बाघ की हत्या का मामला:3 शिकारियों समेत 6 और गिरफ्तार, अब तक 14 को जेल

जगदलपुर8 महीने पहले
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  • फंदे में फंसने के बाद लालच में ले ली जान, शिकारियों ने बाघ का मांस भी खाया

बाघ के शिकार मामले में वन और पुलिस विभाग की कार्रवाई रविवार तक चलती रही। शनिवार से शुरू किए गए इस अभियान में रविवार तक कुल 6 और आरोपियों की गिरफ्तारियां हो गई हैं। अब तक मामले में कुल 14 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। मुख्य वन संरक्षक मो. शाहिद ने बताया कि 3 शिकारियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके अलावा फरार चल रहे दोनों एएसआई व प्रधान अध्यापक को भी गिरफ्तार कर लिया है।

मिली जानकारी के अनुसार बाघ की खाल बरामद होने के बाद पुलिस और वन विभाग की टीम अब इस मामले को करीब-करीब पूरी तरह से सुलझा चुकी है। रविवार को तीनों शिकारी बुदरू, भीमा और रामलाल को भी गिरफ्तार कर लिया।

वन विभाग के सूत्रों ने बताया कि इन तीनों आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि इन्होंने जंगली सुअर को फंसाने के लिए बचेली के अंदरूनी इलाके में फंदा लगाया था अचानक इसमें बाघ फंस गया। पहले तो वह घबरा गए लेकिन अचानक मन में लालच आ गया। इसके बाद तीनों ने बाघ को मारा, उसका मांस खाया और कुछ सुखाने के लिए रख दिया। बाघ की खाल को छिपा दिया गया था।

शिकार और खाल बेचने में किसकी क्या भूमिका रही

बुदरू, भीमा और रामलाल: बाघ इन्हीं के द्वारा लगाए गए फंदे में फंसा था, इन्होंने ही बाघ को मारा और खाल निकाली।
अज्ञात भांसी इलाके का एक टीआई: इसने ही बुदरू और साथियों से खाल ली और उसे भगा दिया और एएसआई को खाल दी।
प्रिंसिपल रामेश्वर सोनवानी: इसने एनटीसीए की महिला अफसर जो खरीदार बनी थी उसे खाल के संबंध में डील की।
एएसआई संतोष बघेल और रमेश अंगनपल्ली: प्रिंसिपल सोनवानी, भांसी इलाके के अज्ञात टीआई से संपर्क में थे। खाल को महिला अफसर को डिलीवरी देने और उससे पैसे लेकर वापस दंतेवाड़ा और बीजापुर में बांटने की जिम्मेदारी इन पर थी। इनके कंधे पर ही खाल को सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी थी यही कारण था कि इन्होंने कैंप से पांच जवानों को साथ रखा।
हरप्रसाद गावड़े (ड्राइवर स्वास्थ्य विभाग), सुरेंद्र कुमार देवांगन (टैक्निशियन): ये एएसआई के पहचान के थे इनकी गाड़ी एएसआई ने मांगी थी और इन्हें भी साथ चलने कहा था इन्हें शिकार और खाल संबंधी पूरी जानकारी नहीं थी।

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