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  • 4 Bridges Are Being Built Under The Supervision Of 600 Soldiers, Now Ration Will Reach 100 Villages, Villagers Said Happy, But If You Reveal It, The Naxalites Will Kill

नक्सलियों की मांद में ये हैं राहत के पुल:600 जवानों की निगरानी में बन रहे हैं 4 पुल, 100 गांवों तक अब पहुंचेगा राशन; ग्रामीण बोले- खुशी है, लेकिन जाहिर करेंगे तो नक्सली मार देंगे

जगदलपुर3 महीने पहलेलेखक: लोकेश शर्मा
ग्रामीणों ने कहा कि ऑन कैमरा खुशी जाहिर कर दी तो नक्सली मार देंगे। इस पुल निर्माण का समर्थन करने वाले पाहुरनार के सरपंच पोसेराम की नक्सली हत्या कर चुके हैं।

बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती नदी बारिश के दिनों में कई गांवों के लिए अभिशाप बन जाती है। बस्तर के 30 से ज्यादा नदी घाटों में डोंगी पलटने से हर साल बारिश में ही औसतन 15 से ज्यादा मौतें होती हैं। बस्तर के 2 ज़िलों के नदी पार बसे 100 से ज्यादा माड़ के गांवों को राहत देने दो जिलों में इंद्रावती पर 4 पुलों का निर्माण हो रहा है। ये पूरा इलाका नक्सलियों के कब्जे में है। छत्तीसगढ़ बनने के बाद पिछले 21 साल से नक्सली यहां सड़क, पुल नहीं बनने दे रहे थे। इसके चलते यहां सरकार की योजनाएं नहीं पहुंच पाती हैं। बाजार, अस्पताल, राशन लेने, स्कूल जाने नदी पार करने बड़ी आबादी डोंगी से उफनती इंद्रावती को पार करती हैं और जान गंवाती है। अन्ततः सरकार ने फोर्स की मदद ली। सुरक्षा बलों के चार कैंप पुलों के निर्माण वाली जगह पर स्थापित किए गए। सैकड़ों जवानों की निगरानी में पुलों का निर्माण शुरू हुई। भास्कर की टीम इन चारों पुल के निर्माण स्थल पर पहुंची। टीम ने यह देखा कि आखिर नक्सलियों की मांद में ये पुल कैसे और कितने बने हैं।

बस्तर के 2 जिलों के नदी पार बसे 100 से ज्यादा माड़ के गांवों को राहत देने दो जिलों में इंद्रावती पर 4 पुलों का निर्माण हो रहा है। ये पूरा इलाका नक्सलियों के कब्जे में है।
बस्तर के 2 जिलों के नदी पार बसे 100 से ज्यादा माड़ के गांवों को राहत देने दो जिलों में इंद्रावती पर 4 पुलों का निर्माण हो रहा है। ये पूरा इलाका नक्सलियों के कब्जे में है।

छिंदनार- पाहुरनार पुल, इसके लिए सरपंच की हत्या हुई

भास्कर टीम दंतेवाड़ा जिले के छिंदनार- पाहुरनार घाट पहुंची। यहां की पूरी तस्वीर ही बदली नजर आई। फोर्स की पहरेदारी में इंद्रावती नदी पर पुल निर्माण का काम अभी अंतिम चरण पर चल रहा। आने वाले लगभग 15 दिनों में बचे स्लैब का काम भी पूरा हो जाएगा और बारिश के दिनों में ग्रामीण पुल से ही नदी पार कर सकेंगे। इलाके के ग्रामीणों के चेहरों पर मुस्कान थी कि इस बार उन्हें डोंगी से नदी पार नहीं करना पड़ेगा। खौफ अब भी नक्सलियों का है। यही वजह है कि इस खुशी को ग्रामीण कैमरे के सामने लाने से बचते रहे। एक ग्रामीण ने कह भी दिया कि ऑन कैमरा खुशी जाहिर कर दी तो नक्सली मार देंगे। इस पुल निर्माण का समर्थन करने वाले पाहुरनार के सरपंच पोसेराम की नक्सली हत्या कर चुके हैं। पोसेराम के बेटे को भी नक्सलियों ने निशाना बनाया। कई बार उसकी हत्या की कोशिश की। अंततः पूरा परिवार गांव छोड़ने मजबूर हुआ। कई ग्रामीणों की नक्सली बेरहमी से पिटाई भी कर चुके हैं।

छिंदनार के ही बड़े करका घाट में सुरक्षा बलों का दूसरा कैम्प स्थापित हुआ और इस जगह अभी पुल निर्माण की शुरुआत हुई है। पाहुरनार व करका घाट की दूरी महज एक किमी ही है।
छिंदनार के ही बड़े करका घाट में सुरक्षा बलों का दूसरा कैम्प स्थापित हुआ और इस जगह अभी पुल निर्माण की शुरुआत हुई है। पाहुरनार व करका घाट की दूरी महज एक किमी ही है।

