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अजब कार्यप्रणाली:सालभर में 5 हत्याएं, हर बार 7 नक्सलियों पर केस दर्ज, ये जिंदा हैं या मर गए पुलिस काे भी पता नहीं

धमतरी2 महीने पहले
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ग्रामीण सीताराम नेताम की हत्या के बाद फोर्स ने इलाके में सर्चिंग बढ़ाई है। - Dainik Bhaskar
ग्रामीण सीताराम नेताम की हत्या के बाद फोर्स ने इलाके में सर्चिंग बढ़ाई है।
  • नक्सल क्षेत्र में लगातार कमजाेर हो रही पुलिसिंग, वारदात के बाद हर बार हफ्तेभर चलती हैं सर्चिंग

जिले के वनांचल में नक्सली लगातार हत्याएं कर रहे हैं, पुलिस हर बार 7 नक्सलियों पर नामजद केस कर रही है। यह जिंदा हैं या मर गए यह पुलिस काे भी पता नहीं हैं। यह क्रम 5 साल से चल रहा है। हर बार पुलिस एफआईआर कर भूल जाती है। बीते एक साल में 5 हत्याएं हो चुकी है लेकिन जवाब देने का प्रयास नहीं किया गया। यही कारण है कि पुलिस की पकड़ लगातार ढीली पड़ती जा रही है।

पुलिसिंग काे मजबूत करने लगातार ट्रांसफर, पोस्टिंग हाे रही है। इसका असर नहीं दिख रहा। मुखबिरी शक में नक्सलियों की सीतानदी एरिया कमेटी ने सालभर में 5 ग्रामीणों की हत्या कर दी है। एक दिन पहले आमझर निवासी सीताराम नेताम की हत्या के बाद फिर 7 नक्सलियों के खिलाफ नामजद एफआईआर हो गई है। जिनके नाम एफआईआर में हैं उनकी पुख्ता सूचना पुलिस अफसरों के पास भी नहीं है। इनमें से किन नक्सलियों की मौत हो गई या दूसरे जिलों में सक्रिय है यह कभी पुष्टि नहीं की गई।

नक्सल मामले में हर एफआईआर में ये 5 नाम
जिले में नक्सल संगठन के सीतानदी दलम, गोबरा दलम, मैनपुर डिविजन और रावस कमेटी सक्रिय है। इनमें 25 से 30 लड़ाके हैं। दल ने एक साल में 5 ग्रामीणों को मुखबिरी शक में मारा है। पुलिस नक्सलियों पर नामजद एफआईआर कर रही। इनमें सत्यम गावड़े, टिकेश, दीपक, अजय, प्रमिला, गीता, रीना के नाम हर एफआईआर में शामिल हो रहे है।

सर्चिंग बढ़ाई, फोर्स ने 30 गांवों को घेरा
आमझर निवासी सीताराम नेताम की हत्या के बाद फोर्स ने एक बार फिर सर्चिंग बढ़ाई है। डीआरजी, सीआरपीएफ फोर्स मांदागिरी, खल्लारी, आमाबहार, गादुलबाहरा, आमझर, ठेनही, उजरावन, बिरनासिल्ली, बहीगांव, संदबाहरा, रिसगांव, करही, गाताबाहरा सहित 30 से अधिक गांवों को घेरकर सर्चिंग की जा रही है।

5 महीने पहले समीक्षा हुई, काम नहीं हुआ
गंगरेल के माेटल में 5 महीने पहले नक्सल प्रभावित क्षेत्राें के अफसराें की बैठक हुई थी। इसमें तमिलनाडु में वीरप्पन का सफाया करने वाले सीआरपीएफ के पूर्व डीजी और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार के विजय कुमार ने अफसराें काे नक्सलियों से निपटने के तरीके बताए। लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है।

जानिए... कौन है नक्सली कमांडर सत्यम गावड़े
सत्यम गावड़े मैनपुर-नुआपाड़ा डिविजन कमांडर है। कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा थाना क्षेत्र के ग्राम कुर्सेबोड़ का रहने वाला है। सत्यम 2007-08 से नक्सलियों के साथ काम कर रहा था। बीच में पुलिस ने पकड़कर जेल भेजा, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में छूट गया। इसके बाद उसकी जानकारी पुलिस के पास नहीं है।

2 साल पहले मुठभेड़ में मारे गए थे 4 नक्सली
6 जुलाई 2019 को मांदागिरी व संदबाहरा पहाड़ी पर राजू, मंजूला, मुन्नी, प्रमिला को मुठभेड़ में फोर्स ने मारा था। जिले में नक्सली कमजोर हाे गए। उस समय बालाजी साेमावार एसपी थे। उनके जाने व एसपी बदलने के बाद नक्सलियों के नेटवर्क को तोड़ने का प्रयास नहीं किया। अब नक्सली दोबारा मजबूत होने लगे हैं।

बारिश में जंगल छोड़ देते हैं नक्सली
धमतरी जिले का बोराई क्षेत्र गरियाबंद, ओडिशा, कोंडागांव, कांकेर, बस्तर आने-जाने के लिए कॉरिडोर है। नक्सली यहीं से आते जाते हैं। बस्तर में दबाव बढ़ता हैं, तो वे इसी मार्ग से ओडिशा की ओर जाते हैं। बरसात में नक्सलियों काे जंगल में रहना मुश्किल हाे जाता है। मच्छर, सांप और जहरीले जीवाें का खतरा रहता है। इसलिए नक्सली खुद की जान बचाने बारिश शुरू होते ही जंगल छोड़कर गांवों में मजदूर, किसान बनकर रहते हैं।

12 साल पहले नक्सल जिला बना
2009 में रिसगांव क्षेत्र में नक्सलियों ने पुलिस वाहन समेत बम से उड़ा दिया था, इसमें 11 पुलिसकर्मी, 1 एसपीओ शहीद हुए। 1 सिविलियन की मौत हुई थी। धमतरी नक्सल प्रभावित जिला घोषित हुआ।

खुफिया एजेंसी से मिलती है जानकारी
एसपी बीपी राजभानू ने कहा कि जिले में सीतानदी एरिया कमेटी सक्रिय है। इन्हें सत्यम गावड़े लीड कर रहा है। खुफिया एजेंसियों के माध्यम से इनकी मूवमेंट की जानकारी मिलती रहती है।

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