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कोरोना का असर:6 माह बाद खुली आंगनबाड़ी, पहले दिन 30%बच्चे ही आए, मास्क नहीं लगाए

धमतरी11 दिन पहले
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  • बच्चाें काे आंगनबाड़ी भेजने 60% पालकों ने नहीं दी थी सहमति, पालक बाेले- बच्चों को कोरोना हुआ तो जिम्मेदार कौन

शासन के निर्देश पर बुधवार से आंगनबाड़ियां छह महीने बाद शुरू हुईं। पहले दिन आंगनबाड़ियों में 30 प्रतिशत बच्चे ही आए। वह भी बगैर मास्क लगाकर आए। साथ-साथ खेलते रहे। जानकारी के मुताबिक पालक अपने बच्चों को आंगनबाड़ियों में नहीं भेज रहे हैं।
कार्यकर्ता, सहायिका ने एक दिन पहले सभी बच्चों के पालकों से मिलकर आंगनबाड़ी में गर्म भोजन खिलाने के लिए सहमति मांगी, तब 60 प्रतिशत पालकों ने भेजने से मना कर दिया। कुछ पालकों ने तो कार्यकर्ता को यहां तक पूछ लिया कि यदि बच्चे कोरोना संक्रमित होते हैं ताे इसकी जिम्मेदारी किसकी हाेगी? पालक बच्चों के भाेजन के लिए जोखिम नहीं लेना चाह रहे हैं। कुछ पालकाें ने ताे कार्यकर्ता व सहायिका काे डांट तक दिया। कुछ पालकों ने बच्चों को आंगनबाड़ी में सिर्फ खिलाने के लिए ही क्यों भेजें कहकर लाैटा दिया। केंद्र पहुंचने वाले सभी बच्चे बिना मास्क के आए, जो लगाए थे, उन्होंने भी निकालकर फेंक दिया।
विभाग से मास्क, सैनिटाइजर, साबुन नहीं मिला: सुबह 9.30 बजे आंगनबाड़ी खुल गई। खाना दोपहर 12 बजे तक बन गया, लेकिन बच्चे व महिलाएं नहीं आईं। बच्चों को लाने के लिए घर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका घर बच्चाें के घर गईं ताे दाे चार बच्चे ही साथ में आए। उनके हाथ धोने के लिए साबुन की व्यवस्था कार्यकर्ताओं ने खुद की। विभाग से सैनिटाइजर, मास्क नहीं आया है। कार्यकर्ताओं ने स्वयं सैनिटाइजर खरीदे। कुछ गांवाें में पंचायत द्वारा उपलब्ध कराया गया। ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्राें पर सैनिटाइजर नहीं थे।

रत्नाबांधा में 14 में से 6 बच्चाें ने किया भोजन
ग्राम रत्नाबांधा आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 1 में 14 बच्चे हैं। इनमें से 6 बच्चे ही गर्म भोजन खाने आए। शिशुवती 3 है, जिनमें से एक और गर्भवती 3 में से सिर्फ 1 महिला गर्म भोजन खाने के लिए आई। यहां एक गंभीर और 2 मध्यम कुपोषित बच्चे हैं। एक मध्यम कुपोषित बच्चा ही गर्म भोजन खाने आया था।

17 गर्भवती में से 6 ने ही आने की सहमति दी
लोहरसी के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 3 में 35 बच्चे हैं। कार्यकर्ता, सहायिका द्वारा बुलाने पर 20 बच्चों के पालकों ने नहीं भेजने की बात कही है। 15 बच्चों में से 12 बच्चे ही गर्म भोजन खाने आए। गर्भवती 17 में से 6 ने ही आने की सहमति दी। सहायिका बच्चों को दो शिफ्ट में लाने-ले जाने का काम करतीं रहीं।

मुजगहन: 40 में से 15 बच्चे आए ही नहीं
ग्राम मुजगहन के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 2 में 40 बच्चे हैं। 15 बच्चों के पालकों ने खाने के लिए भेजने से मना कर दिया। गर्भवती 9 है, जिसमें से 2 ही भाेजन करने आईं। यहां पंचायत द्वारा सैनिटाइजर की व्यवस्था कराई गई।

लोहरसी: 20 में से 12 बच्चों ने गर्म भोजन किया
ग्राम लोहरसी के रूर्बन मिशन के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 4 में 20 बच्चे हैं। 12 बच्चे भोजन खाने के लिए आए। 8 बच्चों के पालकों ने नहीं भेजा। गर्भवती 2 है, जिनमें से एक ने आने से ही मना कर दिया।
आकस्मिक निधि से मास्क खरीदी कर सकते हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यक्रम अधिकारी एमडी नायक ने कहा कि आंगनबाड़ी में आकस्मिक निधि का उपयोग मास्क व सेनिटाइजर खरीदी के लिए कर सकते हैं। जिले में 1103 आंगनबाड़ी हैं, जिनमें 991 आंगनबाड़ी ग्रामीण क्षेत्रों में है।

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