बड़े करका पुल, ग्रामीण बोले- मुचनार घाट में बनना था पुल

छिंदनार के ही बड़े करका घाट में सुरक्षा बलों का दूसरा कैम्प स्थापित हुआ और इस जगह अभी पुल निर्माण की शुरुआत हुई है। पाहुरनार व करका घाट की दूरी महज़ एक किमी ही है। अभी पुल का निर्माण पूरा होने में वक़्त है। इस पुल के बनने से नदी पार गांव करका के ही सिर्फ 500 ग्रामीणों को फायदा मिलेगा। हालांकि करका घाट के पार ग्रामीणों की बड़ी आबादी निवास करती है। यहां के ग्रामीणों ने कहा कि इस जगह पुल निर्माण व्यर्थ है। क्योंकि बड़े करका के ग्रामीण तो पाहुरनार पर बने पुल से आना- जाना कर सकते हैं। इसकी बजाए मुचनार घाट पर पुल बनता तो ज्यादा फायदा मिलता।

सरकारी आंकड़ों की बात करें तो दोनों जिलों नाव पलटने से 5 साल में 55 से ज्यादा लोगों की मौतें हुई हैं।
सरकारी आंकड़ों की बात करें तो दोनों जिलों नाव पलटने से 5 साल में 55 से ज्यादा लोगों की मौतें हुई हैं।

माओवादियों के गढ़ फुंडरी में आधा बन गया पुल

भास्कर की टीम बीजापुर जिले के फुंडरी इंद्रावती नदी घाट पहुंची। यहां पुल का निर्माण चल रहा था। सुरक्षा बलों का कैम्प होने से निर्माण करने वाली एजेंसी को राहत है। दावा है अगली गर्मी तक निर्माण पूरा हो जाएगा। फुंडरी का इलाका भी पूरी तरह से माओवादियों का गढ़ है। यहां पुल निर्माण करवाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती थी, लेकिन सुरक्षाबलों का कैम्प खुलने के बाद काम शुरू हुआ है। फुंडरी में पुल का लगभग 40 से 50 प्रतिशत काम भी पूरा हो चुका है। बरसात के दिनों में इंद्रावती नदी उफान पर होती है, इसलिए अब कुछ महीने काम भी रुक जाएगा।

कैंप बनने के बाद ही शुरू हो पाया बेदरे घाट पुल

बेदरे घाट में हाल ही में कैम्प स्थापित होने के बाद पुल निर्माण शुरू किया गया है। इसे बनने में थोड़ा वक्त लगेगा। नक्सलियों का खौफ यहां भी देखने को मिला। भास्कर ने जब ग्रामीणों से जानने की कोशिश की तो कुछ कहने से ही मना कर दिया। भैरमगढ़ एसडीएम एआर राणा ने कहा कि नदी पार 60 गांव की लगभग 12 हजार की बड़ी आबादी है। बरसात में इलाका मुख्यालय से कट जाता है। ग्रामीणों के लिए अच्छी बात यह है कि यहां पुल बन रहा है। फुंडरी में आने वाले साल में बरसात के दिनों में ग्रामीणों की पुल के ऊपर से आवाजाही शुरू हो जाएगी।

अफसर बोले- पुल बना है अब आजादी दिलाएंगे

दंतेवाड़ा कलेक्टर दीपक सोनी ने कहा कि इस बरसात पाहुरनार घाट से नदी पार इलाके के ग्रामीण डोंगी से नदी पार नहीं करेंगे। नदी पार इलाके में शासन की हर योजनाएं पहुंचाना आसान होगा। दंतेवाड़ा एसपी डॉ अभिषेक पल्लव ने कहा कि पुल बन गया है। अभी नदी पार गांव में भी कैम्प स्थापित होगा। नक्सलवाद से ग्रामीणों को जरूर आजादी दिलाएंगे।

इंद्रावती नदी पार नक्सलियों का है राज

इंद्रावती नदी पार का इलाका पूरी तरह से माओवादियों का गढ़ है। इंद्रावती एरिया कमेटी के खूंखार माओवादी मल्लेस, अजय सहित अन्य हार्डकोर हथियारबंद माओवादियों का यहां राज चलता है। बरसात के दिनों में नदी के अंतिम छोर वाले घाट में माओवादियों का डेरा रहता है। बरसात में उफनती इंद्रावती नदी माओवादियों के लिए सुरक्षा कवच होती है, क्योंकि जवान नदी पार नहीं पहुंच सकते। नदी पर पुल निर्माण से नक्सली पूरी तरह बौखलाए हुए हैं। लगातार इलाके में आईईडी प्लांट कर रहे हैं। कुछ दिन पहले पाहुरनार की बीच बस्ती में आईईडी ब्लास्ट होने से एक जवान शहीद हो गया था।

इतनी हुई हैं मौतें

इंद्रावती नदी में हर साल बारिश के दिनों में नाव पलटने से हादसे होते हैं। कई दफा ग्रामीणों के शव भी नहीं मिल पाते। यदि सरकारी आंकड़ों की बात करें तो दोनों जिलों नाव पलटने से पिछले 5 सालों में 55 से ज्यादा लोगों की मौते हुई है। इसके अलावा उफनती इंद्रावती नदी के बीच मे चट्टान में नाव फंसने से 100 से ज्यादा लोगों को प्रशासन ने रेस्क्यू कर भी बचाया है। ये तो सरकारी आंकड़े हैं। नदी में बहने, डूबने की संख्या इससे कई गुना ज्यादा है।