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12 साल हक की लड़ाई:71 में से 61 बेटियों की अब नगरनार स्टील प्लांट में लगेगी नौकरी, शेष 10 मामलों में समिति 10 दिनों में सौंपेगी रिपोर्ट

जगदलपुर2 महीने पहले
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संपत्ति में समानता के अधिकार के आधार पर 61 बेटियों के NMDC के नगरनार स्थित इस्पात संयंत्र में नौकरी के लिए पात्र पाया गया है। - Dainik Bhaskar
संपत्ति में समानता के अधिकार के आधार पर 61 बेटियों के NMDC के नगरनार स्थित इस्पात संयंत्र में नौकरी के लिए पात्र पाया गया है।

12 सालों से अपने हक की लड़ाई लड़ रही बस्तर की 61 बेटियों का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ किरणमयी नायक मंगलवार को जगदलपुर पहुंचीं। सुनवाई के बाद संपत्ति में समानता के अधिकार के आधार पर 61 बेटियों के NMDC के नगरनार स्थित स्टील प्लांट में नौकरी के लिए पात्र पाया गया है। जबकि शेष 10 मामलों के लिए समिति 10 दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपेगी। अब आयोग की अध्यक्ष ने NMDC के हैदराबाद कार्यालय से आवश्यक कार्यवाही पूरी कराने के निर्देश कलेक्टर रजत बंसल को दिए हैं।

71 प्रकरण में से 10 प्रकरणों में वन टाईम सेटलमेंट की जांच कर 10 दिन के भीतर रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
71 प्रकरण में से 10 प्रकरणों में वन टाईम सेटलमेंट की जांच कर 10 दिन के भीतर रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

98 प्रकरणों की हुई सुनवाई
मंगलवार को बस्तर जिले से संबंधित 98 प्रकरणों की सुनवाई हुई। इसमें नगरनार स्टील प्लांट में समानता के अधिकार के आधार पर नौकरी की मांग करने वाली 71 महिलाओं के प्रकरण भी शामिल थे।
प्रकरण की सुनवाई के दौरान आयोग द्वारा नामित सदस्यों की लिखित रिपोर्ट की प्रति आयोग को प्रस्तुत की गई। 25 दिसंबर 2006 को कट ऑफ डेट के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट के अनुसार मात्र 18 बेटियों को नौकरी के लिए पात्र पाया गया था।

महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक ने कहा कि कट ऑफ डेट का प्रावधान जमीन की खरीद फरोख्त पर नियंत्रण के लिए है। यह नियम वारिसान के प्राकृतिक अधिकार पर लागू नहीं हो सकता। बेटियां जन्म से ही पिता की संपत्ति में अपना स्वामित्व धारण करती हैं और बेटे के समान ही बेटियों को भी संपत्ति में बराबरी का हक मिलना ही चाहिए।

ये मामले भी थे शामिल

सुनवाई के दौरान 20 प्रकरणों की सुनवाई पूरी कर मामले को निराकृत किया गया, जिसमें दहेज प्रताड़ना, कार्यस्थल पर प्रताड़ना, मानसिक प्रताड़ना से संबंधित प्रकरण शामिल थे। वहीं आयोग की अध्यक्ष डाॅ. नायक ने कहा कि आयोग बेटियों के अधिकारों की रक्षा के लिए संकल्पित है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक निर्णय में महिला आयोग की भूमिका तभी संभव हो पाई, जब यहां की बेटियों ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए इसे माध्यम बनाया।

हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम 2005 में संशोधन हो चुका है। इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय के हाल ही के निर्णय में पुत्र और पुत्री को समान अधिकार देने का निर्देश भी है। इन 71 मामले में से 10 मामलों में वन टाईम सेटलमेंट और नौकरी दिए जाने के निर्देश हैं। इस कारण इन 71 प्रकरण में से 10 प्रकरणों में वन टाईम सेटलमेंट की जांच कर 10 दिन के भीतर रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि इन 10 मामलों में भी उचित निर्णय लिया जा सके।

-रजत बंसल, कलेक्टर बस्तर

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