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विरोध:ठेका प्रथा बंद करने की मांग, आज से बिजली कर्मचारियों का आंदोलन

धमतरी8 महीने पहले
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  • अप्रशिक्षित ठेका कर्मचारियों से करा रहे जोखिम भरे काम

छत्तीसगढ़ बिजली कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध ठेका कर्मचारी का आंदोलन 10 से 16 अक्टूबर तक चलेगा। 15 अक्टूबर को प्रदेश व्यापी आंदोलन होगा। जिला मुख्यालयों में भी प्रदर्शन किया जाएगा। संघ ने निर्णय लेकर 4 चरणों में आंदोलन की रणनीति बनाई है। पहले चरण में 21 व 22 अक्टूबर को प्रदर्शन व जिला प्रशासन को ज्ञापन दिया जाएगा। दूसरे चरण में 29 अक्टूबर को आमसभा प्रदर्शन होगा। तीसरे चरण में 7 नवंबर को एक दिन का उपवास होगा। चौथे व अंतिम चरण में 13 नवंबर दीपावली के पहले अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन पर रहेंगे। जब तक मांग पूरी नहीं होगी काम बंद रखा जाएगा। संघ संरक्षक नरोत्तम धृतलहरे ने बताया कि ठेका कर्मचारी बंद करना जरूरी है। इसमें कर्मचारियों का शोषण हो रहा है। शिकायत के बाद भी ठेकेदार के विरूद्ध कार्रवाई नहीं की जाती है। ठेका प्रथा बंद कर कार्यरत कर्मचारियों को विभाग में समायाेजित किया जाना चाहिए।

22 हजार ठेका कर्मचारी, अब तक सैकड़ों की मौत
संघ में महामंत्री दिनेश साहू ने बताया कि विभाग में नियमित कर्मचारी केवल 10 हजार ही रह गए हैं। प्रदेशभर में बिजली विभाग का काम ठेका कर्मचारियों पर आश्रित हो गया है। ठेका कर्मचारियों को बिजली संबंधित काम के अलावा ऐसे काम भी कराए जा रहे जिसके लिए वह अधिकृत नहीं है। इस कारण प्रदेश में सैकड़ों कर्मचारियों की मौत भी चुकी है, लेकिन किसी प्रकार के बीमा व मुआवजा नहीं मिला है।

न मुआवजा मिलता और न ही अनुकंपा नियुक्ति
अध्यक्ष गुलेन्द्र यादव ने बताया कि बिजली का सुचारू रूप से संचालन के लिए कर्मचारियों को जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ता है। इससे यदि कोई दुर्घटना होती है, तो ठेका कर्मचारियों को किसी भी प्रकार का मुआवजा नहीं मिलता है। न ही अधिकारी आते हैं। दुर्घटना के बाद आश्रित परिवार को भी अनुकंपा नियुक्ति तक नहीं मिलती। 5 अक्टूबर को जांजगीर में ही एक घटना हुई, जिसमें भूपेंद्र पटेल घटना के शिकार हो गए। किसी प्रकार का लाभ नहीं मिला।
कर्मचारियों की ये हैं मांगें
पावर कंपनियों का एकीकरण, निजीकरण पर रोक लगाने, संविदा कर्मचारियों को नियमित करने, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को कैशलैस चिकित्सा सुविधा देने, नियमित, संविदा, ठेका कर्मचारियों का 50 लाख का बीमा समेत अन्य मांगे हैं।

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