बैक्टीरिया से बच्चे बीमार:​​​​​​​गरियाबंद में लगाया गया हेल्थ कैंप, CMHO ने कहा- सिरप से नहीं, गंदगी से बीमार; कलेक्टर बोले- 3 दिन में कंट्रोल नहीं, तो बुलाएंगे एक्सपर्ट

गरियाबंद7 महीने पहले
कलेक्टर नीलेश क्षीरसागर ने बताया कि शिविर में 29 में से 7 ऐसे बच्चों में भी खुजली, जलन और बुखार के लक्षण मिले, जिन्होंने सिरप नहीं पीया है।

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में बच्चों की 'रहस्यमय बीमारी' को डॉक्टरों ने बैक्टेरियल डिजीज बताया है। उनका कहना है कि साफ-सफाई नहीं होने और गंदगी के चलते बच्चे बीमार पड़े हैं। CMHO ने कहा कि बच्चे आयरन सिरप पीने से बीमार नहीं हुए हैं। जांच में पता चला है कि 7 बच्चे ऐसे भी थे, जिन्होंने सिरप नहीं पी थी। वहीं कलेक्टर नीलेश क्षीरसागर ने कहा है कि अगर तीन दिन में बच्चों की बीमारी कंट्रोल नहीं होती है तो स्किन एक्सपर्ट बुलाए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने वहां हेल्थ कैंप लगाया था।

नवापारा पंचायत और उसके अंतर्गत आने वाले गांव में गुरुवार से बच्चों के बीमार पड़ने का सिलसिला शुरू हुआ था। पंचायत क्षेत्र में 30 बच्चों के शरीर और मुंह के अंदर दाने निकल आए। जलन होने के साथ ही बच्चों में बुखार के भी लक्षण भी दिखने लगे। तीन दिन तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर दैनिक भास्कर में खबर प्रकाशित हुई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने DPM रीना और BMO गजेंद्र ध्रुव के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम के साथ पंचायत भवन में कैंप लगाया।

शिविर में 5 माह से लेकर 10 वर्ष तक के 29 बच्चों का इलाज किया गया। एमडी मेडिसिन की देखरेख में सभी प्रभावितों को एंटीबायोटिक और अन्य जरूरी दवाएं दी गई हैं।
शिविर में 5 माह से लेकर 10 वर्ष तक के 29 बच्चों का इलाज किया गया। एमडी मेडिसिन की देखरेख में सभी प्रभावितों को एंटीबायोटिक और अन्य जरूरी दवाएं दी गई हैं।

डोर-टू-डोर सर्वे, बच्चों के ब्लड सैंपल लिए गए
अफसरों का कहना है कि ग्राम पंचायत और अधीनस्थ ग्राम का डोर-टू-डोर सर्वे किया गया। इसमें 9 बच्चों में समस्या मिली है, लेकिन इनमें से सिर्फ 3 बच्चों ने ही सिरप का सेवन किया था। यह समस्या ऐसे बच्चों को भी हुई है, जिन्होंने आयरन सिरप का सेवन नहीं किया है। शिविर में आए 5 बच्चों का ब्लड सैंपल भी लिया गया है। सर्वे के दौरान नया पारा में 5 से ज्यादा ऐसे बच्चे मिले जो दो दिनों में ठीक हो चुके थे। जबकि नयापारा, माहुलपारा और पानी गांव से आए 29 बच्चों का डॉक्टरों की टीम ने जांच कर दवाई दी है।

कैंप में 5 माह से लेकर 10 साल तक के 29 बच्चों की जांच
शिविर 5 माह से लेकर 10 वर्ष तक के 29 बच्चों का इलाज किया गया। एमडी मेडिसिन की देखरेख में सभी प्रभावितों को एंटीबायोटिक और अन्य जरूरी दवाएं दी गई हैं। CMHO ने बताया कि सभी को बैक्टेरियल डिजीज है। कपड़ों और स्पर्श से फैलने वाले इस डिजीज को लेकर लापरवाही बरती गई। पीड़ित बच्चों के परिजनों से पहनने के कपड़े और सोने के बिस्तर अलग रखने कहा गया है। उन्होंने बताया कि जब तक पूरी तरह से ठीक नहीं होंगे, डॉक्टरों की निगरानी में बच्चे रहेंगे।

पंचायत क्षेत्र में 30 बच्चों के शरीर और मुंह के अंदर दाने निकल आए। जलन होने के साथ ही बच्चों में बुखार के भी लक्षण भी दिखने लगे।
पंचायत क्षेत्र में 30 बच्चों के शरीर और मुंह के अंदर दाने निकल आए। जलन होने के साथ ही बच्चों में बुखार के भी लक्षण भी दिखने लगे।

जरूरत पड़ी तो स्टेट से बुलाया जाएगा चर्मरोग विशेषज्ञ
कलेक्टर नीलेश क्षीरसागर ने बताया को शिविर में 29 में से 7 ऐसे बच्चों में भी खुजली, जलन और बुखार के लक्षण मिले, जिन्होंने सिरप नहीं पीया है। शिशु सरंक्षण माह के तहत केवल 5 साल तक के बच्चों को सिरप दी गई, जबकि 10 साल के बच्चे भी बीमारी से इंफेक्टेड पाए गए। सिरप पीना और बैक्टेरियल डिजीज फैलने का समय संयोग से एक ही रहा, इसलिए ग्रामीण भ्रमित हुए। उन्होंने कहा, तीन दिन में कंट्रोल नहीं हुआ तो स्किन डिजीज एक्सपर्ट को बुलाया जाएगा। ग्रामीण धैर्य रखें।

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