पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

CRPF जवान की रिहाई:12 गांव एकमत और रिहा हुए राकेश्वर; बस्तर और बस्तरिया की नब्ज को पहचानने वाले बने अगुवा, और अगवा जवान को रिहा करवाने आगे आए

जगदलपुर13 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • आईजी बोले -अभी इस मामले में ज्यादा जानकारी नहीं दे सकते
  • जवान राकेश्वर की रिहाई के बाद पद्मश्री धर्मपाल सैनी से विशेष बातचीत

6 दिन तक नक्सलियों के कब्जे में रहे सीआरपीएफ के कोबरा बटालियन के जवान राकेश्वर सिंह मनहास को नक्सलियों ने रिहा कर दिया है। 6 दिन जगह बदल-बदलकर जवान को रखा गया था। गुरुवार को उनकी रिहाई सुकमा जिले के तुमलगुड़ा में जनअदालत लगाने के बाद की गई है। बताया जा रहा है कि तुमलगुड़ा घटनास्थल से महज 15 किमी दूर है।

जवान की रिहाई के लिए पद्मश्री धर्मपाल सैनी, रिटायर्ड शिक्षक रुद्र करे, पूर्व सरपंच सुखमती हपका और आदिवासी समाज के नेता तेलम बैरैय्या ने मुख्य भूमिका निभाई है। रिहाई के लिए मध्यस्थता करने वाले सभी सदस्य बुधवार को ही जंगलों की ओर निकल गए थे इसके बाद गुरुवार सुबह इन्हें तुमलगुड़ा इलाके में आने कहा गया।

जब सदस्य वहां पहुंचे तो नक्सलियों ने वहां एक बड़ी जनअदालत लगाई हुई थी जिसमें करीब एक हजार से ज्यादा स्थानीय लोग शामिल हुए। इस जनअदालत में जवान की रिहाई करना है या नहीं, इसका फैसला जनता पर छोड़ा गया। इसके बाद जनता ने जवान की रिहाई की बात कही तो जवान को रिहा कर दिया गया। जवान को नक्सलियों ने कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है वह पूरी तरह से सुरक्षित था। जंगलों से निकलने के बाद जवान तर्रेम तक की दूरी बाइक पर बैठकर तय की।

भास्कर लाइव; जवान के हाथ बांधकर लाया गया जनता ने छोड़ने कहा तो खोली रस्सी
जवान की रिहाई के लिए नक्सलियों ने तुमलगुड़ा में जनअदालत लगाई, इसमें शामिल होने के लिए लोगों की अच्छी-खासी भीड़ पहुंची। भीड़ में सिर्फ तुमलगुड़ा ही नहीं, बल्कि आसपास के 12 से ज्यादा गांवों के लोग थे। लोगों की भीड़ जैसे-जैसे जमा होती गई वैसे-वैसे वर्दीधारी और हथियारबंद नक्सलियों की संख्या बढ़ गई। थोड़ी ही देर में पूरे इलाके में हथियारबंद नक्सली जमा हो गए। इस भीड़ में मध्यस्थता करने गए सामाजिक कार्यकर्ता और अन्य लोग भी शामिल थे। भीड़ जमा होते ही चारों ओर क्रांतिकारी और लाल सलाम के नारे गूंजने लगे। जनअदालत को अलग-अलग लोगों ने गोंडी भाषा में संबोधित किया। इसके बाद जनअदालत में मौजूद लोगों को टेकलगुड़ा मुठभेड़ की जानकारी दी गई और इस मुठभेड़ में बंदी बनाए गए राकेश्वर सिंह के बारे में बताया गया। इसके कुछ देर बाद जवान राकेश्वर सिंह को जनता के सामने लाया गया। उस समय जवान के हाथ बंधे हुए थे। जनता के सामने ही हाथों की रस्सी खोली गई।

पामेड़ एरिया कमेटी ने मध्यस्थों के हाथों सौंपा
जनअदालत लगाने और जवान की रिहाई का काम नक्सलियों के पामेड़ एरिया कमेटी ने किया। पामेड़ एरिया कमेटी के सदस्यों ने ही जवान को मध्यस्थों के हाथों में सौंपा गया है।

