अब ठंड की बारी:127 दिन बाद मानसून विदा, सीजन में 41 इंच बारिश जो पिछले साल से 3 इंच कम, चारों बांध 65% ही भरे

धमतरीएक महीने पहले
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  • जून-अगस्त में कम तो जुलाई-सितंबर में सबसे ज्यादा हुई बारिश, अब हफ्तेभर में पड़ने लगेगी ठंड

दक्षिण-पश्चिम मानसून बुधवार देर-रात को विदा हो गया। इसकी पुष्टि मौसम विभाग ने कर दी है। इस बार 9 जून को जिले में आया मानसून 127 दिन यानी 13 अक्टूबर तक रहा। जिले में बारिश के 4 महीने के सीजन में से 54 दिन में 41.43 इंच बारिश हुई है। इस बार कमजोर बारिश के कारण गंगरेल सहित 3 सहायक बांध भी लबालब नहीं हुए। चारों बांध में अभी 65.12% ही जलभराव है।

मानसून के 4 महीने में सितंबर में सबसे ज्यादा 345.5 मिमी बारिश हुई है। अगस्त में सिर्फ 185 मिमी बारिश हुई थी। सितंबर की बारिश ने ही फसलाें व बाधाें की पानी की जरूरत काे पूरा किया है। 2020 में 1 जून से 30 सितंबर तक 1116.2 मिमी यानी 44.64 इंच बारिश हुई थी, जबकि इस साल 1035.8 मिमी यानी 41.43 इंच बारिश दर्ज की गई है। विशेषज्ञों ने बताया कि जून से सितंबर तक होने वाली बारिश दक्षिण-पश्चिम मानसून से हुई थी। बारिश से इस साल गंगरेल और 3 सहायक बांध मुरुमसिल्ली, सोंढूर व दुधावा में 65 % ही पानी भरा।

फसलों के लिए अच्छी मानी जा रही ये बारिश

मानसून निर्धारित समय के 4 दिन पहले 9 जून को ही आ गया था। 1 जून से 13 अक्टूबर तक 1035.8 मिमी बारिश हुई है। यह बारिश फसलों, बांधों और जमीन के जल स्तर के लिए अच्छी मानी जा रही है।

अब आगे क्या... इस साल अच्छी ठंड पड़ेगी क्योंकि इस बार भादों में खूब हुई बारिश

मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा ने बताया कि मौसम की विदाई हो गई है। एक ऊपरी हवा का चक्रवात घेरा पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी और उसके आसपास स्थित है, जो 5.8 किमी ऊंचाई तक है। बंगाल की खाड़ी में सिस्टम सक्रिय है। जिसका असर 2 दिन बाद दिखेगा। 16 से 18 अक्टूबर के बीच बारिश हो सकती है। इस साल अच्छी ठंड पड़ने की संभावना है। क्योंकि भादो में खूब बारिश हुई है।

2015 में हुई थी 867.7 मिमी बारिश

  • मानसून सत्र 2015 में 867.7 मिमी, 2016 में 1162.6 मिमी, 2017 में 840.1 मिमी, 2018 में 1248.4 मिमी, 2019 में 1129.5 मिमी और 2020 में 1116.2 मिमी बारिश हुई थी।
  • पिछले साल की तुलना में इस बार नगरी में 228.8 मिमी, धमतरी में 351 मिमी कम बारिश हुई। मगरलोड में 1036.7 मिमी, भखारा में 1306.2 मिमी और कुकरेल में 1008.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है।
  • आषाढ़ और सावन सूखा बीतने से बांधों के हालत भी बिगड़ गए थे। भादो के अंतिम सप्ताह में 14 सितंबर को हुई भारी बारिश से चारों बांध में पानी की खूब आवक हुई।

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