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2 नवजात को नई जिंदगी:एक बच्चे का 47 दिन में 500 ग्राम व दूसरे का 10 दिन में बढ़ा 340 ग्राम वजन

धमतरी9 दिन पहले
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  • जिला अस्पताल का एसएनसीयू कम वजन वाले बच्चों को दे रहा नई जिंदगी, 13 वॉर्मर और 4 फोटोथैरेपी से होता है बच्चों का इलाज

कोरोना काल में भी जिला अस्पताल का एसएनसीयू बड़े निजी अस्पतालों से ज्यादा बेहतर काम कर रहा है। यहां कम वजन वाले बच्चों को नई जिंदगी मिल रही है। कुरूद और नगरी के 2 बच्चों को बचाने में सफलता मिली। सिंघौरीकला निवासी दीपा ध्रुव के बच्चे को भर्ती के 47 दिन में 500 ग्राम और नगरी के अकलाडोंगरी के भोजबती मंडावी के बच्चे का 10 दिन में 340 ग्राम वजन बढ़ा गया। यह सफलता एसएनसीयू के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश देवांगन व नर्स की मेहनत से मिली है। खास बात यह कि जिसकी उम्मीद परिजन भी छोड़ चुके होते हैं। ऐसे बच्चों को नई जिंदगी दे रहे है। परिजन को एक रुपए भी खर्च नहीं करना पड़ा।

माताओं को भी मुफ्त भोजन: जिला अस्पताल के एसएनसीयू (गहन चिकित्सा कक्ष) में बच्चा जब तक भर्ती रहता है, उनकी माता को मुफ्त भोजन भी दिया जाता है। शिशु की देखभाल के बारे में उन्हें विशेष जानकारी भी दी जाती है। सब कुछ शुरू में शिशु को भर्ती करते समय जो 10 रुपए की ओपीडी पर्ची कटाई जाती है, उसी में होता है। इसके बाद किसी भी दवा या देखभाल के लिए 1 रुपए भी खर्च नहीं करने पड़ते।

एक्सपर्ट व्यू: समय से पहले जन्मे शिशु में आमतौर पर रहती हैं समस्याएं
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश देवांगन ने बताया कि किसी भी शिशु का औसत वजन न्यूनतम 2 किग्रा होना चाहिए। समय पूर्व जन्मे बच्चों में सांस की तकलीफ, झटके आना, तेज बुखार, पीलिया सहित कोई न कोई समस्या आमतौर पर रहती ही है। बच्चों को बेहतर इलाज के लिए रेडियंट बेबी वार्मर में रखा जाता है। वजन बढ़ाने के लिए 1 से 1.50 किलोग्राम के शिशु को बेबी वॉर्मर में करीब 20 दिन रखा जाता है। जिसका इलाज एसएनसीयू में किया जाता है।

ऐसे होती है बच्चों का देखभाल
एसएनसीयू में भर्ती बच्चों का वजन सामान्य स्तर पर लाने के लिए उन्हें रेडियंट वॉर्मर में रखा जाता है। मदर के टेम्प्रेचर में रखकर बच्चों को तंदरुस्त करते हैं। बच्चों को आॅक्सीजन की जरूरत होने पर नाक से पाइप के माध्यम से दिया जाता है। उसकी सतत निगरानी की जाती है। इसके बाद एंटीबायोटिक का इंजेक्शन भी दिया जाता है। जिला अस्पताल के एसएनसीयू में वर्तमान में 13 वॉर्मर व 4 फोटोथैरेपी मशीन है।

केस 1: डिलीवरी के तुरंत बाद कराया भर्ती
कुरूद ब्लॉक के सिंघौरीकला निवासी दीपा ध्रुव ने 2 सितंबर को शहर के एक निजी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया। जन्म के समय बच्चे का वजन 820 ग्राम था। कम वजह होने से बच्चे का हालत नाजुक देखकर बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया। परिजन बड़े निजी अस्पताल में न ले जाकर जिला अस्पताल के एसएनसीयू में लाकर भर्ती किया। भर्ती के 47 दिन में बच्चे का वजन 500 ग्राम बढ़ा। वर्तमान में 1 किलो 320 ग्राम वजन है। बच्चा बिल्कुल स्वस्थ हो गया।

केस 2: 50 हजार खर्च फिर लाए सरकारी अस्पताल
नगरी के अकलाडोंगरी निवासी भोजबती मंडावी का शहर के एक निजी अस्पताल में 3 अक्टूबर को डिलीवरी हुई। जन्म के बाद बच्चे का वजन 970 ग्राम था। अस्पताल के बेबी वॉर्मर पर रखकर इलाज शुरू हुआ। इलाज स्मार्ट कॉर्ड से चल रहा था। 5 दिन में 50 हजार रुपए खर्च हो गया। स्मार्ट कार्ड का पैसा खत्म होने पर नगद नहीं था। अस्पताल से छुट्‌टी करा लिया। बच्चे को 9 अक्टूबर को जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया। 10 दिन बाद बच्चे का वजन 340 ग्राम बढ़ा।

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