मध्यस्थ कैसे गए, आईजी बोले- अभी जवाब नहीं
मध्यस्थता करने गए 4 सामाजिक कार्यकर्ताओं को सरकार ने भेजा था या वे खुद मध्यस्थता के लिए गए थे, बस्तर आईजी पी सुंदरराज से यह पूछा गया तो उन्होंने इस पर कुछ भी जवाब देने से इंकार कर दिया और कहा कि अभी ऐसी कई बातें हैं जिन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है उन्होंने कहा कि इस मामले में शुक्रवार को ही वे ज्यादा जानकारी दे पाएंगे।

भास्कर ने पहले ही बताई थी संभावित लोकेशन
इधर भास्कर ने बुधवार और गुरुवार को जवान के लोकेशन की जानकारी पाठकों को दी थी। भास्कर ने ही सबसे पहले पाठकों को बताया था कि जवान को मुठभेड़ स्थल के पास ही रखा है और 6 घंटे में उसकी लोकेशन बदली जा रही है। इसके बाद गुरूवार की दोपहर हुआ भी बिल्कुल वैसा ही और जवान को मुठभेड़ स्थल से महज 15 किमी दूर रिहा कर दिया गया।

जवान की रिहाई के लिए ऐसे बनी योजना; अगवा होने के 24 घंटे बाद तय हुए थे मध्यस्थ
अपहृत जवान राकेश्वर सिंह के अगवा होने की जानकारी सरकार और सुरक्षाबलों के जवानों को टेकलगुड़ा मुठभेड़ के बाद ही लग गई थी लेकिन अफसरों को उम्मीद थी कि जवान अगवा नहीं हुआ है। घटना के 24 घंटे बाद ही जब जवान की कोई खबर नहीं मिली तो अफसर यह मान गए थे कि जवान अगवा हो गया है और जवान की सुरक्षित रिहाई के लिए प्लान तैयार किया जाने लगा था। इसी बीच अफसरों ने प्लानिंग कर ली थी कि जवान को रिहा कैसे करवाया जाए।

यही कारण है कि जिस दिन नक्सलियों ने जवान के अपहरण वाली बात कही थी उसी दिन पुलिस प्रशासन की ओर से धर्मपाल सैनी को फोन कर दिया गया था कि उन्हें मध्यस्थ की भूमिका निभानी है। अगले ही दिन जवान के अपहरण की जानकारी पूरे देश को लग गई। धर्मपाल सैनी की ही तरह अन्य मध्यस्थों को पहले से पता था कि उन्हें आगे एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। पुलिस प्रशासन और मध्यस्थों ने इस बात की भनक किसी को नहीं लगने दी और बेहद खामोशी से सारा काम किया। बताया जा रहा है कि पद्मश्री धर्मपाल सैनी ने तो अपने आश्रम के खास सिपहसलारों को भी इसकी जानकारी नहीं दी थी और वे बुधवार की रात को ही आश्रम छोड़ चुके थे।

नक्सली बोले- अगली बार जब निर्दोष गांव वालों को आप पकड़ें तो पूछताछ के बाद जेल न भेजें
नक्सलियों के चंगुल में 6 दिन से फंसे जवान राकेश्वर की रिहाई हो गई है। कहने को तो नक्सलियों ने उसे निशर्त रिहा किया है लेकिन जब जवान को जनअदालत में लाया गया तब नक्सलियों की ओर से जनअदालत में ऐलान किया गया है कि जैसे आज हम जवान काे सकुशल रिहा कर रहे हैं वैसे ही आगे से जब आप(पुलिस) निर्दोष ग्रामीणों को पकड़ें तो उन्हें पूछताछ के बाद तत्काल सकुशल रिहा करें और उन्हें जेल न भेजें, यदि ऐसा नहीं होता है तो फिर आगे हमसे भी ऐसी किसी सकरात्मक पहल की उम्मीद न रखें।

बस्तर और बस्तरिया की नब्ज को पहचानने वाले बने अगुवा, और अगवा जवान को रिहा करवाने आगे आए

धर्मपाल सैनी: समाजसेवी
मूलतः मध्यप्रदेश के धार जिले के रहने वाले धरमपाल सैनी विनोबा भावे के शिष्य रहे हैं। बालिका शिक्षा में बेहतर योगदान के लिए 1992 में सैनी को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। 2012 में ‘द वीक’ मैगजीन ने सैनी को मैन ऑफ द इयर चुना था।

