2 पुजारियों के ऊपर दौड़ी 300 गायें VIDEO:खुशहाली के लिए जोखिम में जान; मान्यता है कि गोवर्धन और सहाड़ा देव होते हैं सवार

गरियाबंदएक महीने पहले

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में गांव की खुशहाली के लिए पुजारी के परिवार के सदस्य हर साल गोवर्धन पूजा में अपनी जान जोखिम में डालते हैं। परिवार के दो सदस्य गांव के बीच गली में बैठते हैं और उनके ऊपर से करीब 300 गौवंश दौड़ लगाते हैं। इस दौरान दोनों सदस्यों को कोई नुकसान नहीं होता है। मान्यता है कि दोनों सदस्यों पर गोवर्धन देव और सहाड़ा देव सवार होते हैं। इस परंपरा का निर्वहन इस बार भी किया गया।

गोवर्धन पूजा के दिन गोवंश दौड़ाने की परंपरा से पहले पूजन की गई।
गोवर्धन पूजा के दिन गोवंश दौड़ाने की परंपरा से पहले पूजन की गई।

गोठान के पास जुटे, खिचड़ी खिलाने की रस्म हुई
प्रदेश में मंगल कामना और विघ्न नाश के लिए सोटा खाने के अलावा गोवर्धन पूजा के दिन सिरहा (जिन पर देवता सवार होते हैं) पर बरदी (गोवंश का झुंड) दौड़ाने की पंरपरा है। इसी परंपरा के तहत मैनपुर विकासखंड के भाठिगढ़ पंचायत के भटगांव में दोपहर को पूरे गांव के लोग गोठान के पास इकट्‌ठा हुए। गांव भर के गोवंश भी एकत्र किए गए। फिर पूजा करने के बाद खिचड़ी खिलाने की रस्म निभाई गई।

सिरहा के ऊपर से दौड़ लगाते गौवंश।
सिरहा के ऊपर से दौड़ लगाते गौवंश।

खुशहाली के लिए देवता सारे दुख अपने ऊपर लेते हैं
गांव के बीच गली में दो सिरहा को बिठाया गया। फिर गली के एक छोर से पूरे गोवंश को छोड़ दिया गया। सभी गोवंश 15 मिनट तक सिराहा के ऊपर से दौड़ लगाते हुए उन्हें अपने खुरों से कुचलते रहे। इसके बाद भी दोनों सिरहा को कोई नुकसान नहीं हुआ।

गरियाबंद में खुशहाली के लिए मान्यता के अनुसार पुजारी परिवार के दो सदस्यों पर से गौवंश दौड़ाए गए।
गरियाबंद में खुशहाली के लिए मान्यता के अनुसार पुजारी परिवार के दो सदस्यों पर से गौवंश दौड़ाए गए।

इस परंपरा को सत्यता के रूप में ग्रामीण प्रमाणित मानते हैं। ग्राम प्रमुख हेमसिंह नेगी ने बताया कि गांव के खुशहाली के लिए देवता सारे परेशानी और दुख अपने ऊपर ले लेते हैं।

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