे प्रमुख सुविधा माना जाता था। ये दोनों चीज यहां मौजूद था, लिहाजा सभी समाज वर्ग के लोगों की बसाहट सिनापाली गांव में हुई। यह ग्राम आज ब्लॉक का सबसे बड़ा गांव बन गया।

मालगुजार के हैं 3 तालाब
भरपूर पानी रहने वाले सभी तालाब 150 से 200 साल पुराना है। गांव के 90 वर्षीय पटेल रोहित मांझी बताते हैं उनके दादा मोहन सिंह उन्हें बताया था कि परदादा गरुण सिंह 1830 के आसपास गांव के मालगुजार थे। उस समय गांव की आबादी 500 नहीं थी, लेकिन दादा ने गांव में 8 एकड़ में तालाब खुदवा दिया। इस निस्तारी तालाब के नीचे दल दल बनता था इसलिए निचले हिस्से के 2-2 एकड़ में दो और तालाब बना दिया, जिसमें से एक को पीने के पानी के लिए सुरक्षित रखा गया था। इस तालाब का पानी आसपास के 4, 5 गांव के लोग भी पीने के उपयोग में लाते थे।

दीवान व मकड़दम ने खुदवाया एक-एक तालाब
जमीदारी प्रथा में गांव में मालगुजार के अलावा दीवान व मकड़दम का भी पद हुआ करता था। मालगुजार के तालाब खुदाई से प्रेरित होकर गांव के दीवान गंगाराम मांझी व मकड़दम जो साहू परिवार से थे उन्होंने तालाब खुदवा दिया। 19वीं सदी से पहले दीवान ने सबसे बड़ा तालाब 12 एकड़ में खुदवाया। मकड़दम सोनाधर साहू के पिता ने 6 एकड़ में तालाब खुदवाया। इसके बाद माली समाज के गौटिया ने भी एक तालाब खुदवाई। इन तालाबों में सालभर पानी रहता है। आजादी के पहले तक इस गांव में 6 तालाब खुद गया था।

सब्जी की खेती के साथ रोजगार का भी जरिया बना तालाब
पानी की कमी न हो यही सोचा गया था, पर समय के साथ-साथ पूर्वजों के खोदे गए तालाब गांव के लिए रोजगार का साधन बन गया। इस गांव में वर्तमान में 40 परिवार ऐसे हैं, जो 60 हेक्टेयर से भी ज्यादा जमीन पर 12 माह सब्जी की खेती कर रहे। जल स्तर बढ़ा हुआ है इसलिए 20 सोलर वाटर पंप लगाया गया है, जिससे सब्जी की खेती होती है। गांव में दर्जनों छोटे डबरी हैं। अपने निजी संसाधनों से आज पूरा गांव सम्पन्न व खुशहाल है।

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