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गाइडलाइन में देरी:15-20 मूर्तियों के ही ऑर्डर मिले, चिंता- गणेशोत्सव की तरह नुकसान न हो जाए

धमतरीएक महीने पहले
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  • क्वार नवरात्र 17 अक्टूबर से, अब तक जिला प्रशासन ने जारी नहीं की गाइडलाइन, शहर में 5 से 6 फीट तक की बन रहीं मूर्तियां

नवरात्र 17 अक्टूबर से है। केवल 19 दिन बचे हैं। अब तक प्रशासन ने गाइडलाइन नहीं दी है। इस कारण मूर्तिकारों और समितियों में असमंजस है। कुछ मूर्तिकार बगैर ऑर्डर के 5 से 6 फीट की मूर्तियां बना रहे हैं। कुछ को 15-20 मूर्ति के ऑर्डर ही मिले। उन्हें चिंता है कि गणेशोत्सव की तरह नवरात्र में भी नुकसान न हो जाए। मूर्तिकार रामस्वरूप कुंभकार, शंकरलाल कुंभकार, मुरली कुंभकार का कहना है कि इस साल होली के बाद से कोरोना के कारण तीज-त्योहार पर हाेने वाली आय पूरी तरह से समाप्त हाे गई। इनसे जुड़े व्यापार भी प्रभावित हुए हैं। मूर्तिकारों को गणेशोत्सव और नवरात्र, इन्हीं 2 मौकों पर काम मिलता है। मूर्तियां बनाकर ही घर का खर्च चलाते हैं, इस बार कारीगरों का मेहनताना भी पूरा नहीं दे पाए। गाइडलाइन नहीं हाेने के 50 फीसदी मूर्तियां नहीं बनी है। दुर्गोत्सव समितियां बड़े साइज की मूर्तियों की मांग करती थीं, लेकिन अभी तक सिर्फ करीब हर एक मूर्तिकार काे 15 से 20 मूर्तियों का ऑर्डर मिला है। सरकारी गाइडलाइन नहीं आने से मूर्तियां बनाने का काम धीमी गति से चल रहा है। जितने ऑर्डर मिल रहे हैं। उतनी ही प्रतिमा बनाई जा रही हैं। शृंगार सामग्री उधारी में लेनी पड़ी। दुर्गोत्सव समितियां भी बैठकें करने लगी हैं। उन्हें भी गाइडलाइन का इंतजार है।

ऐसे हैं हालात

  • शहर में हर साल करीब डेढ़ हजार प्रतिमाएं बनाई जाती हैं।
  • कोरोना के कारण 50 प्रतिशत भी मूर्तियां तैयार नहीं हुई हैं।
  • 150 से ज्यादा मूर्तिकारों का कारोबार प्रभावित हुआ।
  • शहर में 50 से अधिक सार्वजनिक जगह प्रतिमाएं बिठाई जाती है, लेकिन इस साल कहीं भी तैयारी शुरू नहीं हुई है।

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पूजा, आरती: पंडालों में केवल समिति के लोग पूजा, आरती करेंगे। पंडाल के सामने भक्तों व आयोजकों के बैठने के लिए कुर्सियां नहीं लगेगी। किसी भी एक समय मंडल पर 20 लोगों से ज्यादा एकत्रित नहीं होंगे।
दर्शन: इस बार भक्तों को पंडालों में माता के दर्शन दूर से ही होंगे। समिति को बांस, बल्लियां से बेरिकेटिंग कराना होगा। भक्तों को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ क्रमवार दर्शन कराने व्यवस्था करनी होगी।
भोग, प्रसाद: मूर्ति स्थापना के बाद से विसर्जन तक प्रसाद, चरणामृत, खाद्य पदार्थ, पेय पदार्थ नहीं बांटा जाएगा। विसर्जन के दिन रास्ते में कहीं स्वागत, प्रसाद बांटने पंडाल नहीं लगाया जाएगा।
डीजे, ढोल: मूर्ति स्थापना से लेकर विसर्जन के बाद तक किसी भी वाद्य यंत्र, ध्वनि विस्तारक यंत्र, डीजे आदि बजाने की अनुमति नहीं होगी। पंडाल में भजन, पूजन में भी लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। डीजे का उपयोग नहीं होगा।
सुरक्षा: मूर्ति स्थापित करने वाले व्यक्ति, समिति को पंडाल के आसपास 4 कैमरे लगाना होगा ताकि किसी भी व्यक्ति के संक्रमित होने पर ट्रेसिंग की जा सके। मूर्ति दर्शन व पूजा में शामिल कोई भी व्यक्ति बिना मास्क के नहीं जाएगा।
एहतियात: मूर्ति दर्शन के लिए आने वाले लोगों का नाम, पता, मोबाइल नंबर लिखना होगा। सैनिटाइजर, थर्मल स्क्रीनिंग, ऑक्सीमीटर, हैंडवॉश की व्यवस्था करनी होगी। थर्मल स्क्रीनिंग में बुखार मिलने पर पंडाल में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
कंटेनमेंट जोन: कंटेनमेंट जोन में मूर्ति स्थापना की अनुमति नहीं होगी। यदि पूजा अवधि के दौरान भी कोई कंटेनमेंट क्षेत्र घोषित हो जाता है, तो तत्काल पूजा बंद करना होगा।
(नोट- नवरात्र के लिए यह आदेश रायपुर, भिलाई में जारी हुआ है। धमतरी में भी कुछ इसी तरह हो सकता है।)

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