जय रुद्र करे: रिटायर्ड शिक्षक
रिटायर्ड शिक्षक हैं ये दंतेवाड़ा इलाके के रहने वाले हैं इसी इलाके में आदिवासियों के उत्थान के लिए काम करते हैं वे रिटारयमेंट के बाद से धर्मपाल सैनी से जुड़ गये और और अब उनके नेतृत्व में ही सामाजिक कार्यों में जुटे हुए हैं।

तेलम बाेरैय्या: आिदवासी नेता
पूर्व शिक्षक हैं और मुरदंडा के रहने वाले हैं तेलम बाेरैय्या पिछले 4 साल से गोंडवाना समाज के अध्यक्ष हैं। आदिवासी समाज के हित के मुद्दों पर वे सामने आते रहे हैं। जवान की रिहाई में उनकी भूमिका अहम रही।

सुकमती हपका: पूर्व सरपंच
सुकमती हपका मुरदंडा की पूर्व सरपंच हैं। सामाजिक गतिविधियों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती रही हैं। वे गोंडवाना समाज की उपाध्यक्ष हैं। इलाके के आदिवासियों की समस्याओं को लेकर आवाज उठाती रही हैं और आंदोलन भी करती रही हैं।

नक्सलियों ने जो शर्त रखी थी बस उसे माना और जवान छोड़ दिया गया: सैनी
(जवान राकेश्वर की रिहाई के बाद पद्मश्री धर्मपाल सैनी से हमारे संवाददाता मोहम्मद इमरान नेवी ने विशेष बातचीत की)

मध्यस्थता करने किसने भेजा था?
हमको प्रशासन ने भेजा था, प्रशासन ने नियुक्त किया था।

आपको कब बताया गया कि वार्ता करनी है?
घटना के बाद ही कहा गया था, अगले दिन पेपर में पढ़ लिया जवान अगवा है।

आपको किसने मध्यस्थता के लिए फोन किया था, सीएम या प्रशासन या पुलिस ने?
पुलिस प्रशासन की ओर से फोन आया था मध्यस्थता के लिए।

वहां क्या हुआ?
वहां सबकुछ सकारात्मक था, जनता ने भी कहा कि जवान को छोड़ दिया जाए, कंधे पर बंदूकें टंगी और सकारात्मक जवाब मिले तो एक विश्वास बढ़ता है।

नक्सलियों ने कोई शर्त रखी क्या?
नहीं उन्होंने मध्यस्थता की जो शर्त रखी थी उसे ही माना और जवान को छोड़ दिया।

आप लोग कैसे पहुंचे मौके तक पैदल या मोटरसाइकिल में?
हम मोटरसाइकिल के जरिये गये थे सुबह साढ़े नौ बजे गांव तक पहुंच गए थे शाम 5 बजे वापस आए, मोटरसाइकिल की यात्रा आरामदायक नहीं थी।

क्या मैसेज देना चाहते हैं सबको?
अगर नेक नीयती से काम किया जाए तो सफलता मिलती है।

जवान ने कुछ बताया?
हां जवान ने बताया कि उसे कोई तकलीफ या प्रताड़ना या धमकी नहीं दी गई है।

आप की उम्र 90 पार है जब मध्यस्थता की बात आई तो मन में क्या आया?
मेरे मन में आत्मविश्वास था कि मध्यस्थता का काम पूरा हो जाएगा। मैं एक बार जो ठान लेता हूं वो करके रहता हूं।

जवान को कहां रखा गया है अभी?
जवान को चेकअप के लिए रखा गया है।

अब आगे क्या चाहते हैं आप?
सब ने कहा है कि जवान की घर की फोटो देखना चाहते हैं तो हमने अफसरों को कहा है कि उसे घर भिजवा दें।

खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव- आज आप किसी विशेष प्रयोजन को हासिल करने के लिए प्रयासरत रहेंगे। घर में किसी नवीन वस्तु की खरीदारी भी संभव है। किसी संबंधी की परेशानी में उसकी सहायता करना आपको खुशी प्रदान करेगा। नेगेटिव- नक...

    और पढ़ें